बजट समय पर पेश नहीं, खर्च करोड़ों का — अब हमसे भ्रष्टाचार पर मुहर लगाने को कहा जा रहा-sudhir

बजट समय पर पेश नहीं, खर्च करोड़ों का — अब हमसे भ्रष्टाचार पर मुहर लगाने को कहा जा रहा-sudhir

जनपद सभापति सुधीर गोलछा के तीखे आरोप, आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

खैरागढ़. जनपद पंचायत छुईखदान के बजट विवाद ने अब गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। जनपद सदस्य एवं सभापति सुधीर गोलछा ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 का बजट निर्धारित समय पर सदन के सामने रखा ही नहीं गया, जबकि बिना स्वीकृत बजट के करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। उनका कहना है कि अब उसी खर्च को वैध ठहराने के लिए निर्वाचित सदस्यों से अनुमोदन कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जो सीधे-सीधे भ्रष्टाचार पर मुहर लगाने जैसा है।

समय पर बजट नहीं, पहले खर्च — अब अनुमोदन का दबाव

गोलछा के अनुसार बजट महीनों बाद प्रस्तुत किया गया, जब तक अधिकांश राशि खर्च हो चुकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले व्यय किया गया और बाद में काल्पनिक बजट बनाकर अनुमोदन के लिए लाया गया, जिसे नियमों के अनुसार स्वीकार करना संभव नहीं था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहां 25 हजार रुपये में फोटोकॉपी मशीन खरीदी जा सकती है, वहां लाखों रुपये के फोटोकॉपी बिल प्रस्तुत किए गए। उनका कहना है कि यदि ऐसे खर्चों को मंजूरी दी जाती है तो जनता निर्वाचित सदस्यों को ही दोषी मानेगी और कमीशन लेकर बिल पास करने का आरोप लगाएगी।

हमारे कार्यकाल का खर्च नहीं उसे भी अनुमोदन करने कहा जा रहा है

जनपद पंचायत छुईखदान के बजट विवाद में अब निर्वाचित सदस्यों ने समय और प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनका चुनाव 17 फरवरी 2025 को हुआ, जब वित्तीय वर्ष 2024-25 अपने अंतिम चरण में था, जबकि उसी वर्ष का बजट नवंबर 2025 में — यानी अगले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान — अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया। सदस्यों का तर्क है कि जिस अवधि का खर्च उनके कार्यकाल से पहले हुआ और जिसकी जानकारी तक उन्हें नहीं है, उसका अनुमोदन उनसे कराना नियमसम्मत नहीं है। उनका कहना है कि यदि वे ऐसे बजट को मंजूरी देते हैं तो बाद में खर्च की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर आ जाएगी, जबकि वास्तविक निर्णय और व्यय पूर्व अधिकारियों के समय में हुआ था।

दबाव, आंदोलन और आरटीआई— टकराव हुआ खुला

सभापति ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा सदस्यों पर पिछले दो वर्षों के खर्च को अनुमोदित करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी दबाव में नहीं आएंगे और आवश्यकता पड़ने पर जनपद कार्यालय का घेराव सहित बड़े आंदोलन की राह अपनाई जाएगी। जानकारी नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें सूचना के अधिकार के तहत 41 आवेदन लगाने पड़े, जिनमें से कई आवेदनों पर भारी शुल्क मांगने के बावजूद पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

एकतरफा जांच का आरोप, कानूनी नोटिस की तैयारी

जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए गोलछा ने कहा कि इसमें बजट समय पर प्रस्तुत न होने की मुख्य बात का उल्लेख ही नहीं किया गया और शिकायतकर्ता का पक्ष भी नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान के बिना एकतरफा प्रतिवेदन तैयार किया गया, जो न्यायसंगत नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एक उच्च पदस्थ अधिकारी की जांच निम्न स्तर के अधिकारियों से कराना भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। गोलछा ने संकेत दिया कि वे संबंधित अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं। इस पूरे प्रकरण से जनपद पंचायत छुईखदान में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव और गहराने की संभावना जताई जा रही है।