पंचायतों के खाली खाते, सरपंच कर्ज में डूबे: उधारी पर चला गांव का विकास
दुकानदार वसूली करने घर तक पहुंच रहे, सरपंच दुकानदार को देख कर भाग रहे
रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा
खैरागढ़. जनपद पंचायत खैरागढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायतें इन दिनों गहरे वित्तीय संकट से जूझ रही हैं। वित्तीय मद की राशि समय पर जारी नहीं होने से गांवों में मूलभूत सुविधाओं का संचालन ठप होने की कगार पर है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सरपंचों को पानी, गली, नाली और साफ-सफाई जैसे जरूरी काम स्थानीय दुकानों से उधारी लेकर कराना पड़ रहा है। उधारी का यह बोझ अब सरपंचों के निजी जीवन पर भारी पड़ने लगा है।
उधारी पर विकास, उम्मीद पर टिका भुगतान
ग्रामीणों की समस्याओं को देखते हुए सरपंचों ने बोर मरम्मत, नाली सफाई, गली सुधार जैसे कार्य पहचान की दुकानों से उधार सामान लेकर कराए। दुकानदारों से यह कहकर समय लिया गया कि एक-दो माह में पंचायत फंड आ जाएगा और भुगतान हो जाएगा। लेकिन साल बीतने को है लेकिन अभी तक राशि जारी नहीं हुई। नतीजा यह हुआ कि दुकानदार अब सरपंचों के घर तक पहुंचकर भुगतान की मांग कर रहे हैं।
धमकी, अपमान और गिरवी रखी बाइक
समाज में बदनामी के डर से नाम नहीं छापने के शर्त पर एक सरपंच ने बताया कि भुगतान न होने पर दुकानदारों ने घर का सामान उठाने तक की धमकी दी। लगातार दबाव से तंग आकर उन्होंने अपनी बाइक गिरवी रखकर आंशिक भुगतान किया, फिर भी 2 लाख 56 हजार रुपये अब तक बकाया हैं। सरपंच का कहना है कि अब हालत यह है कि जमीन बेचकर भुगतान करने की नौबत आ सकती है।
ग्रामीणों का आक्रोश: ‘काम नहीं तो इस्तीफा क्यों नहीं?’
पंचायत फंड खाली होने का असर सीधा ग्रामीणों पर पड़ रहा है। टूटे नल, जाम नालियां, गंदगी—हर समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण सरपंचों के घर तक पहुंच रहे हैं, लेकिन जवाब एक ही है: "पैसा नहीं है।” इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है और वे सरपंचों से सवाल कर रहे हैं कि जब काम नहीं हो सकता तो पद पर बने रहने का क्या मतलब?
महिला स्व-सहायता समूह भी बेहाल
गांवों में साफ-सफाई का जिम्मा संभालने वाले महिला समूहों को भी कई महीनों से भुगतान नहीं मिल पाया है। समूह की महिलाएं लगातार सरपंचों से भुगतान की मांग कर रही हैं, लेकिन पंचायत खाते खाली होने से सरपंच असहाय नजर आ रहे हैं।
पंचायत ने अब तक खर्च किए सिर्फ 11.68 करोड़ रुपए
जनपद पंचायत खैरागढ़ के वित्तीय वर्ष 2025-26 के अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार कुल 114 पंचायतों में से 111 पंचायतों ने विकास कार्यों पर 11.68 करोड़ खर्च दर्ज किया है, जबकि पांडादाह, ईटार और भरतपुर पंचायतों में अब तक शून्य व्यय रहा है। सबसे अधिक खर्च मुढीपार पंचायत द्वारा 36,25,248 रुपए किया गया, इसके बाद मुतेड़ा पंचायत ने 35,87,097 रुपए, एटीकसा पंचायत ने 31,11,394 रुपए, सलोनी पंचायत ने 29,38,997 रुपए और बढ़ईटोला पंचायत ने 27,34,926 रुपए खर्च किए। सिरसाही पंचायत का व्यय 24,18,426 रुपए, घोठिया का 23,23,935 रुपए, दिलीपपुर का 21,26,941 रुपए, ठेलकाडीह का 20,35,354 रुपए, ढोलियाकान्हार का 20,31,970 रुपए, जोरातरई का 18,70,248 रुपए, सिंघौरी का 18,66,489 रुपए, बेन्द्रीडीह का 17,92,822 रुपए, कामठा का 17,75,044 रुपए, भूलाटोला का 16,97,549 रुपए, चिचोला