71 पशु मित्रों के भुगतान में जमीन-आसमान का अंतर, किसी को 3.21 लाख, किसी को सिर्फ 5 हजार

पशुपालन बढ़ाने पर सरकार का जोर, नागलदाह में टीकाकरण के नाम पर भुगतान ने खड़े किए सवाल

करीब 71 पशु मित्रों में भुगतान का बड़ा अंतर, 12 पशु मित्रों को ही 26.05 लाख से अधिक; नागलदाह के पोखन लाल को 2.61 लाख का भुगतान

पशुधन बढ़ाने की मंशा, जमीन पर व्यवस्था कमजोर

राजनांदगांव. शासन पशुपालन को बढ़ावा देने, पशुधन की सेहत सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार योजनाओं पर राशि खर्च कर रहा है। पशुओं को बीमारी से बचाने टीकाकरण, नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान और पशुधन प्रबंधन से जुड़े कार्यों के लिए पशु मित्रों के माध्यम से सेवाएं ली जा रही हैं। लेकिन राजनांदगांव जिले में जमीनी स्तर पर इन कार्यों की निगरानी और वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 71 पशु मित्रों को भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ पशु मित्रों का भुगतान महज कुछ हजार रुपए है, जबकि कुछ को एक से तीन लाख रुपए से अधिक राशि दी गई है। उपलब्ध रिकॉर्ड में 12 पशु मित्रों को ही कुल 26 लाख 5 हजार 251 रुपए का भुगतान दर्ज है। इसी सूची में नागलदाह के पशु मित्र पोखन लाल साहू को 2 लाख 61 हजार 924 रुपए का भुगतान सामने आया है।

12 पशु मित्रों को 26 लाख से अधिक का भुगतान

पशु सेवक संबंधी उपलब्ध रिकॉर्ड में दुर्गेश कुमार साहू, मुडपार को 3,21,068 रुपए, हरिश्चंद्र साहू, खुर्शीटीकुल को 3,16,340 रुपए, गोंदलाल साहू, चिरचारीखुर्द को 3,10,665 रुपए, रेखराम पटेल, नाडिया को 2,67,690 रुपए और पोखन लाल साहू, नागलदाह को 2,61,924 रुपए का भुगतान दर्ज है। इसके अलावा दानेश्वर प्रसाद साहू, घोरदा को 2,48,610 रुपए, ओमप्रकाश चंद्रवंशी, केशाल को 1,73,343 रुपए, निकलेश कुमार निषाद, माटीसरई को 1,62,823 रुपए, जयचंद साहू, अछोली को 1,56,875 रुपए, व्यासनारायण साहू, रेंगाकठेरा को 1,56,123 रुपए, विक्रम दास साहू, ठाकुरबांधा को 1,25,270 रुपए और लोमस दास साहू, सिवनीकला को 1,04,520 रुपए का भुगतान हुआ है। इन 12 नामों में ही कुल 26.05 लाख रुपए से अधिक का भुगतान है। वहीं करीब 71 पशु मित्रों में कई ऐसे भी बताए जा रहे हैं, जिनका भुगतान 1,300, 4,000, 5,000 या 7,000 रुपए तक सीमित रहा है। भुगतान में यह बड़ा अंतर संबंधित कार्यों की मात्रा और रिकॉर्ड के सत्यापन को महत्वपूर्ण बना रहा है।

नागलदाह में 2.61 लाख का भुगतान, ग्रामीणों को टीकाकरण करने वाला कौन इसकी जानकारी नहीं

