फर्जी या अनुमोदन देने से इंकार? जनपद पंचायत छुईखदान के बजट विवाद की जांच रिपोर्ट ने खोले कई राज
खैरागढ़. जनपद पंचायत छुईखदान के वर्ष 2024-25 और 2025-26 के कथित “फर्जी और बोगस बजट” विवाद पर आई आधिकारिक जांच रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। सभापति द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद जिला पंचायत के निर्देश पर की गई जांच में यह तो स्पष्ट हुआ कि बजट बिना अनुमोदन के विहित प्राधिकारी (उपसंचालक-पंचायत, जिला केसीजी) को भेजा गया था, लेकिन इसे सीधे सीधे “फर्जी” साबित करने के बजाय प्रक्रियागत गंभीर अनियमितता बताया गया है।

जिला पंचायत के लेखाधिकारी कल्पना हेडाउ और जनपद पंचायत खैरागढ़ के विकास विस्तार अधिकारी अरुण कुमार सिंह द्वारा की गई जांच में बैठकों के रजिस्टर, दस्तावेज और संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि बजट प्रस्ताव कई बार सामान्य प्रशासन समिति और सामान्य सभा के समक्ष अनुमोदन हेतु रखा गया, परंतु हर बार अनुमोदन देने से इंकार या टाल दिया गया।

बार-बार रखा गया बजट, हर बार टलता रहा अनुमोदन
जांच में पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट 13 जून 2024 की सामान्य सभा बैठक में प्रस्तुत किया गया, लेकिन पारित नहीं हुआ। इसके बाद 23 अगस्त 2024 को फिर से प्रस्तुत किया गया, तब भी मंजूरी नहीं मिली।

इसी तरह वर्ष 2025-26 का बजट 17 जुलाई 2025 की बैठक में रखा गया, पर सामान्य सभा ने इसे भी मंजूरी देने से इंकार कर दिया। इसके बावजूद दोनों वर्षों के बजट अध्यक्ष/उपाध्यक्ष की सहमति एवं हस्ताक्षर उपरांत स्वीकृति हेतु उच्च कार्यालय को भेज दिए गए, जो नियमों के विपरीत है।

उपसंचालक (पंचायत) ने भी बिना अनुमोदन भेजे गए बजट को वापस कर दिया और स्पष्ट निर्देश दिया कि विधिवत प्रस्ताव क्रमांक और बैठक दिनांक के साथ ही बजट भेजा जाए।
समिति ने भी नहीं दी मंजूरी, बगैर समीक्षा “काल्पनिक आंकड़े” बताए
उच्च कार्यालय के निर्देश के परिपालन में 14 नवंबर 2025 की सामान्य प्रशासन समिति बैठक में पुनः दोनों वर्षों के बजट सामान्य प्रशासन समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए। चर्चा उपरांत समिति ने कहा कि वर्ष 2024-25 में बिना अनुमोदन के खर्च किया गया और वर्ष 2025-26 के बजट में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ तथा आंकड़े काल्पनिक प्रतीत होते हैं। इसी आधार पर अनुमोदन से इंकार कर दिया गया और उच्च अधिकारियों को सूचित करने का निर्णय लिया गया।

13 जनवरी 2026 की बैठक में भी मामला टाल दिया गया और कहा गया कि पहले पुराने बजट को विधिवत पारित किया जाए, उसके बाद ही नए बजट पर विचार होगा।
कानून क्या कहता है
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 और जनपद पंचायत (बजट अनुमान) नियम, 1997 के अनुसार हर पंचायत को निर्धारित समय पर बजट तैयार करना अनिवार्य है।सामान्य प्रशासन समिति/सामान्य सभा द्वारा अनुमोदन आवश्यक है। 30 जनवरी तक बजट पारित कर 10 फरवरी तक उच्च कार्यालय को भेजना होता है। सामान्यतः बजट का अनुमोदन उसी वित्तीय वर्ष में होना आवश्यक है। बिना अनुमोदन खर्च करना अनियमित माना जाता है
जांच में यह भी कहा गया कि बिना मंजूरी के बजट भेजना “प्रक्रियात्मक त्रुटि” है, क्योंकि वित्तीय शक्तियों का उपयोग नियमों के अनुसार नहीं किया गया है, जिसके लिए तत्कालीन अधिकारी/कर्मचारी जिम्मेदार हो सकते हैं।

जांच समिति ने यह भी पाया कि जनपद पंचायत छुईखदान द्वारा वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के अनुमानित बजट को अनुमोदन हेतु कई बार सामान्य प्रशासन समिति/सामान्य सभा के समक्ष रखा था, किंतु समिति द्वारा इसकी समीक्षा करने या संशोधन सुझाने के बजाय अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर इसे अनुमोदन देने से इंकार कर दिया या टाला जा रहा है।
खर्च को वैध बनाने के लिए “कार्योत्तर अनुमोदन” जरूरी
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि पिछले दो वर्षों में हुए खर्च को नियमित करने के लिए सामान्य सभा से कार्योत्तर अनुमोदन (Post-Facto Approval) लेना होगा। इसके लिए पूरी आय-व्यय जानकारी और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर प्रस्ताव रखा जाना चाहिए।
कलेक्टर को मिली है हस्तक्षेप की शक्ति
रिपोर्ट में धारा 86 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यदि पंचायत अपने कर्तव्य का पालन नहीं करती या जानबूझकर बजट अनुमोदन करने को टालती है तो जिलाधीश (विहित प्राधिकारी) इसमें सीधे हस्तक्षेप कर इसे पूर्ण करने निर्देश दे सकते है तथा चूक होने पर स्वयं ही उसे पूर्ण करा सकते हैं।
आदेश मिलते ही निष्पक्ष जांच की, रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी — जांच अधिकारी कल्पना हेड़ाऊ
जांच अधिकारी एवं जिला पंचायत की लेखाधिकारी कल्पना हेड़ाऊ ने बताया कि उन्हें प्राप्त आदेश के अनुसार पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की गई। संबंधित दस्तावेजों, बैठक रजिस्टर और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद जांच प्रतिवेदन तैयार कर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा उपसंचालक (पंचायत) को भेज दिया गया है।



