दानिया पंचायत सचिव का वेतन रुका, 18 मार्च को जनपद पंचायत घेराव की चेतावनी

दानिया पंचायत सचिव का वेतन रुका, 18 मार्च को जनपद पंचायत घेराव की चेतावनी

रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा 

खैरागढ़. ग्राम पंचायत दनिया के सचिव के वेतन भुगतान को लेकर जनपद पंचायत छुईखदान में विवाद गहराता नजर आ रहा है। सचिव बुधारु राम धुर्वे का वेतन कई महीनों से नहीं मिलने पर ग्राम पंचायत दनिया के सरपंच और ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गंडई-छुईखदान को ज्ञापन सौंपकर 18 मार्च को जनपद पंचायत कार्यालय का घेराव और धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। ज्ञापन में कहा गया है कि सचिव का करीब छह माह का वेतन रोक दिया गया है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सरपंच का आरोप: बिना कारण रोका गया वेतन

ग्राम पंचायत दनिया के सरपंच मंगलू साहू ने कहा कि पंचायत सचिव नियमित रूप से पंचायत के कार्यों में उपस्थित रहते हैं और शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहे हैं। इसके बावजूद उनका वेतन रोक दिया गया है। सरपंच का कहना है कि इस संबंध में एक माह पहले भी जनपद पंचायत कार्यालय में आवेदन देकर भुगतान जारी करने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

तीन दिन में भुगतान नहीं तो आंदोलन

सरपंच और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सचिव का रुका हुआ वेतन तीन दिन के भीतर जारी नहीं किया गया तो 18 मार्च को सुबह 11 बजे जनपद पंचायत छुईखदान कार्यालय का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस आंदोलन में सरपंच, पंच, ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

जनपद सदस्य सुधीर गोलछा ने उठाया मुद्दा

छुईखदान जनपद सभापति सुधीर गोलछा ने ग्राम पंचायत दनिया के सचिव बुधारु राम धुर्वे के वेतन रोके जाने के मामले में नाराजगी जताते हुए कहा कि संबंधित सचिव नियमित रूप से पंचायत में उपस्थित होकर कार्य कर रहे हैं और सरपंच द्वारा भी उनकी उपस्थिति के संबंध में लिखित जानकारी प्रस्तुत की जा चुकी है। इसके बावजूद जनपद पंचायत स्तर पर उनका वेतन कई महीनों से लंबित रखा गया है, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि सचिव के खिलाफ न तो सरपंच, न पंचों और न ही ग्रामवासियों या किसी जनप्रतिनिधि द्वारा किसी प्रकार की शिकायत की गई है।

गोलछा ने आरोप लगाया कि वेतन भुगतान के मामले में जनपद पंचायत कार्यालय की ओर से लगातार आज-कल भुगतान कर देंगे कहकर टालमटोल की जा रही है, जिससे पंचायत स्तर पर अनावश्यक परेशानी की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि किसी नियमित सचिव का वेतन रोकना सीईओ के पदीय अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई है और इसकी जांच होनी चाहिए कि आखिर छह माह तक वेतन क्यों रोका गया।

उन्होंने कहा कि सीईओ द्वारा 25 फरवरी को नोटिस जारी करने की बात कही जा रही है, लेकिन यदि नोटिस उसी दिन जारी हुआ है तो फिर दिवाली के समय से वेतन क्यों रोका गया, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। गोलछा ने कहा कि यह मामला अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले कर्मचारी से जुड़ा है, इसलिए इस प्रकार अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर वेतन रोकना गंभीर विषय है और इसकी उच्च स्तर पर जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सचिव का लंबित वेतन तत्काल जारी किया जाए, अन्यथा इस पूरे मामले की शिकायत उच्च स्तर पर की जाएगी।

सचिव ने भी लिखा पत्र, बताया आर्थिक संकट

इधर पंचायत सचिव बुधारु राम धुर्वे ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र लिखकर रुका हुआ वेतन दिलाने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा कि कई महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और परिवार के भरण-पोषण व इलाज में भी परेशानी हो रही है। सचिव ने प्रशासन से जल्द भुगतान कराने की मांग की है।

शिकायत मिला है, सीईओ जनपद पंचायत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

प्रेम कुमार पटेल, सीईओ जिला पंचायत केसीजी