8 साल में ही जवाब दे गई करोड़ों की सड़क, राहुद–बधमर्रा मार्ग के पुलों पर मंडराया हादसे का खतरा

8 साल में ही जवाब दे गई करोड़ों की सड़क, राहुद–बधमर्रा मार्ग के पुलों पर मंडराया हादसे का खतरा

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना से बनी सड़क पर दो पुलों में बने बड़े गड्ढे, ग्रामीणों ने बबूल डालकर खुद संभाला मोर्चा

खैरागढ़. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं ग्रामीण विकास योजना के तहत वर्ष 2022 में राहुद से बधमर्रा तक लगभग 2.80 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण करोड़ों की लागत से कराया गया था। उद्देश्य था गांवों को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ना, लेकिन 8 साल भी नहीं बीते और इसी सड़क के दो पुलों पर इतने बड़े गड्ढे बन गए हैं कि अब यह मार्ग सुविधा नहीं, बल्कि सीधा जानलेवा साबित हो रहा है। पुलों की हालत देखकर लोग हैरान हैं कि इतनी जल्दी यह सड़क और पुल जवाब कैसे दे गए।

पुलों पर बने जानलेवा गड्ढे

राहुद–बधमर्रा मार्ग पर बने पुलों के बीचो-बीच बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं, जिनकी वजह से बड़ी गाड़ियों का निकलना मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि जो व्यक्ति इस रास्ते से परिचित नहीं है, उसके लिए पुल पर गिरना लगभग तय माना जा रहा है। गड्ढों की गहराई और चौड़ाई इतनी ज्यादा है कि जरा सी चूक किसी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है।

बबूल डालकर ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा

प्रशासन की लापरवाही के बीच जागरूक ग्रामीणों ने खुद ही पहल की है। पुल पर बने गड्ढों में बबूल के पौधे काटकर डाल दिए गए हैं ताकि राहगीरों को दूर से ही खतरे का अंदाजा हो जाए और वे संभलकर वाहन चला सकें। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मुख्यमंत्री कार्यालय और पीडब्ल्यूडी कार्यालय खैरागढ़ में शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

3.5 मीटर चौड़े पुल पर रोज़ डर के साए में सफर

करीब 3.5 मीटर चौड़े इस पुल के बीच बने गड्ढों के कारण बड़ी गाड़ियों चलना तक मुश्किल हो गया है। रात के अंधेरे में स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, जब गड्ढे नजर नहीं आते और गिरना लगभग तय हो जाता है। कई ग्रामीण इन गड्ढों के कारण घायल हो चुके हैं, इसके बावजूद विभाग अब तक गंभीरता नहीं दिखा रहा है, मानो किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा हो।

दो पुलों की बदहाली ने उठाए गुणवत्ता पर सवाल

इस मार्ग पर कुल तीन पुल बने हैं, जिनमें से एक की स्थिति ठीक है, लेकिन दो पुलों में बीच से गड्ढे बन जाना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अगर चार साल में ही पुल इस हालत में पहुंच जाएं तो यह साफ तौर पर लापरवाही और घटिया निर्माण की ओर इशारा करता है। अब लोग मांग कर रहे हैं कि इस पूरे निर्माण की जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी जानलेवा लापरवाही दोबारा न हो।