केसीजी में पशु विभाग स्टाफ विहीन: उपसंचालक कार्यालय में 11 पद, काम सिर्फ दो कर्मचारियों के भरोसे
00 कार्यालय से लेकर औषधालय तक कर्मचारियों का टोटा, एक कर्मचारी पर कई गांवों की जिम्मेदारी
00 उपसंचालक कार्यालय ही स्टाफ संकट का शिकार
00 21 औषधालय, लेकिन सिर्फ 6 में एवीएफओ; कई केंद्रों पर ताले, गंडई चिकित्सालय भी स्टाफ विहीन
खैरागढ़. खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की पशु चिकित्सा व्यवस्था की कमान संभालने वाला उपसंचालक कार्यालय ही कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार कार्यालय में 11 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ दो कर्मचारी ही कार्यरत हैं। वहीं खैरागढ़ पशु चिकित्सालय के चिकित्सक पिछले लगभग चार माह से अवकाश पर हैं, जबकि जालबांधा पशु चिकित्सालय के चिकित्सक अध्ययन अवकाश पर हैं। दोनों स्थानों की व्यवस्था भी प्रभार के भरोसे संचालित हो रही है। ऐसे में पूरे जिले की प्रशासनिक, तकनीकी, योजनागत और फील्ड गतिविधियों का संचालन सीमित स्टाफ के सहारे किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार और मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
औषधालयों में स्टाफ का अकाल, पशुपालक निजी इलाज को मजबूर
जिले की स्थिति यह है कि कई पशु औषधालय और चिकित्सालय पर्याप्त स्टाफ के अभाव में प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को समय पर उपचार नहीं मिलने से निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में 5 पशु चिकित्सालय और 21 पशु औषधालय हैं, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर आवश्यक कर्मचारियों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की पशु चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है।
21 में सिर्फ 6 औषधालयों में एवीएफओ, स्वच्छकर्ता एक भी नहीं
विभागीय जानकारी के अनुसार प्रत्येक पशु औषधालय में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (एवीएफओ), परिचालक तथा स्वच्छकर्ता सह चौकीदार के पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद जिले के 21 औषधालयों में केवल 6 स्थानों पर ही एवीएफओ पदस्थ हैं। 15 औषधालयों में सिर्फ परिचालक कार्यरत हैं, जबकि स्वच्छकर्ता सह चौकीदार का एक भी पद भरा नहीं गया है। कर्मचारियों की कमी के कारण कई केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रहे हैं।
खैरागढ़ और छुईखदान ब्लॉक में अधिकांश औषधालय बिना डॉक्टर के
खैरागढ़ ब्लॉक के उरईडबरी और मुढ़ीपार को छोड़ अधिकांश औषधालयों—पाड़ादाह, ईटार, गातापारजंगल, सिंगारघाट, देवरी, घोटिया, दैहान, सिंगारपुर, गातापारकला, डोकराभाठा, बिजलदेही और अतरिया बाजार—में एवीएफओ उपलब्ध नहीं हैं। वहीं छुईखदान ब्लॉक के 7 औषधालय में कुकुरमुड़ा, साल्हेकला, बागुर में एवीएफओ है वही बुंदेली, पेंडरवानी, ठाकुरटोला बकरकट्टा में एबीएफओ नहीं है। कई औषधालयों में केवल परिचालक के भरोसे काम चल रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर कोई कर्मचारी तक उपलब्ध नहीं है।
पशु चिकित्सालयों में भी रिक्त पड़े हैं महत्वपूर्ण पद
स्थिति केवल औषधालयों तक सीमित नहीं है। खैरागढ़, जालबांधा, छुईखदान, साल्हेवारा और गंडई पशु चिकित्सालय भी कर्मचारियों की कमी से प्रभावित हैं। खैरागढ़ में पट्टीबंधक तथा स्वच्छकर्ता के पद रिक्त हैं। जालबांधा और साल्हेवारा में सीमित स्टाफ के भरोसे व्यवस्था चल रही है, जबकि छुईखदान में भी कई सहायक पद खाली हैं। सबसे गंभीर स्थिति गंडई पशु चिकित्सालय की बताई जा रही है, जहां अधिकारी-कर्मचारियों का अभाव होने से सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
पशुपालकों की मांग—रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती हो
ग्रामीणों और पशुपालकों का कहना है कि पशुधन उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि पशु चिकित्सालयों और औषधालयों में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें और पशुपालकों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सके।
"प्रदेशभर में बहुत से पद रिक्त हैं, इसलिए कई कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रभार देना पड़ रहा है। रिक्त पदों की भर्ती के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है और विभाग अपने स्तर पर लगातार प्रयास कर रहा है।"
के.के. ध्रुव, अपर संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं:



