वार्षिक रिपेयरिंग मरम्मत कार्य में करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप, कलेक्टर से पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

वार्षिक रिपेयरिंग मरम्मत कार्य में करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप, कलेक्टर से पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

खैरागढ़. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) खैरागढ़ में वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान कराए गए एआर (वार्षिक रिपेयरिंग) व रंगाई-पुताई कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। ग्राम बिजलदेही निवासी आदित्य सिंह परिहार ने इस संबंध में जिला कलेक्टर के.सी.जी. को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की सूक्ष्म जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने आरटीआई के माध्यम से पीडब्ल्यूडी द्वारा कराए गए कार्यों की जानकारी प्राप्त की और भौतिक सत्यापन किया, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। दस्तावेजों में बड़े-बड़े काम दिखाए गए, लेकिन मौके पर वे कार्य या तो हुए ही नहीं या बेहद नगण्य पाए गए।

गोबर पेंट के नाम पर फर्जी बिलिंग

शिकायत में कहा गया है कि कई भवनों में गोबर पेंट से रंगाई दिखाकर भुगतान किया गया, जबकि यह पेंट बाजार में पहले से बंद हो चुका है और कहीं भी इसका उपयोग नहीं हुआ। इसके बावजूद बिल बनाकर लाखों की राशि आहरित कर ली गई, जो सीधे-सीधे फर्जीवाड़ा बताया गया है।

सरकारी मद से अधिकारी के निजी भवन में निर्माण

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पीडब्ल्यूडी खैरागढ़ के कार्यपालन अभियंता के निजी निवास पर बाउंड्रीवाल और वाहन खड़ा करने हेतु टीन शेड बनवाया गया, जिसकी राशि एआर (वार्षिक रिपेयरिंग) मद से खर्च की गई। यह मद केवल सरकारी भवनों की मरम्मत के लिए होती है, ऐसे में इसे निजी उपयोग में लेना सीधा वित्तीय अपराध माना जा रहा है।

स्कूल और बीईओ कार्यालयों में फर्जी माप

शिकायत में यह भी उजागर किया गया है कि बीईओ कार्यालय गातापार हाई स्कूल में सीमेंट प्लास्टर का फर्जी माप चढ़ाकर भुगतान किया गया, जबकि कार्य मौके पर नहीं हुआ। इसी तरह हाई स्कूल अतरिया और हायर सेकेंडरी स्कूल मदराकुही, बीईओ में पेंटिंग से पहले शेड पेपर से डिस्टेम्पर हटाने का माप दिखाया गया, जबकि डीईओ कार्यालय से पूछताछ में स्पष्ट हुआ कि कोई कार्य नहीं हुआ।

रेस्ट हाउस से थाना तक कई भवन जांच के दायरे में

शिकायत में रेस्ट हाउस, एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, स्टोर रूम, पुलिस थाना, पीडब्ल्यूडी कार्यालय और पोस्ट ऑफिस में दिखाए गए रिपेयरिंग और पेंटिंग कार्यों को भी संदेहास्पद बताया गया है और इन सभी की भौतिक जांच की मांग की गई है।

कलेक्टर बंगला: 14 दिन में 5 लाख का रहस्यमय काम

सबसे हैरान करने वाला मामला कलेक्टर बंगला का है, जहां 5 लाख रुपये की लागत से पुताई, मरम्मत, पुट्टी और गार्ड रूम का कार्य दिखाया गया। 30 जनवरी 2024 को तकनीकी स्वीकृति, 24 फरवरी को टेंडर और 28 फरवरी 2024 को पूरा भुगतान कर दिया गया — यानी सिर्फ 14 दिनों में पूरा कार्य दर्शाया गया, जो अपने आप में भारी संदेह पैदा करता है।

24 पन्नों के दस्तावेज सौंपे, जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ 24 पृष्ठों के दस्तावेज संलग्न किए हैं और कहा है कि जांच के दौरान सभी मूल प्रमाण उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही उन्होंने शिकायत की प्रति पीडब्ल्यूडी संचालनालय, मुख्य अभियंता नवा रायपुर को भी भेजी है।