चीन की यूनिवर्सिटियों ने छीना हार्वर्ड से नंबर-1 का ताज

चीन की यूनिवर्सिटियों ने छीना हार्वर्ड से नंबर-1 का ताज

CWTS लीडेन रैंकिंग 2025 (साइंस कैटेगरी) में बड़ा उलटफेर

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा जगत में एक बड़ा बदलाव सामने आया है।

दिल्ली. CWTS लीडेन रैंकिंग 2025 (साइंस कैटेगरी) में दशकों से शीर्ष पर काबिज Harvard University को पीछे छोड़ते हुए चीन की दो यूनिवर्सिटियों ने दुनिया की सबसे टॉप साइंस यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल कर लिया है।

नंबर-1 और नंबर-2 पर चीन का दबदबा

ताजा रैंकिंग के मुताबिक— पहला स्थान: Zhejiang University, दूसरा स्थान: Shanghai Jiao Tong University, तीसरा स्थान: Harvard University यह पहली बार है जब साइंस कैटेगरी में हार्वर्ड को शीर्ष दो स्थानों से बाहर होना पड़ा है।

क्यों खास है CWTS लीडेन रैंकिंग?

CWTS लीडेन रैंकिंग को रिसर्च और साइंटिफिक आउटपुट के लिहाज से सबसे भरोसेमंद वैश्विक रैंकिंग्स में गिना जाता है। इस रैंकिंग में— उच्च गुणवत्ता वाले शोध (High Impact Publications) इंटरनेशनल कोलैबोरेशन, साइंस और टेक्नोलॉजी में योगदान, शोध पत्रों के वैश्विक प्रभाव (Citations) जैसे पैमानों को आधार बनाया जाता है।

चीन की बढ़ती वैज्ञानिक ताकत

झेजियांग और शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी का शीर्ष पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि— चीन अब सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोध, इनोवेशन और उच्च शिक्षा में भी वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ चुका है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन द्वारा रिसर्च फंडिंग में भारी निवेश, अत्याधुनिक लैब्स और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की भागीदारी ने यह मुकाम दिलाया है।

हार्वर्ड के लिए झटका, लेकिन चेतावनी भी

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का तीसरे स्थान पर खिसकना भले ही झटका माना जा रहा हो, लेकिन यह वैश्विक शिक्षा जगत के लिए एक साफ संदेश है— अब एशिया, खासकर चीन, रिसर्च और साइंस में पश्चिमी देशों को सीधी चुनौती दे रहा है।