पहले पानी टैंकर की सप्लाई फिर डेढ़ लाख का भुगतान, फिर उसी फर्म को दो साल बाद GeM में ठेका!
2023-24 में सप्लाई के बाद कलेक्टर ने लगाई आपत्ति, दो साल बाद GeM से फिर उसी फर्म को मिला काम; 19 पंचायतों के 57 लाख की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
खैरागढ़. विधायक निधि से जनपद पंचायत छुईखदान की 19 ग्राम पंचायतों में पानी टैंकरों की खरीदी का मामला अब खरीद प्रक्रिया की गंभीर अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। वर्ष 2023-24 में प्रत्येक टैंकर के लिए 3 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। कई पंचायतों में टैंकर की सप्लाई होने के बाद संबंधित फर्म को करीब 1.50 लाख रुपए का ऑफलाइन भुगतान भी कर दिया गया। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर ने खरीद प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए नियमानुसार GeM पोर्टल के माध्यम से खरीदी करने के निर्देश दिए। इसके बाद मामला करीब दो साल तक आगे नहीं बढ़ा और अब 2026-27 में उसी टैंकर की GeM प्रक्रिया अपनाकर खरीद दर्शाई गई।
टैंकर पहले ही पहुंचा, फिर GeM पर दोबारा खरीद की प्रक्रिया
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टैंकर 2023-24 में ही पंचायतों में पहुंच चुका था और संबंधित फर्म को डेढ़ लाख रुपए का भुगतान भी हो गया था। तत्कालीन कलेक्टर की आपत्ति के बाद यदि पुरानी खरीद प्रक्रिया को नियमसम्मत नहीं माना गया था, तो उसे विधिवत निरस्त कर नई खरीद प्रक्रिया अपनाई जानी थी। लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार टैंकर पंचायतों में पहले से मौजूद रहे और करीब दो साल बाद 2026-27 में उसी टैंकर की खरीद के लिए GeM प्रक्रिया अपनाई गई। यानी पहले सामग्री की सप्लाई, फिर आपत्ति और उसके बाद उसी सामग्री को GeM प्रक्रिया से जोड़ने का घटनाक्रम सामने आता है।
जिस फर्म ने पहले सप्लाई किया, उसी को GeM में भी काम
मामले का सबसे अहम बिंदु संबंधित फर्म को लेकर है। 2023-24 में जिस फर्म मां बिंदेश्वरी लेथ मशीन से टैंकर की सप्लाई कराई गई और जिसे डेढ़ लाख रुपए का भुगतान किया गया, बाद की GeM प्रक्रिया में भी उसी फर्म का नाम सामने आ रहा है। यानी जिस फर्म ने पहले ही टैंकर पंचायत में पहुंचाया, उसी फर्म ने बाद में GeM की प्रक्रिया में भाग लिया और उसी को खरीद का काम मिलने की बात सामने आई है। यदि GeM रिकॉर्ड इसकी पुष्टि करता है, तो यह भी देखना होगा कि पहले से सप्लाई हो चुके टैंकर को बाद की GeM प्रक्रिया में किस रूप में शामिल किया गया और पूरी प्रक्रिया को किस स्तर से संचालित किया गया।
GeM में 3 लाख की बिड, भुगतान सिर्फ डेढ़ लाख का
भुगतान को लेकर भी मामला गंभीर है। टैंकर के लिए GeM प्रक्रिया में 3 लाख रुपए की बिड होने की जानकारी है, लेकिन इसके बाद केवल 1.50 लाख रुपए का भुगतान किया गया। GeM खरीद में बिड/ऑर्डर की स्वीकृत राशि के मुकाबले आधा भुगतान किए जाने का आधार क्या था, यह स्पष्ट होना जरूरी है। यदि GeM पर खरीद 3 लाख रुपए की थी तो उसके भुगतान की प्रक्रिया भी उसी खरीद आदेश और शर्तों के अनुसार होनी चाहिए। ऐसे में 3 लाख रुपए की GeM खरीद के नाम पर डेढ़ लाख रुपए का भुगतान किस नियम और किस दस्तावेज के आधार पर किया गया, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है।
दो साल बाद प्रक्रिया, लेकिन टैंकर वही पुराना
मामले में पंचायत सचिवों के बयानों से भी यह बात सामने आई है कि टैंकर 2023-24 में ही पंचायतों में पहुंच चुके थे। देवपुराघाट के सचिव सुरेश झारिया ने पहले डेढ़ लाख रुपए के चेक भुगतान और बाद में डेढ़ लाख रुपए GeM से आने की बात कही। मोहगांव के तत्कालीन सचिव रामजी जंघेल ने भी 2023-24 में टैंकर आने और डेढ़ लाख रुपए के ऑफलाइन भुगतान की पुष्टि की। मोहगांव के वर्तमान सरपंच जंगल दास बघेल ने कहा कि टैंकर उनके द्वारा नहीं खरीदा गया, बल्कि पहले से पंचायत में मौजूद था। ऐसे में 2026-27 में हुई GeM प्रक्रिया को लेकर पूरी खरीद श्रृंखला का रिकॉर्ड से मिलान जरूरी हो गया है।
19 पंचायतों का काम एक ही फर्म तक कैसे पहुंचा?
