ठेलकाडीह में शराब भट्ठी खुलने की तैयारी, आपत्तिरहित स्थल चयन करने में पंचायत प्रतिनिधियों के फूल रहे हाथ पैर

ठेलकाडीह में शराब भट्ठी खुलने की तैयारी, आपत्तिरहित स्थल चयन करने में पंचायत प्रतिनिधियों के फूल रहे हाथ पैर

रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा 

खैरागढ़. खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ठेलकाडीह में प्रस्तावित कम्पोजिट देशी मदिरा दुकान को लेकर गांव दो खेमों में बंट गया है। कार्यालय आबकारी आयुक्त, छत्तीसगढ़ ने 23 जनवरी 2026 को कलेक्टर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला को पत्र भेजकर नई दुकान खोलने की स्वीकृति दी और आपत्तिरहित स्थल चयन के निर्देश जारी किए। आदेश के बाद गांव में हलचल बढ़ गई है—कहीं समर्थन की आवाज है तो कहीं सख्त विरोध।

महिलाओं की चिंता: “परिवार और बच्चों का भविष्य दांव पर”

गांव की बड़ी संख्या में महिलाएं शराब दुकान के विरोध में खुलकर सामने आई हैं। उनका कहना है कि दुकान खुलने से घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी और युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। कई महिलाओं का आरोप है कि ग्राम सभा में उनकी भागीदारी सीमित रहती है और प्रस्ताव पुरुष बहुल उपस्थिति में पारित हो जाते हैं। महिलाओं की मांग है कि अंतिम निर्णय से पहले उनकी राय औपचारिक रूप से दर्ज की जाए।

पंचायत का दावा: “मांग ग्रामीणों की थी”

सरपंच प्रतिनिधि शत्रुहन यादव का कहना है कि ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित हुआ था और सुशासन तिहार में भी कुछ ग्रामीणों ने शराब दुकान की मांग की थी। पंचायत के अनुसार 70-80 प्रतिशत लोग समर्थन में हैं। हालांकि जमीन चयन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पानी टंकी के पास शासकीय भूमि का सुझाव सामने आया है, लेकिन उस पर भी सर्वसम्मति नहीं बन पाई है। निर्माण के लिए अलग से फंड उपलब्ध न होना भी एक चुनौती बना हुआ है।

शराब प्रेमियों का तर्क: “अवैध बिक्री पर लगेगी लगाम”

दुकान के समर्थकों और शराब उपभोक्ताओं का कहना है कि अधिकृत दुकान खुलने से अवैध शराब पर रोक लगेगी। अभी आसपास के क्षेत्रों से चोरी-छिपे शराब लाई जाती है, जिससे गुणवत्ता की गारंटी नहीं रहती। समर्थकों का तर्क है कि वैध दुकान होने से तय दर पर नियंत्रित बिक्री होगी, मिलावटी शराब का खतरा घटेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल सकता है। उनका मानना है कि समस्या शराब से ज्यादा उसके दुरुपयोग की है, जिस पर प्रशासन और समाज मिलकर नियंत्रण कर सकते हैं।

विपक्ष का हमला: “राजस्व के लिए समाज से समझौता”

स्थानीय कांग्रेस नेता अनिल जांगड़े ने सरकार पर राजस्व बढ़ाने के लिए सामाजिक सरोकारों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। फिलहाल ठेलकाडीह में यह मुद्दा सिर्फ एक दुकान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शासन की नीति और गांव की जनभावना के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा बन चुका है।