“दोनों हाथों से लूट: पंचायतों से भी मानदेय, जनपद से भी—ऑपरेटरों का डबल खेल सामने”
खैरागढ़. छुईखदान जनपद पंचायत में सीधे वेंडर भुगतान के फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बावजूद कार्रवाई न होने से पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला पंचायत ने महज सीईओ पर कार्रवाई करने संचालक को पत्र भेजकर अपना पल्ला झाड़ लिया, लेकिन धरातल पर न तो किसी कर्मचारी पर कार्रवाई हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने जवाबदेही तय करने की जहमत उठाई। मामले में शामिल लिपिक लिकेश तिवारी पर कार्यवाही करने का पत्र जनपद सीईओ को जारी किया गया था, परंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
अब एक नया मामला सामने आया है जिसने जनपद प्रशासन की कार्यशैली पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार जनपद के तीन ऑपरेटर—सतीश जांगड़े, भुवन रजक और दीपक साहू—ने एक ही समय में दोहरी भुगतान प्राप्त कर सिस्टम को चकमा दिया। पंचायतों की डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर) का उपयोग कर ये ऑपरेटर पंचायत से भी भुगतान निकाल रहे थे, जबकि यह सभी केवल जनपद स्तर के कर्मचारी हैं। रिकॉर्ड बताता है कि उन्होंने बिना प्रत्यक्ष पंचायत कार्य किए लाखों का भुगतान उठा लिया।
ऑपरेटर सतीश जांगड़े का मामला: पंचायतों से 33,350 रुपए, जनपद से अलग 50,000 रुपए
वित्तीय वर्ष 2024-25 में सतीश जांगड़े ने जनपद से 50,000 रुपए ऑपरेटर मानदेय प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त भुरभुसी पंचायत से 15,000 रुपए, बिरनपुरकला से 6,000, चिलगुडा से 5,350, लिमो पंचायत से 2,000 और ठंडार पंचायत से 5,000 रुपए अलग से प्राप्त किए। कुल मिलाकर पंचायतों से 33,350 रुपए की अतिरिक्त कमाई की गई। यह स्पष्ट रूप से दोहरी भुगतान का संगठित खेल है। सवाल है—क्या इतने विभिन्न पंचायतों में जनपद कार्यालय में एक ही समय में कार्य करना संभव है?
दीपक साहू का मामला: पंचायतों से 53,400 रुपए, जनपद से 50,000 रुपए अतिरिक्त
दीपक साहू ने भी दोहरी भुगतान का लाभ उठाया। रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने आमाघाट कांदा से 12,000, भरदागोड़ से 9,000, बुढानभाठ से 6,000, कुटेलीखुर्द से 3,500, पदमावतीपुर से 7,000, सिलपट्टी से 6,000 और उदान जीराटोला पंचायत से 9,900 रुपए प्राप्त किए। कुल 53,400 रुपए पंचायतों से और 50,000 रुपए जनपद से प्राप्त किया। मतलब साफ है कि दोनों जगह दीपक साहू ने कार्य किया होगा तभी भुगतान प्राप्त किया है जो कि संभव नहीं
भुवन रजक का मामला: चार पंचायतों से 50,000 रुपए के ऊपर
भुवन रजक ने भी खुडमुठी से 11,000, पथर्रा से 5,500, सिंगारपुर से 23,210, ठाकुरटोला से 11,000 रुपए प्राप्त किए। यह कुल 50,710 रुपए पंचायतों से अलग से लिए गए। वही जनपद से भी 50,000 रुपए मिले। मतलब एक ही वित्तीय वर्ष में एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग जगह से लाख रुपए से अधिक भुगतान प्राप्त करना। बहुत बड़ा वित्तीय अनियमितता का संकेत है।
लिकेश तिवारी के विरुद्ध कार्रवाई से संबंधित जो पत्र मेरे संज्ञान में आया है, उसको देख लेती हु । वहीं ऑपरेटरों द्वारा एक ही समय में पंचायत और जनपद दोनों स्थानों से मानदेय लेने का जो मामला सामने आ रहा है, वह अत्यंत गंभीर है। कोई भी व्यक्ति एक ही समय में दो जगह कार्य नहीं कर सकता। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाएगी।
केश्वरी देवांगन, सीईओ जनपद पंचायत छुईखदान



