शनिवार को होगा किसानों का महापंचायत, खनन परियोजना के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान

शनिवार को होगा किसानों का महापंचायत, खनन परियोजना के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान

महापंचायत का ब्लड डोनेशन कैंप भी 

संडी क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन एवं सीमेंट फैक्ट्री के विरोध में किसान निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दनिया, अतरिया, उदयपुर, हनईबन सहित 45 से अधिक गांवों के किसान, महिलाएं और ग्रामीण परिवार अपनी जमीन, पानी, जंगल और भविष्य को बचाने के लिए एकजुट हो गए हैं। ग्रामीण का कहना है कि संडी, हनईबन, सीताडबरी समेत अन्य लाइमस्टोन ब्लॉकों का खनन किसी भी तरह का विकास नहीं, बल्कि उपजाऊ त्रिफसली कृषि भूमि, जलस्रोतों और पर्यावरण के स्थायी विनाश की साजिश है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

आंदोलन की अगुवाई कर रहे पूर्व विधायक गिरवर जंघेल ने स्पष्ट कहा कि यह परियोजना ग्रामीणों की आजीविका, स्वास्थ्य और मानव अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने जनसुनवाई के स्थगन को जनता की एकजुट ताकत की जीत बताया और कहा कि 15 हजार से अधिक किसानों व ग्रामीणों के दबाव में शासन-प्रशासन को पीछे हटना पड़ा है। वहीं जनपद सभापति सुधीर गोलछा ने दो टूक कहा कि केवल स्थगन नहीं, बल्कि परियोजना का स्थायी निरस्तीकरण ही स्वीकार होगा। ग्रामीण नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जबरन खनन थोपने की कोशिश हुई तो आंदोलन और अधिक उग्र व व्यापक होगा।

इसी कड़ी में शनिवार 20 तारीख को पंडरिया–बिचारपुर भाठा में किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति तय होगी। किसानों ने साफ किया है कि परियोजना रद्द नहीं होने की स्थिति में वे सड़क से लेकर न्यायालय तक हर लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्ते से संघर्ष करेंगे। महापंचायत के अवसर पर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक सिकलिन, थैलेसीमिया रोगियों के लिए रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया जाएगा। किसानों का ऐलान है—अपनी डीह-डोंगरी और जमीन बचाने की यह लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी।

खनन परियोजना के खिलाफ महिला कृषक ने कहा अंतिम मांग निरस्तीकरण 

प्रस्तावित चूना पत्थर खनन एवं सीमेंट फैक्ट्री के विरोध में क्षेत्र की महिला कृषक लुकेश्वरी जंघेल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह परियोजना विकास नहीं बल्कि ग्रामीण जीवन, खेती और पर्यावरण के अस्तित्व पर सीधा हमला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना से हजारों एकड़ त्रिफसली उपजाऊ कृषि भूमि नष्ट होगी, जलस्रोत सूख जाएंगे और प्रदूषण के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा होगा, जिससे लाखों ग्रामीणों की आजीविका छिन जाएगी। रोजगार के दावों को भ्रामक बताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ अस्थायी नौकरियों के बदले खेती, पशुपालन और वनोपज आधारित स्थायी जीवन-व्यवस्था को खत्म करना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। जनसुनवाई के स्थगन को उन्होंने किसानों की एकजुट ताकत की जीत बताते हुए साफ कहा कि स्थगन नहीं, बल्कि पूरी परियोजना का स्थायी निरस्तीकरण ही आंदोलन की अंतिम मांग है, और जब तक यह हासिल नहीं होता, तब तक महिलाओं और किसानों का संघर्ष जारी रहेगा