चार दिन बाद भी फर्जी शिविर संचालक बेनकाब नहीं, श्रम विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में
खैरागढ़. ग्राम पंचायत चिचोला में श्रम कार्ड नवीनीकरण और नए श्रम कार्ड बनाने के नाम पर की गई अवैध वसूली के मामले को चार दिन बीत जाने के बाद भी श्रम विभाग किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सका है। श्रम विभाग के नाम से फर्जी शिविर लगाकर हजारों रुपये की वसूली करने वाले सीएससी संचालक का अब तक पता नहीं लग पाया है, जिससे जिले में विभाग की भारी किरकिरी हो रही है।
जांच के नाम पर खानापूर्ति
चिचोला में श्रम कार्ड नवीनीकरण और नए कार्ड बनाने के नाम पर ग्रामीणों से 1000 से 2000 रुपये तक की अवैध वसूली का मामला उजागर होने के बाद उम्मीद थी कि श्रम विभाग त्वरित कार्रवाई करेगा। लेकिन चार दिन बाद भी न तो फर्जी शिविर लगाने वालों की पहचान हो सकी है और न ही किसी के खिलाफ प्राथमिकी या ठोस विभागीय कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
“प्रभार अधिक है” कहकर पल्ला झाड़ रहे अधिकारी
जिला सहायक श्रम अधिकारी उज्जवला भोई का कहना है कि उनके पास एक से अधिक जिलों का प्रभार है, इसलिए अभी जांच नहीं हो पाई है। अधिकारियों के इस तरह के बयानों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या गंभीर मामलों में भी प्रभार का बहाना स्वीकार्य है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बयानबाजी विभागीय लापरवाही को छिपाने का प्रयास मात्र है।
पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
श्रम विभाग पहले से ही विवादों में रहा है। श्रम कार्ड बनाने, नवीनीकरण कराने या योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर 30 से 35 प्रतिशत तक कमीशन वसूली के आरोप लगातार लगते रहे हैं। इससे पहले भी विनोद सिंह राजपूत, सीएससी (छत्तीसगढ़ जन सेवा श्रम एवं श्रमिक कार्ड) संचालक द्वारा विभागीय अधिकारियों पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए गए थे, लेकिन आज तक उनकी भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।
सीएससी संचालक और दलालों के गठजोड़ का आरोप
अब आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि श्रम विभाग का काम सीएससी संचालकों और दलालों के माध्यम से कमीशन पर कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना “सेवा शुल्क” दिए न तो कार्ड बनता है और न ही किसी योजना का लाभ मिलता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विभाग खुद इन गड़बड़ियों पर चुप क्यों है।
सरपंच की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत स्तर पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जनपद या किसी विभाग का नाम लेकर पंचायत में शिविर लगा रहा है, तो सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों को मुनादी कराने से पहले संबंधित विभाग से लिखित पुष्टि क्यों नहीं की गई। इस लापरवाही ने फर्जीवाड़े को खुला मौका दे दिया।
आरटीआई में भी टालमटोल
आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा श्रम विभाग से विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित हितग्राहियों की सूची मांगी गई थी, लेकिन विभाग ने जानकारी देने से परहेज किया। विभाग के जवाब से असंतुष्ट होकर अपील भी की गई है। इससे यह संदेह और गहराता है कि कहीं न कहीं विभाग जानबूझकर जानकारी छिपा रहा है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
जिले से लेकर जनपद स्तर तक सामान्य प्रशासन समिति की बैठकों में अधिकारियों से सख्त सवाल-जवाब न होने के कारण भी अधिकारियों के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं। श्रम विभाग के मामलों में जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर भी उंगलियां उठ रही हैं। आरोप है कि इसी चुप्पी का फायदा उठाकर विभाग अपने चहेते सीएससी केंद्रों से कमीशन लेकर काम करवा रहा है।
चिचोला में श्रम कार्ड नवीनीकरण के नाम पर अवैध वसूली के मामले में अभी तक संबंधित सीएससी संचालक की पहचान नहीं हो पाई है। घटना के दिन और वर्तमान में मैं राजनांदगांव में पदस्थ हूं। बुधवार को किसी अधिकारी को भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी, इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
उज्ज्वला भोई, सहायक श्रम जिलाधिकारी केसीजी



