22/12/2015 के आदेश के ऊपर कोई वैध आदेश नहीं तो अपराध सिद्ध माना जाए : मनीष सोनी

22/12/2015 के आदेश के ऊपर कोई वैध आदेश नहीं तो अपराध सिद्ध माना जाए : मनीष सोनी

खैरागढ़. जमीन विवाद के चर्चित प्रकरण में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। इतवारी बाजार निवासी मनीष सोनी ने कलेक्टर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को विस्तृत शिकायत सौंपते हुए राजस्व अधिकारियों पर गंभीर फर्जीवाड़े के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच केवल अपर कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी से कराई जाए, क्योंकि उन्हें निचले स्तर के राजस्व अमले पर भरोसा नहीं है। शिकायत में 22 दिसंबर 2015 के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, खैरागढ़ के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि खसरा क्रमांक 182/6 को न्यायालय द्वारा निरस्त किया गया था, किंतु राजस्व रिकॉर्ड में उसका समुचित पालन नहीं हुआ।

मनीष सोनी का आरोप है कि निरस्तीकरण की जानकारी होने के बावजूद वर्ष 2021 में उसी खसरा के आधार पर कथित रूप से फर्जी रजिस्ट्री कराई गई। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि यदि खसरा 182/6 को पुनर्जीवित करने वाला कोई उच्चतर आदेश मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा यह गंभीर अनियमितता मानी जाए। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनके साथ फर्जी लोन, गैरहाजिरी में पेशियां दर्ज करने और निरस्त रिकॉर्ड के आधार पर नामांतरण जैसी तीन प्रकार की अनियमितताएं हुई हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि 2026 में भी कथित रूप से बिना उपस्थिति के कार्रवाई की गई और उनके नाम पर केसीसी लोन दर्शाकर राशि वसूली गई।

शिकायतकर्ता ने अनुविभागीय अधिकारी टंकेश्वर साहू, तहसीलदार आशीष देवहारी, और तत्कालीन तहसीलदार प्रीतम कुमार साहू एवं संबंधित पटवारी छेदी लाल जांगड़े की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि बार-बार आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद रिकॉर्ड में संशोधन नहीं किया गया।

उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि उनके दस्तावेज झूठे सिद्ध होते हैं तो वे स्वयं पुलिस कार्रवाई के लिए तैयार हैं, किंतु यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायत करना उनके लिए भी पीड़ादायक है, परंतु निष्पक्ष जांच न होने से उन्हें उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की मांग करनी पड़ रही है।