मामले में 19 पंचायतों के लिए कुल 57 लाख रुपए के टैंकर स्वीकृत हैं। यदि पहले सप्लाई करने वाली वही फर्म बाद में GeM प्रक्रिया में भी चयनित हुई और 19 पंचायतों के टैंकरों की खरीद उसी के माध्यम से हुई, तो यह पूरी प्रक्रिया जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है। आखिर पहले ऑफलाइन भुगतान के बाद उसी फर्म को दोबारा GeM में अवसर कैसे मिला, GeM की बिड किसने लगाई, सभी पंचायतों के लिए प्रक्रिया किस स्तर से संचालित हुई और चयन किस आधार पर हुआ—इन सभी बिंदुओं का रिकॉर्ड से परीक्षण जरूरी है।
जनपद की भूमिका पर शिकायत, आईपी एड्रेस और OTP की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने पूरी प्रक्रिया में जनपद पंचायत की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता के अनुसार 2023-24 में संबंधित फर्म को डेढ़ लाख रुपए का भुगतान हो चुका था। इसके बाद GeM से खरीद की प्रक्रिया अपनाते समय पहले किए गए भुगतान का क्या किया गया और बचे हुए डेढ़ लाख रुपए को 3 लाख रुपए की GeM बिड से किस आधार पर जोड़ा गया, यह स्पष्ट नहीं है। 19 पंचायतों की प्रक्रिया में एक ही फर्म के चयन को लेकर भी शिकायतकर्ता ने जांच की मांग की है। इसके साथ ही GeM का आईपी एड्रेस, लॉगिन डिटेल, बिड लगाने वाले की जानकारी और OTP किस मोबाइल से लिया गया, इसकी जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की गई है।
लीपापोती की आशंका, एफआईआर की मांग तक पहुंचा मामला
मामले में शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि पहले हुई खरीद प्रक्रिया पर कलेक्टर की आपत्ति के बाद नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया नए सिरे से करने के बजाय पहले से सप्लाई किए गए टैंकरों और पहले किए गए भुगतान को बाद की GeM प्रक्रिया से जोड़कर मामले को संभालने की कोशिश की गई। यदि दस्तावेजों में यह साबित होता है कि एक ही टैंकर के लिए पहले ऑफलाइन भुगतान किया गया और बाद में उसी टैंकर को GeM खरीद में दर्शाकर उसी फर्म को भुगतान किया गया, तो यह केवल तकनीकी अनियमितता नहीं बल्कि वित्तीय और खरीद प्रक्रिया की गंभीर जांच का विषय होगा। इसी आधार पर मामले की विस्तृत जांच और दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
सीएम पोर्टल पर शिकायत, जांच की बात
जनपद पंचायत छुईखदान की CEO केश्वरी देवांगन ने कहा कि “सीएम पोर्टल पर शिकायत आई है, शिकायत की जांच कराई जाएगी।” वहीं जिला पंचायत CEO प्रेम कुमार पटेल ने कहा कि “जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा।”



