उद्यानिकी विभाग का कारनामा: मधुमक्खी पालन हुआ ही नहीं, फिर भी दे दिया योजना का लाभ

उद्यानिकी विभाग का कारनामा: मधुमक्खी पालन हुआ ही नहीं, फिर भी दे दिया योजना का लाभ

आरटीआई में 8 किसानों को लाभ देने का दावा, भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में कई हितग्राहियों के यहां मधुमक्खियां ही नहीं मिलीं

खैरागढ़. राज्य और केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए उद्यानिकी योजनाओं पर लाखों-करोड़ों रुपए का अनुदान पानी की तरह बहा रही है। लेकिन केसीजी (खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) जिले में उद्यानिकी विभाग की साठगांठ से यह अनुदान किसानों के बजाय कागजी हितग्राहियों और विभागीय खेल की भेंट चढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मधुमक्खी पालन योजना के तहत जिले के 8 किसानों को लाभान्वित करने का दावा किया गया है। आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर पड़ताल की, तो योजनाओं के क्रियान्वयन और अनुदान के नाम पर चल रहे बड़े खेल की कड़वी हकीकत उजागर हो गई।

बक्से तो बांटे पर मधुमक्खी नदारद, बिना पालन के ही डकार गए लाखों का अनुदान

ग्राउंड रिपोर्टिंग में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि जिन किसानों के नाम पर मधुमक्खी पालन की स्वीकृति दिखाई गई है, उनके खेतों या घरों में मधुमक्खी पालन हो ही नहीं रहा है। मैन्हर के जिवराखन ( अलाली), तिलक (पिता खुमान) सहित कई ग्रामीणों ने योजना का लाभ कागजों में तो ले लिया, लेकिन धरातल पर मधुमक्खी पालन का कोई काम नहीं किया गया। यही हाल गुमानपुर के ही सजेलाल (पिता कुंभलाल ) का है, जहां मधुमक्खी पालन का नामोनिशान तक नहीं है। कागजों पर करीब 1.20 लाख रुपए तक का अनुदान प्रत्येक हितग्राही को बांट दिया गया, लेकिन हकीकत में हितग्राहियों को सिर्फ लकड़ी के कुछ बक्से थमाकर पूरी योजना का इतिश्री कर दिया गया।

कुछ मशीन देने की बात कही गई थी लेकिन नहीं दिया गया- हितग्राही 

मैन्हर में जिवराखन वर्मा से बातचीत में सामने आया कि उन्हें विभाग की ओर से मधुमक्खी पालन के लिए बाक्स दिए गए हैं, लेकिन उनका उपयोग कैसे करना है, इसकी जानकारी तक नहीं है। जिवराखन ने बताया कि कुछ मशीन और अन्य सामग्री देने की बात कही गई थी, लेकिन वह पूरी सामग्री नहीं मिली। मैन्हर के ग्रामीणों ने बताया कि गांव की किसी भी हितग्राही चाहे जुरखन हो तिलक हो या देवराज हो या वेद प्रकाश हो किसी ने भी मधुमक्खी पालन होता हुआ नजर नहीं आया है जांच की जाएगी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

एक ही घर में बांटी रेवड़ी: पिता-पुत्र दोनों को बना दिया मधुमक्खी पालन का हितग्राही

अनुदान की राशि का बंदरबांट करने के लिए नियमों और पारदर्शिता को ताक पर रख दिया गया। मैन्हर गांव में तो हद ही हो गई, जहां एक ही परिवार के पिता और पुत्र दोनों को योजना का पात्र बनाकर शासकीय राशि का फायदा पहुंचाया गया। आरटीआई के दस्तावेजों के अनुसार देवराज (पिता कपिल) के साथ-साथ उनके बेटे वेदप्रकाश (पिता देवराज) को भी मधुमक्खी पालन योजना का पृथक हितग्राही दर्शाया गया है। जो सीधे तौर पर विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

विभाग खुद ही बना सप्लायर, किसानों के नाम पर थमाया अधूरा और बेकार सामान

जिला उद्यानिकी अधिकारी स्नेहलता सिन्हा का तर्क है कि किसानों ने स्वयं बाजार से सामान खरीदा है और उनके दिए बिल के आधार पर 50 प्रतिशत सब्सिडी ( लगभग 1.25 लाख रुपए) जारी की गई है। लेकिन ग्राउंड पर किसानों ने अधिकारी के इस दावे की पोल खोलकर रख दी। मैन्हर के जिवराखन वर्मा और गुमानपुर के सजेलाल ने साफ बताया कि उन्होंने बाजार से कोई खरीदारी नहीं की, बल्कि विभाग ने खुद ही उन्हें लकड़ी के बक्से और अधूरा सामान लाकर दिया। विभाग द्वारा खुद सामान सप्लाई कर कागजों में किसानों की खरीदारी दिखाना घोटाले की परतें खोलने के लिए काफी है।

सीधी बात ( स्नेहलता सिन्हा, जिला उद्यानिकी अधिकारी केसीजी) 

प्रश्न : किसानों के यहां मधुमक्खी पालन हुआ नहीं, फिर योजना का भुगतान कैसे हुआ?

जवाब : किसानों ने योजना के लिए फॉर्म भरा था और किसानों द्वारा सामग्री खरीदी गई थी। उसी के आधार पर अनुदान दिया गया है।

सवाल: क्या लाभ देने से पहले विभाग ने हितग्राहियों का निरीक्षण किया था?

जवाब : फील्ड निरीक्षण विभाग के फील्ड अधिकारियों द्वारा किया जाता है। निरीक्षण के बाद ही भुगतान और अनुदान का लाभ दिया गया है।

प्रश्न : किसानों का कहना है कि सामान विभाग की ओर से दिया गया है?

जवाब: किसानों ने स्वयं सामान खरीदा है। विभाग की ओर से कोई सामान सप्लाई नहीं किया गया।