संयुक्त जांच में खुलासा: गलत दवाओं से तीन किसान की धान फसलें तबाह

संयुक्त जांच में खुलासा: गलत दवाओं से तीन किसान की धान फसलें तबाह

पन्ना कृषि केन्द्र के खिलाफ तीन किसानों की शिकायत सही साबित,

खैरागढ़. विकासखंड के डुंडा, अछोली और दुल्लापुर गांव के तीन किसानों की शिकायतों पर की गई संयुक्त जांच में यह पुष्टि हो गई है कि अतरिया स्थित पन्ना कृषि केन्द्र ने किसानों को गलत, अधिक मात्रा में और नियमों के विपरीत कीटनाशक व फफूंदनाशक दवाएं दीं, जिससे उनकी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा। सात सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अत्यधिक और अवैज्ञानिक छिड़काव से फसलों में फाइटो-टॉक्सिसिटी पैदा हुई, जिससे बाली अंदर से खोखली रह गई और उपज नष्ट हो गई।

लैब रिपोर्ट से पुष्टि: ‘कोजो टॉप’ और ‘जी स्टार’ दवाएं निकलीं अमानक

जांच में यह भी सामने आया कि दुकान से दी गई कुछ दवाएं प्रयोगशाला परीक्षण में अमानक (सब-स्टैंडर्ड) पाई गईं। कोज़ो टॉप और जी स्टार जैसी दवाओं को अमानक घोषित किया गया है, जिनकी बिक्री पर रोक लगाते हुए संबंधित फर्म और कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। राज्य कीटनाशी गुण नियंत्रण प्रयोगशाला ठेलकाडीह, राजनांदगांव की रिपोर्ट ने किसानों के आरोपों को तकनीकी रूप से सही साबित कर दिया।

अवैज्ञानिक छिड़काव बना फसल विनाश की वजह, बालियां अंदर से हुईं खोखली

जांच दल ने यह भी पाया कि पन्ना कृषि केन्द्र ने एक ही कीट या बीमारी के लिए किसानों को कई-कई तरह की दवाएं एक साथ बेच दीं, वह भी तय मात्रा से कहीं अधिक। इस अति-छिड़काव से पौधों में असामान्य वानस्पतिक वृद्धि हुई, पत्तियां लाल–पीली पड़ीं और दूध भरने के समय धान की बालियां अंदर से सूख गईं। रिपोर्ट के अनुसार यह नुकसान केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय क्षति भी है।

बिल से लेकर स्टॉक तक गड़बड़, कृषि केन्द्र में नियमों की खुली अनदेखी

जांच में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं — दुकान में कीटनाशकों का स्टॉक और मूल्य सूची प्रदर्शित नहीं थी, विक्रय पंजी नहीं रखा गया, मासिक प्रतिवेदन जमा नहीं किए गए और कई बिलों में जीएसटी नंबर व हस्ताक्षर तक नहीं थे। इसका सीधा मतलब है कि शासन को राजस्व की हानि पहुंचाई गई और किसानों को बिना वैध दस्तावेज के दवाएं थमाई गईं।

तकनीकी प्रभारी की गैरहाजिरी में दुकान संचालन, कानून का सीधा उल्लंघन

रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया कि दुकान की तकनीकी प्रभारी दीक्षा वर्मा की अनुपस्थिति में राजकुमार वर्मा और कर्मचारी धनंजय शिवारे किसानों को दवाएं बेचते रहे, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। बिना अधिकृत तकनीकी सलाह के किसानों को भारी मात्रा में रसायन देना सीधे तौर पर कीटनाशक अधिनियम 1968 और नियम 1971 का उल्लंघन माना गया है। इसी लापरवाही ने तीन किसान गजेश वर्मा में साहस राम वर्मा और मनोहर जंघेल की पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।

तीनों किसानों की फसल बर्बादी में दुकानदार की भूमिका साबित

तीनों किसानों — गजेश वर्मा, सहसराम वर्मा और मनोहर जंघेल — के मामलों में जांच दल ने स्पष्ट कहा है कि दवाओं की अधिक मात्रा और गलत संयोजन से ही फसलें बर्बाद हुईं। मनोहर जंघेल के मामले में भी टैगमाइसिन की अधिक मात्रा को फसल क्षति का प्रमुख कारण माना गया है, जबकि बिलों में भारी गड़बड़ी और अस्पष्टता पाई गई।

जांच पूरी, अब किसानों को मुआवजे की जगी मजबूत उम्मीद

अब जबकि सरकारी जांच में दुकानदार की गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हो चुकी है, तीनों पीड़ित किसानों में न्याय और मुआवजे की उम्मीद जगी है। किसानों का कहना है कि उनकी फसल नहीं, बल्कि उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हुई है, और अब शासन से अपेक्षा है कि दोषी दुकानदार पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें उचित मुआवजा दिलाया जाएगा।

फसल बर्बादी का कारण अधिक मात्रा में गलत मिश्रण दी गई- साहू

जांच अधिकारी और कीटनाशक निरीक्षक लुकमान साहू ने स्पष्ट किया है कि किसानों की फसल बर्बादी की शिकायतों में फर्जी दवा नहीं बल्कि अधिक मात्रा और गलत मिश्रण में दी गई दवाएं मुख्य कारण पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि दवाएं मानक थीं, लेकिन एक साथ कई रसायनों को जरूरत से ज्यादा मात्रा में देने से फसलों में फाइटो-टॉक्सिसिटी पैदा हुई, जिससे नुकसान हुआ। साहू ने यह भी कहा कि दुकान के लाइसेंस के नाम पर पंजीकृत तकनीकी व्यक्ति की उपस्थिति अनिवार्य होती है और उसके बिना दवा बिक्री नियमों का उल्लंघन है। पूरे मामले की पुष्टि सात सदस्यीय संयुक्त जांच दल द्वारा की गई है।