कागजों में बंट गए ड्रम, गांव में पड़े मिले ढेर — ग्राउंड रिपोर्ट में खुली प्राकृतिक खेती योजना की पोल

कागजों में बंट गए ड्रम, गांव में पड़े मिले ढेर — ग्राउंड रिपोर्ट में खुली प्राकृतिक खेती योजना की पोल

रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा 

खैरागढ़. नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के तहत खैरागढ़ कृषि विभाग द्वारा 15 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। हालांकि इस पूरे खर्च और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी जिला पंचायत से लेकर जनपद पंचायत की कृषि समिति के सभापति और सदस्यों को नहीं दी गई है। सदस्यों ने इसे अपने अधिकारों का हनन और पंचायती राज अधिनियम की धाराओं की अवहेलना बताया है।

ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा: ड्रम मेडिकल स्टोर संचालक के घर में, किसान वंचित

KCG नवदर्पण की टीम ने जब किसानों की सूची लेकर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की तो हकीकत और भी चौंकाने वाली निकली। योजना के तहत 400 रुपये की दर से 500 किसानों को ड्रम वितरित किए जाने का दावा किया गया था, जिसके लिए 2 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। जब पड़ताल की गई तो पता चला कि गातापार और चंगुर्दा जैसे गांवों में आधे-अधूरे ड्रम वितरण हुए हैं। चंगुर्दा में तो एक निजी मेडिकल संचालक के घर में कई ड्रम पड़े मिले, जिनमें से अधिकतर फूटे और फटे हुए थे।

ग्राम सेवक के दावे झूठे, आधे-अधूरे ड्रम वितरण का मामला

ग्राम सेवक अमेन्द्र सिंह कुशवाह का कहना था कि सभी किसानों को ड्रम वितरित कर दिए गए हैं और वे दवाई बनाने लगे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। गातापार निवासी सुरेश कुमार और कुंभलाल धुर्वे ने बताया कि वे पात्र होने के बावजूद ड्रम से वंचित रह गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम सेवक जानबूझकर झूठ बोल रहे हैं और वितरण की सही स्थिति से विभाग को अवगत नहीं कराया गया है, जिससे किसानों का नुकसान हो रहा है।

सभापति बोले- मुझे कुछ नहीं पता, अधिकारी बैठक ही नहीं बुला रहे

जनपद पंचायत सभापति दिनेश वर्मा ने मामले पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, मुझे किसी भी प्रकार की खरीदी या खर्च की जानकारी नहीं है। आप बता रहे हैं तो पता चल रहा है। सखी और किसानों का चयन किस माध्यम से हुआ है, यह भी नहीं बताया गया। हम लगातार बैठक बुलाने को कह रहे हैं, लेकिन कृषि अधिकारी न तो बैठक बुला रहे हैं और न ही कोई जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी सामान्य सभा की बैठक में इस पूरे मामले की पड़ताल की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

किसानों को आवश्यक उपकरण और सामग्री वितरित की गई- साहू 

कृषि विभाग के अधिकारी लुकमान साहू ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती योजना के तहत किसानों को आवश्यक उपकरण और सामग्री शासन की गाइडलाइन अनुसार वितरित की गई है, इसमें विभाग ने कोई निर्णय अपने स्तर पर नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतवार सूची ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से प्राप्त हुई थी और उसी आधार पर लगभग 500 कंटेनर (ड्रम) वितरित किए गए। स्थायी समिति की भूमिका पर उन्होंने कहा कि बैठकों में योजना का लक्ष्य रखा जाता है, हर खरीदी का अलग-अलग उल्लेख नहीं होता, जबकि बिल प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है।