दामरी में मुरूम का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी, विभाग मौन; दो साल में 62.93 लाख खर्च, कार्रवाई शून्य
रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा
विधानसभा में ‘जीरो’ उत्खनन का दावा, जमीनी हकीकत ने खोली पोल
खैरागढ़. ग्राम दामरी में मुरूम का अवैध खनन लंबे समय से खुलेआम जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग जानकर भी अनजान बना हुआ है। सरकारी और निजी जमीनों को निशाना बनाकर लगातार उत्खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि विधानसभा में जिले में अवैध खनन के ‘जीरो’ प्रकरण होने का दावा किया गया, जबकि दामरी और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति इसके बिल्कुल उलट है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, दामरी बना केंद्र
दामरी में दिन-रात मुरूम की खुदाई और परिवहन जारी रहने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन मशीनों और वाहनों की आवाजाही आम बात हो गई है, लेकिन विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचना तक जरूरी नहीं समझते। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

‘सेटिंग’ के आरोप, माफियाओं के हौसले बुलंद
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों और खनन माफियाओं के बीच कथित ‘सेटिंग’ के कारण ही कार्रवाई नहीं हो रही। “पीली गाड़ी” वालों से सांठगांठ की चर्चा भी क्षेत्र में आम है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कार्रवाई होती, तो खुलेआम खनन संभव ही नहीं था।
विधानसभा के आंकड़े बनाम जमीनी सच्चाई
फरवरी-मार्च में संचालित विधानसभा सत्र के दौरान दिए गए जवाब के अनुसार केसीजी जिले में रेत के अवैध उत्खनन का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ, जबकि मुरूम के सिर्फ 2 प्रकरण सामने आए। लेकिन दामरी, साल्हेवारा, बुंदेली, सोनभट्टा और अन्य क्षेत्रों में लगातार खनन की शिकायतें मिल रही हैं। इससे साफ है कि कागजों में जीरो लेकिन जमीन पर अवैध खनन जारी है।

दो साल में 62,93,807 रुपए खर्च, लेकिन काम जीरो
केसीजी खनन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में कुल 62,93,807 रुपए खर्च किए, जिसमे वेतन पर 37,44,198 रुपए, महंगाई भत्ता 18,90,782 रुपए, मकान किराया भत्ता 2,51,645 रुपए, अन्य भत्ते 61,700 रुपए, डाक-तार व्यय: 5,000 रुपए, दूरभाष व्यय 3,000 रुपए, फर्नीचर एवं कार्यालय उपकरण पर 48,400 रुपए, लेखन सामग्री एवं फार्म छपाई 26,238 रुपए , अन्य आकस्मिक व्यय 48,500 रुपए, सूचना प्रौद्योगिकी: 1,00,000 रुपए, पेट्रोल-तेल 1,04,624 रुपए, विशेष सेवाएं 9,720 रुपए खर्च होने के बावजूद अवैध खनन रोकने के लिए ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
निगरानी फेल या जानबूझकर ढिलाई?

जिले में पत्थर खदान के लिए 229.267 हेक्टेयर में खदानों की लीज होने के बावजूद निगरानी लगभग नदारद है। वर्ष 2023 से 2026 तक कुल 53 प्रकरण दर्ज होने की बात कही गई, लेकिन कार्रवाई का असर कहीं दिखाई नहीं देता। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल है या जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है।
जनता का सवाल—खर्च का हिसाब कौन देगा?
लगातार हो रहे अवैध खनन और कार्रवाई के अभाव के बीच अब ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि जब कार्रवाई शून्य है, तो फिर करोड़ों का खर्च किस बात पर हो रहा है। ग्रामीणों ने कलेक्टर और उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दामरी क्षेत्र में अवैध मुरूम खनन की शिकायत मिली है। मौके पर टीम भेजा गया था लेकिन अब तक अवैध खनन में लिप्त कोई वाहन नहीं मिला है। जैसे ही किसी प्रकार की अवैध गतिविधि या वाहन पाया जाएगा, विभाग द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बबलू पांडे, खनिज अधिकारी केसीजी



