जनपद पंचायत छुईखदान को चेतावनी — भुगतान किया तो माना जाएगा अनियमित व्यय, जिम्मेदारी तय
बिना बजट मंजूरी खर्च पर कड़ा अल्टीमेटम
खैरागढ़. जनपद पंचायत छुईखदान के वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनुमानित बजट को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। जिला पंचायत खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि जब तक बजट सक्षम प्राधिकारी से विधिवत अनुमोदित नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार का भुगतान अनियमित व्यय माना जाएगा और इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय की होगी।
बार-बार पत्र, फिर भी बजट नहीं भेजा गया
जिला पंचायत कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार उपसंचालक पंचायत कार्यालय ने 6 मई, 31 जुलाई और 19 सितंबर 2025 को अलग-अलग पत्र भेजकर जनपद पंचायत छुईखदान को निर्देश दिया था कि वित्तीय वर्ष 2025-26 का अनुमानित बजट जनपद पंचायत से विधिवत अनुमोदित कराकर, बैठक की तिथि और प्रस्ताव क्रमांक का उल्लेख करते हुए अनुमोदन हेतु भेजा जाए। इसके बावजूद आज तक बजट अनुमोदन के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।
बिना बजट खर्च अवैध माना जाएगा

पत्र में स्पष्ट रूप से छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 तथा पंचायत (वित्त एवं लेखा) नियमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी वित्तीय वर्ष में व्यय तभी वैध होता है जब उस वर्ष का बजट विधिवत अनुमोदित हो। अधिकारियों ने चेताया है कि बिना अनुमोदित बजट के किया गया कोई भी भुगतान अनियमित व्यय की श्रेणी में आएगा, जो आगे चलकर वित्तीय अनियमितता और दंडात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।
जिम्मेदारी सीधे अधिकारियों पर
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी निर्देश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि बजट अनुमोदन से पहले भुगतान किया जाता है और उससे वित्तीय अनियमितता उत्पन्न होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जनपद पंचायत के संबंधित अधिकारियों पर तय की जाएगी।
इस आदेश के बाद जनपद पंचायत स्तर पर हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है, क्योंकि विकास कार्यों और भुगतान प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ सकता है।
पहले से चल रहा है फर्जी बजट विवाद
गौरतलब है कि जनपद पंचायत छुईखदान में वर्ष 2025-26 के कथित फर्जी और बोगस बजट को लेकर पहले से ही शिकायतें और जांच की मांग उठ चुकी है। ऐसे में बजट अनुमोदन न होने की आधिकारिक पुष्टि ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बजट जल्द अनुमोदित नहीं हुआ तो पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्य, भुगतान और योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो सकता है। वहीं दूसरी ओर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक भी माना जा रहा है।



