विधानसभा में खुली पोल—केसीजी में अवैध खनन पर विभाग का ‘जीरो’ दावा, जमीन पर हकीकत कुछ और
रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा
रेत-मुरूम के धंधे पर उठे सवाल, आंकड़ों और वास्तविकता में भारी अंतर; कांग्रेस ने सरकार को घेरा
खैरागढ़. छत्तीसगढ़ विधानसभा में खनिज विभाग से जुड़े एक सवाल ने केसीजी (खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) जिले में अवैध खनन के मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने जो आंकड़े प्रस्तुत किए, वे अब जमीन की हकीकत से मेल नहीं खाते दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर विपक्ष ने सरकार और खनिज विभाग दोनों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विधानसभा में क्या मिला जवाब
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि केसीजी जिले में रेत के अवैध उत्खनन के शून्य प्रकरण दर्ज किए गए हैं। यानी विभाग के अनुसार जिले में रेत का अवैध उत्खनन हुआ ही नहीं। वहीं अवैध परिवहन के 10 प्रकरण दर्ज कर 10 वाहन जब्त किए गए और 27,550 रुपए की वसूली की गई।
मुरूम के मामले में केवल 2 अवैध उत्खनन प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें 2 वाहन जब्त कर 73,000 रुपए वसूले गए। इसके अलावा अवैध परिवहन का केवल 1 मामला सामने आया, जिसमें 27,000 रुपए की वसूली की गई।
जमीनी हकीकत पर उठे सवाल
विधानसभा में प्रस्तुत इन आंकड़ों के बाद अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वास्तव में जिले में अवैध खनन इतनी कम मात्रा में हो रहा है? स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी और ग्रामीणों के आरोप इसके ठीक उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं।
पांडुका, बिजलदेही, घोठिया, दपका, बलदेवपुर, दामरी, साल्हेवारा, बुंदेली और सोनभट्टा, डोकराभाठ जैसे कई क्षेत्रों में मुरूम और चंदेनी, जोरातराई, बफरा, अछोली में रेत का अवैध खनन लंबे समय से जारी होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि खुलेआम खनन और परिवहन के बावजूद कार्रवाई नगण्य है।
‘सेटिंग’ के आरोप और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में पीली गाड़ी वालों के साथ कथित सेटिंग के कारण कार्रवाई नहीं हो रही। आरोप यह भी है कि अवैध वसूली का खेल चल रहा है, लेकिन कागजों में सब कुछ सामान्य दिखाया जा रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि अधिकारी फील्ड में जाने के बजाय दफ्तरों में बैठकर काम कर रहे हैं, जिससे अवैध खनन को खुली छूट मिल गई है। यही वजह है कि विधानसभा में दिए गए आंकड़े वास्तविक स्थिति को छुपाने वाले प्रतीत हो रहे हैं।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि यदि जिले में वास्तव में अवैध खनन नहीं हो रहा, तो फिर लगातार सामने आ रही शिकायतों का क्या आधार है? और यदि खनन हो रहा है, तो विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
जांच और सख्ती की मांग
अब इस मुद्दे पर जिले में व्यापक जांच की मांग उठने लगी है। स्थानीय जनप्रतिनिधि और नागरिक चाहते हैं कि खनिज विभाग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।