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पोखन लाल साहू पिता कृष्णा कुमार साहू को नागलदाह के पशु मित्र के रूप में दर्शाते हुए कुल 2,61,924 रुपए का भुगतान दर्ज है। ग्रामीणों का कहना है कि पोखन लाल साहू नाम के व्यक्ति को वे गांव के निवासी के रूप में नहीं जानते। ग्रामीणों के अनुसार टीकाकरण करने कौन आता है, इसकी भी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं है। तीजु यादव ने बताया कि उनकी बकरियों का टीकाकरण नहीं हुआ है। उनका कहना है कि कभी-कभी पशुओं के टीकाकरण की जानकारी मिलती है, लेकिन डॉक्टर या कर्मचारी कौन है, इसकी जानकारी नहीं है। पोखन लाल साहू को भी उन्होंने गांव में नियमित रूप से आते नहीं देखा। चरवाहा गभरू यादव ने भी इस वर्ष टीकाकरण नहीं होने की बात कही है। हालांकि ग्रामीणों की जानकारी के अनुसार टीकाकरण पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन गतिविधि नाममात्र की होने और कौन टीकाकरण करता है इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आई है।

बधियाकरण और टीकाकरण के नाम पर भुगतान, जमीनी सत्यापन जरूरी

दस्तावेजों में पोखन लाल साहू को निजी कृत्रिम गर्भाधान के नाम पर 43,550 रुपए, 83,100 रुपए और 71,400 रुपए, टीकाकरण के लिए 12,384 रुपए, 12,380 रुपए और 32,650 रुपए तथा बधियाकरण के नाम पर 6,460 रुपए का भुगतान दर्ज है। ग्रामीणों के अनुसार नागलदाह में बधियाकरण के लिए आमतौर पर ठेलकाडीह से डॉक्टर को बुलाना पड़ता है और वर्तमान में ऐसी गतिविधि लगभग नगण्य है। इसी तरह बकरियों के टीकाकरण को लेकर भी ग्रामीणों ने कमी की जानकारी दी है। सामान्य तौर पर साल में कम से कम दो बार टीकाकरण होने की जानकारी ग्रामीणों को है, जबकि नागलदाह में इस वर्ष केवल बार भी टीकाकरण नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में भुगतान के मुकाबले वास्तविक काम का मिलान जरूरी है।

कागजों में एंट्री और जमीन पर काम का मिलान हो तो साफ होगी स्थिति

पशुधन विकास योजनाओं में टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और बधियाकरण जैसी गतिविधियां सीधे पशुपालकों और उनके पशुओं से जुड़ी हैं। इसलिए इन कार्यों के लिए हुए भुगतान का सत्यापन केवल कागजों तक सीमित न रहकर मौके पर भी होना चाहिए। किस पशुपालक के कितने पशुओं का टीकाकरण हुआ, किस तारीख को हुआ, किस क्षेत्र में पशु मित्र ने काम किया और कितने कृत्रिम गर्भाधान व बधियाकरण किए गए, इसका रिकॉर्ड मिलान किया जाना चाहिए। 

पंकज सेन ने भी पूरे मामले में एक-एक एंट्री और भुगतान का सत्यापन कर जांच कराने की मांग की है। इससे स्पष्ट होगा कि अधिक भुगतान पाने वाले पशु मित्रों ने उसके अनुरूप कितना वास्तविक काम किया।

डॉ. एस. रावटे बोले- पोखन साहू टीकाकरण का काम करते हैं

मामले में पशु चिकित्सा विभाग घुमका के डॉ. एस. रावटे ने बताया कि पोखन साहू टीकाकरण का काम करते हैं और वे दुर्ग जिले के आसपास के गांवों के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी रिकॉर्ड देखने के बाद ही स्पष्ट रूप से बताई जा सकेगी। ऐसे में विभागीय रिकॉर्ड और ग्रामीणों की जानकारी के बीच वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। सरकार का उद्देश्य पशुधन को स्वस्थ रखना और पशुपालकों की आय बढ़ाना है। इसके लिए खर्च होने वाली राशि का लाभ भी जमीन पर दिखाई देना जरूरी है। नागलदाह का मामला इसी बात की ओर इशारा करता है कि भुगतान से लेकर टीकाकरण तक प्रत्येक एंट्री का वास्तविक पशुपालकों और पशुओं से मिलान होना चाहिए, ताकि सरकारी योजना कागजी कार्रवाई तक सीमित न रह जाए।