का 16,70,538 रुपए, चिचका का 16,38,797 रुपए, नवागांव का 16,11,682.18 रुपए, पचपेड़ी का 15,67,330 रुपए, तेलीखपरी का 15,58,599 रुपए, अवेली का 15,26,968 रुपए, विचारपुर का 15,21,512 रुपए, गातापारकला का 15,16,407 रुपए, उरईडाबरी का 15,02,933 रुपए, करेला का 14,94,540 रुपए, लछना का 14,61,219 रुपए, डोकराभाठा का 14,25,811 रुपए, भोथी का 13,90,497 रुपए, मंडला का 13,58,606 रुपए, प्रकाशपुर का 13,41,761 रुपए, रूसे का 13,19,258 रुपए, अमलीडीहकला का 12,78,902 रुपए, कोड़ेनवागांव का 11,62,540 रुपए, चारभाठा का 11,33,816 रुपए, अचानकपुर नवागांव का 11,09,314 रुपए, संडी का 10,99,111 रुपए, सिंगारपुर का 10,97,553 रुपए, साल्हेभर्री का 10,52,096 रुपए, बल्देवपुर का 10,39,880 रुपए, विक्रमपुर का 10,38,864 रुपए, घोघेडबरी का 10,35,447 रुपए, जालबांधा का 10,34,556 रुपए, मुहडाबरी का 10,12,531 रुपए, टोलागांव का 10,02,533 रुपए, दपका का 9,86,874 रुपए, धनगांव का 9,76,575 रुपए, पंडुका का 9,57,869 रुपए, देवरीभाट का 9,53,673 रुपए, देवरी का 9,45,316 रुपए, तुलसीपुर का 9,41,989 रुपए, टेकापार का 8,94,363 रुपए, केसला का 8,55,324 रुपए, सोनपुरी का 8,50,457 रुपए, करमतरा का 8,44,064 रुपए, बैगाटोला का 8,18,201 रुपए, महरुमकला का 8,05,005 रुपए, मरकामटोला का 7,90,682 रुपए, सिंगारघाट का 7,78,565 रुपए, खम्हारडीह का 7,72,647 रुपए, भरदाकला का 7,68,861 रुपए, भंडारपुर का 7,60,210 रुपए, कोहकाबोड का 7,42,292.76 रुपए, पेंड्रीकला का 6,96,247 रुपए, मदराकुही का 6,81,133 रुपए, शेरगढ़ का 6,74,121 रुपए, बघमर्रा का 6,69,606 रुपए, कटंगीकला का 6,68,040 रुपए, खजरी का 6,62,826 रुपए, मडौदा का 6,53,554 रुपए, कलकसा का 6,50,299 रुपए, कचरी का 6,47,608 रुपए, सहसपुर का 6,37,773 रुपए, चंगुर्दा का 6,37,083 रुपए, आमदानी का 6,05,438 रुपए, कुम्ही का 6,03,909 रुपए, मदनपुर का 6,01,504 रुपए, नवागांव कंवर का 6,00,847 रुपए, सर्रागोंदी का 5,86,376 रुपए, बिडौरी का 5,84,565 रुपए, सोनभट्ठा का 5,81,641 रुपए, डमरी का 5,79,792 रुपए, जुरलाकला का 5,57,222 रुपए, गर्रापार का 5,55,691 रुपए, झिकादाह का 5,53,308 रुपए, सांकरा का 5,41,655 रुपए, लिमतरा का 5,41,184 रुपए, रंगकठेरा का 5,37,986 रुपए, जुनवानी का 5,33,200 रुपए, अछोली का 5,27,185 रुपए, गुमानपुर का 5,05,657 रुपए, बरबसपुर का 4,98,631 रुपए, चंदैनी का 4,37,184 रुपए, सलिहा का 4,31,086 रुपए, पवनतरा का 4,17,556 रुपए, बफरा का 4,14,410 रुपए, कुलीकसा का 4,09,935 रुपए, परसाही का 3,85,771 रुपए, राहुद का 3,83,403 रुपए, कटंगीखुर्द का 3,66,388 रुपए, कुकुरमुड़ा का 3,44,710 रुपए, चिंगली का 3,33,885 रुपए, रगरा का 3,13,803 रुपए, पीपलाकछार का 3,13,155 रुपए, भीमपुरी का 3,07,397 रुपए, अकरजन का 2,99,481 रुपए, दैहान का 2,85,510 रुपए, बैहाटोला का 2,39,320 रुपए और गातापार जंगल पंचायत का सबसे कम 1,79,621 रुपए विकास कार्यों पर खर्च दर्ज किया गया है।
विलंब का कारण जनपद स्तर पर ज्ञात नहीं - सीईओ
जनपद पंचायत खैरागढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु गुप्ता ने 15वें वित्त आयोग की राशि को लेकर स्पष्ट किया कि यह फंड जनपद पंचायत के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे केंद्र सरकार द्वारा ऑनलाइन ग्राम पंचायतों के खातों में डाला जाता है। इसलिए इसके विलंब का कारण जनपद स्तर पर ज्ञात नहीं है।



