नगर पंचायत गंडई की दुकानों पर यशोदा वर्मा का तीखा सवाल, हाईकोर्ट आदेश के पालन पर सरकार ने दिया पूरा हिसाब
खैरागढ़. विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस विधायक यशोदा निलाम्बर वर्मा ने नगर पंचायत गंडई में वर्ष 2011 से पूर्व आबंटित दुकानों के मामले को सदन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा 8 मार्च 2011 को पारित आदेश के बाद कितनी दुकानों का आबंटन निरस्त किया गया, नगर पंचायत ने कितनी दुकानों पर कब्जा लिया और क्या न्यायालय के आदेशों का पूर्ण रूप से पालन हुआ या नहीं। विधायक ने यह भी जानना चाहा कि यदि कहीं आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो उससे हुए राजस्व नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है और उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री (लोक निर्माण) अरूण साव ने जवाब में बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश (रिट पिटीशन क्रमांक 2678/2006 एवं 3197/2007) के अनुपालन में वर्ष 2011 से पूर्व आबंटित कुल 26 दुकानों का आबंटन निरस्त किया गया। इनमें से 24 दुकानों पर नगर पंचायत गंडई द्वारा कब्जा प्राप्त कर लिया गया है। शेष दो दुकानों के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि वार्ड क्रमांक 08 में स्थित दुकान क्रमांक 4, जिस पर फिरतु राम गोंड का कब्जा था, तथा दुकान क्रमांक 7, जिस पर विश्वराज ताम्रकार काबिज थे, दोनों दुकानों को 25 अगस्त 2025 को खाली कराकर नगर पंचायत के कब्जे में ले लिया गया है।
सरकार ने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि इन दोनों दुकानदारों से दुकान में काबिज रहने की अवधि तक प्रति माह 337 रुपये मासिक किराया नियमित रूप से वसूला गया, जिससे किसी भी प्रकार की राजस्व क्षति नहीं हुई। वर्तमान में दोनों दुकानों के संबंध में नीलामी उपरांत स्वीकृति की प्रक्रिया प्रचलित है। राजस्व क्षति के मुद्दे पर सरकार ने दो टूक कहा कि सभी मामलों में न्यायालय के आदेशों का पालन किया गया है और नगर पंचायत के राजस्व हित पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं।
यशोदा वर्मा के दूसरे सवाल के जवाब में उप मुख्यमंत्री ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिन दुकानों को खाली कराया गया, उनका नवीन आबंटन नियमानुसार किया गया है। किस-किस व्यक्ति को दुकान आबंटित की गई, इसकी पूरी सूची भी प्रपत्र में संलग्न है। सरकार के अनुसार, आबंटन की प्रक्रिया पूरी तरह न्यायालयीन आदेश और शासकीय नियमों के अनुरूप की गई है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।



