किसानों के साथ अन्याय का आरोप: धान खरीदी, बिजली बिल और मनरेगा को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन

किसानों के साथ अन्याय का आरोप: धान खरीदी, बिजली बिल और मनरेगा को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन

खैरागढ़. धान खरीदी, जबरन रकबा समर्पण, टोकन न मिलने और समितियों में कथित पक्षपात के खिलाफ किसानों की आवाज अब राजभवन तक पहुंच गई है। डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता स्वामी बघेल और कांग्रेस नेता नवाज खान ने किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर मुढ़ीपार में प्रदर्शन करते हुए महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन नायब तहसीलदार भूपेंद्र नेताम के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहे जाने के बावजूद किसानों को 21 क्विंटल धान बेचने से रोका जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी सरकार के घोषणा पत्र में 21 क्विंटल धान खरीदी का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर जबरन रकबा समर्पण कराकर इस वादे को प्रभावित किया जा रहा है। आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी किसानों के घर-घर जाकर दबाव बना रहे हैं, जिससे किसान अपना पूरा धान नहीं बेच पा रहे हैं।

धान खरीदी में गड़बड़ी और अवैध वसूली के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि तौल में अनियमितता, बोरा भराई और बोस पलटाई के नाम पर समितियों द्वारा किसानों से अवैध राशि वसूली जा रही है। साथ ही जिन किसानों को अब तक टोकन नहीं मिले हैं, वे धान बेचने से पूरी तरह वंचित हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भारी आक्रोश है।

बिजली बिल को लेकर भी सरकार पर सीधा हमला बोला गया है। ज्ञापन में उल्लेख है कि पूर्ववर्ती सरकार के समय लागू ‘हाफ बिजली बिल योजना’ को बंद कर दिया गया है, जिससे किसानों और आम उपभोक्ताओं पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। विधायक ने मांग की है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में लागू योजना को पुनः बहाल किया जाए और बढ़े हुए बिजली दरों को वापस लिया जाए

मनरेगा को लेकर भी केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, जो एक कानूनी अधिकार था, उसे कमजोर किया जा रहा है। पहले जहां केंद्र सरकार की 90 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, उसे घटाकर राज्य पर अधिक बोझ डाला गया है। आरोप है कि इससे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म की जा रही है, जबकि मनमोहन सिंह और भूपेश बघेल के कार्यकाल में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाता था।

विधायक ने आरोप लगाया कि बीते दो वर्षों में किसी भी गांव में 100 दिन का रोजगार नहीं दिया गया है। पहले ग्रामीणों की मांग पर सड़क, भूमि सुधार, मैदान समतलीकरण जैसे कार्य कराए जाते थे, लेकिन अब यह तय किया जा रहा है कि गांव में कौन सा काम होगा, जिससे ग्रामीणों की जरूरतों की अनदेखी हो रही है।

ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई है कि किसानों को 21 क्विंटल धान बेचने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए। जिन किसानों को टोकन नहीं मिले हैं, उन्हें तत्काल टोकन जारी किए जाएं, जबरन रकबा समर्पण से वंचित किसानों का धान पुनः खरीदा जाए और धान खरीदी की अवधि 15 दिन बढ़ाई जाए।