फातिमा शेख प्रतिभा सम्मान समारोह में शिक्षा और सेवा का उत्सव, 75 मेधावी छात्रों सहित पत्रकारों व समाजसेवियों का हुआ सम्मान

फातिमा शेख प्रतिभा सम्मान समारोह में शिक्षा और सेवा का उत्सव, 75 मेधावी छात्रों सहित पत्रकारों व समाजसेवियों का हुआ सम्मान

खैरागढ़. अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन दूसरों के लिए जीना ही सच्चा मानव धर्म है,” यह संदेश पद्मश्री से सम्मानित समाजसेविका शमशाद बेगम ने इकरा फाउंडेशन द्वारा आयोजित जिला स्तरीय फातिमा शेख प्रतिभा सम्मान समारोह में दिया। भारत की प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका स्वर्गीय फातिमा शेख की जयंती पर रविवार 11 जनवरी को आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, सेवा और सामाजिक सद्भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शमशाद बेगम मौजूद रहीं, जबकि अध्यक्षता नगर पंचायत गंडई के पूर्व उपाध्यक्ष जावेद खान ने की।

शमशाद बेगम का संदेश— शिक्षा ही आत्मनिर्भरता और सफलता की असली सीढ़ी

कार्यक्रम में शमशाद बेगम ने इकरा फाउंडेशन की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था शिक्षा के क्षेत्र में बेहद नेक और श्रेष्ठ कार्य कर रही है। उन्होंने अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए कहा कि उनकी मां की प्रेरणा से ही वे शिक्षा के मार्ग पर आगे बढ़ीं और 1990 से साक्षरता मिशन से जुड़कर बेटियों की शिक्षा के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने बच्चों और महिलाओं को संदेश दिया कि शिक्षा ही वह सीढ़ी है जिससे सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है और जीवन की चुनौतियों से मजबूती से लड़ा जा सकता है।

जावेद खान, रफीक खान और इकरा फाउंडेशन ने बच्चों के भविष्य पर दिया जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जावेद खान ने कहा कि शिक्षा के बिना धन भी बेकार है और इकरा फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से बच्चों के भविष्य को संवारने का सराहनीय कार्य कर रही है। विशिष्ट अतिथि मो. रफीक खान ने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों को प्रेरणा मिलती है और समाज में सकारात्मक माहौल बनता है। उन्होंने अपनी पत्नी शमशाद बेगम के समाजसेवा कार्यों की भी प्रशंसा की। वहीं इकरा फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य एवं नपा उपाध्यक्ष अब्दुल रज्जाक खान ने कहा कि कोई भी योग्य बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे, यही फाउंडेशन का मुख्य लक्ष्य है। स्वागत भाषण में अध्यक्ष खलील कुरैशी ने कहा कि सफलता किसी धर्म या जाति की मोहताज नहीं होती, बल्कि मेहनत और लगन से ही मिलती है।

सचिव याहिया नियाज़ी ने रखा इकरा फाउंडेशन का विज़न

इकरा फाउंडेशन के सचिव मो. याहिया नियाज़ी ने अपने संबोधन में कहा कि फातिमा शेख केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि सामाजिक बराबरी और महिला सशक्तिकरण की प्रतीक थीं। उन्होंने कहा कि इकरा फाउंडेशन उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पिछले कई वर्षों से यह प्रयास कर रहा है कि कोई भी बच्चा केवल आर्थिक कमजोरी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे। याहिया नियाज़ी ने बताया कि संस्था जरूरतमंद छात्रों को शिक्षा सामग्री, मार्गदर्शन और नैतिक सहयोग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें, क्योंकि शिक्षित पीढ़ी ही समाज और देश का भविष्य तय करती है।

समाजसेवा और उत्कृष्ट कार्यों के लिए विशिष्टजनों को मिला फातिमा शेख सम्मान

इस अवसर पर शिक्षा, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई विशिष्टजनों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया। नीट में सफलता हासिल करने वाली गुंजन साहू और तस्कीन फातिमा, निःशुल्क पढ़ाने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक जीवन लाल चौधरी, समाजसेवी संजय शर्मा, डॉक्टर नीतिराज सिंह, कब्रिस्तान कमेटी, मुस्लिम समाज खैरागढ़ ग्रुप, कनीज फातिमा कमेटी, पंचायत सचिव नाज़नीन नियाज़ी, समिति प्रबंधक मो. आरिफ खान, हज सेवा में योगदान देने वाले डॉ. ईरशाद खान, सेवाभावी महमूदा खान सहित अनेक लोगों को फातिमा शेख सम्मान से नवाजा गया।

75 मेधावी छात्र-छात्राओं और पत्रकारों का हुआ सम्मान, कार्यक्रम बना प्रेरणास्रोत

पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वरिष्ठ पत्रकार रेखा झा, राजू यदु, सन्नी यदु, साकेत श्रीवास्तव, प्रदीप बोरकर, ईला सिद्दीकी, प्रशांत सहारे, नीलेश यादव, उमेश्वर वर्मा और विमल बोरकर को भी सम्मानित किया गया। साथ ही कक्षा 10वीं, 12वीं, स्नातक और स्नातकोत्तर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र–छात्राओं को नकद पुरस्कार, स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। लगभग 75 मेधावी छात्रों को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई, जिससे समारोह एक प्रेरणादायक उत्सव में बदल गया।