शीतकालीन सत्र में यशोदा वर्मा के सीधे सवाल, सोलर प्लांट और मिट्टी परीक्षण पर सरकार से मांगा पूरा हिसाब

शीतकालीन सत्र में यशोदा वर्मा के सीधे सवाल, सोलर प्लांट और मिट्टी परीक्षण पर सरकार से मांगा पूरा हिसाब

खैरागढ़. विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस विधायक यशोदा निलाम्बर वर्मा ने अपने क्षेत्र में प्रस्तावित सोलर पावर प्लांटों और प्रदेश में मिट्टी की गुणवत्ता को लेकर सरकार से तीखे और तथ्यात्मक सवाल किए। उन्होंने सदन में स्पष्ट रूप से पूछा कि सोलर परियोजनाओं के लिए आवेदन किस कंपनी ने, कब और किन अधिकारियों से अनुमति लेकर किए, ग्राम पंचायत और ग्रामसभा की भूमिका क्या रही, कितनी कृषि भूमि उपयोग में लाई जा रही है और पर्यावरणीय नियमों का पालन हुआ या नहीं। विधायक ने कहा कि सोलर ऊर्जा जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर कृषि भूमि और किसानों के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने टेकापार खुर्द (पंचायत कालकसा) में प्रस्तावित सोलर प्लांट पर जवाब देते हुए बताया कि यह परियोजना मेसर्स जैनम फेरो एलॉयज़ (आई) लिमिटेड द्वारा लाई गई है। कंपनी ने 25 सितंबर 2024 और 10 दिसंबर 2024 को 1818 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्लांट के लिए आवेदन किया था, जिस पर सक्षम अनुमोदन के बाद अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता द्वारा अनुमति दी गई। ग्राम पंचायत कालकसा ने 14 दिसंबर 2024 को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया। सरकार के अनुसार यह प्लांट लगभग 50 एकड़ कृषि भूमि पर स्थापित किया जा रहा है और इसके लिए एक भी पेड़ नहीं काटा गया, न ही व्यावसायिक भू-परिवर्तन का आवेदन किया गया है। यह परियोजना राज्य की सौर ऊर्जा नीति 2017–30 (संशोधित 2025) के तहत संचालित है।

इसी तरह राजनांदगांव जिले के ग्राम पटेवा में एसआरवी सोलर प्लांट को लेकर यशोदा वर्मा ने दस्तावेजों और अनुमति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना मेसर्स आरती स्पंज एवं पॉवर लिमिटेड द्वारा एसआरवी सोलर कंपनी के माध्यम से स्थापित की जा रही है। इसके लिए 11 दिसंबर 2024 को आवेदन किया गया था, जिस पर कार्यपालन अभियंता, क्रेडा ने अनुमति दी। ग्राम पंचायत और ग्रामसभा से एनओसी प्राप्त है और सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न थे। यह सोलर प्लांट लगभग 51 हेक्टेयर कृषि भूमि पर स्थापित हो रहा है, जिसमें से 23.284 हेक्टेयर भूमि के लिए भू-परिवर्तन का आवेदन किया गया है, हालांकि अभी आदेश पारित नहीं हुआ है। सरकार ने स्पष्ट किया कि सोलर प्लांट श्वेत श्रेणी में आते हैं, इसलिए पर्यावरणीय अनुमति से छूट है, केवल संबंधित विभाग को सूचना देना अनिवार्य है।

मिट्टी की गुणवत्ता को लेकर पूछे गए सवालों पर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि सरकार मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खाद और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के प्रयास कर रही है। प्रदेश के 28 जिलों में 31 मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, जबकि शेष 5 जिलों का परीक्षण समीपस्थ जिलों में कराया जा रहा है। किसानों को किसान मेले, प्रशिक्षण और संगोष्ठियों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।