चार माह से फाइलों में उलझी शिकायत, ‘लेटर-लेटर’ खेल में जांच ठप
जांच के आदेश के महीनों बाद भी सच्चाई अधर में
खैरागढ़. जनपद पंचायत छुईखदान में वर्ष 2025-26 के लिए कथित फर्जी एवं बोगस बजट तैयार कर जिला कार्यालय में प्रस्तुत किए जाने के गंभीर आरोपों को लेकर उठी शिकायत को चार महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इसका ठोस निराकरण नहीं हो सका है। शिकायतकर्ता द्वारा बार-बार पत्राचार, जिला पंचायत स्तर से निर्देश और अंततः जांच दल के गठन के बावजूद कार्रवाई की गति बेहद धीमी बनी हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अखबारों में खुलासा, फिर भी प्रशासन मौन
अक्टूबर 2025 में जिला एवं राज्य स्तरीय समाचार पत्रों में यह खबर प्रकाशित हुई थी कि जनपद पंचायत छुईखदान का वर्ष 2025-26 का बजट बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए, अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी के हस्ताक्षर से अनुमोदन हेतु जिला कार्यालय भेज दिया गया है।

इस पर जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्य एवं संचार एवं संकर्म स्थायी समिति के सभापति सुधीर गोलछा ने इसे फर्जी और बोगस बताते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया कि न तो सामान्य सभा की बैठक में और न ही किसी स्थायी समिति—सामान्य प्रशासन, संचार, कृषि या महिला एवं बाल विकास—की बैठक में बजट पर चर्चा हुई और न ही अनुमोदन लिया गया। इसके बावजूद बजट को वैध बताकर प्रस्तुत किया जाना नियमों का खुला उल्लंघन है।
7 दिन, फिर 3 दिन… पर रिपोर्ट नहीं
जिला पंचायत कार्यालय ने 6 नवंबर 2025 को जनपद पंचायत छुईखदान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से सात दिनों के भीतर प्रतिवेदन मांगा, लेकिन निर्धारित समयसीमा में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद 5 फरवरी 2026 को पुनः तीन दिनों के भीतर प्रतिवेदन देने के निर्देश जारी किए गए। इसके बावजूद रिपोर्ट का अभाव बना रहा, जिससे यह सवाल उठने लगे कि क्या जानबूझकर मामले को लंबित रखा जा रहा है।
जांच दल बना, पर नतीजा नदारद
लगातार दबाव के बाद 4 फरवरी 2026 को जिला पंचायत द्वारा संयुक्त जांच दल का गठन किया गया। इस दल में जिला पंचायत की लेखाधिकारी को प्रभारी अधिकारी तथा विकास विस्तार अधिकारी और सहायक लेखा परीक्षण अधिकारी को सहायक प्रभारी अधिकारी बनाया गया। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि शिकायत की सूक्ष्मता से जांच कर तीन दिनों के भीतर संयुक्त जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।
हालांकि जांच दल के गठन को भी कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है और न ही किसी तरह की अंतरिम कार्रवाई सामने आई है। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि मामला ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है।
बिना बजट अनुमोदन के राशि आहरण के आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले वर्षों में बिना बजट अनुमोदन के राशि आहरण किया गया, जो वित्तीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल प्रक्रियागत त्रुटि नहीं बल्कि बड़े वित्तीय अनियमितता का मामला बन सकता है।
जनप्रतिनिधियों में असंतोष, पारदर्शिता पर सवाल
महीनों तक कार्रवाई न होने से जनपद पंचायत के अन्य जनप्रतिनिधियों में भी असंतोष व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि शिकायत निराधार थी तो समय रहते उसका खंडन किया जाना चाहिए था, और यदि आरोप सही हैं तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
जांच टीम गठित कर दी गई है जांच प्रक्रियाधीन है।
प्रेम कुमार पटेल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत केसीजी



