देवरी में करोड़ों की सड़क अधमरी, काम अधूरा पर ठेकेदार ने डकारी मलाई

देवरी में करोड़ों की सड़क अधमरी, काम अधूरा पर ठेकेदार ने डकारी मलाई

खैरागढ़। जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत देवरी में विकास के नाम पर सरकारी खजाने की खुली लूट का मामला सामने आया है। यहाँ पंचायत भवन से लेकर गौठान और जंगल की ओर जाने वाली सड़क भ्रष्टाचार की ऐसी भेंट चढ़ी है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को धूल और गड्ढे ही नसीब हो रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि सड़क का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन अफसरशाही और ठेकेदार की जुगलबंदी ने काम पूरा होने से पहले ही लाखों रुपए का भुगतान कर बंदरबांट कर ली है। तीन साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी यह मार्ग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।


तकनीकी मापदंड ताक पर: मुरम की जगह खेतों की मिट्टी से भरे जा रहे साइड शोल्डर
सड़क निर्माण में लापरवाही का आलम यह है कि यहाँ तकनीकी मापदंडों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। कायदे से सड़क के किनारों (साइड शोल्डर) को मजबूती देने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली मुरम और पत्थरों का उपयोग होना चाहिए, ताकि बारिश में सड़क न धंसे। लेकिन देवरी में ठेकेदार द्वारा खुलेआम खेतों की साधारण मिट्टी डाली जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह 'मिट्टी का खेल' सिर्फ पहली बारिश तक टिकेगा, जिसके बाद मिट्टी बह जाएगी और सड़क धंसना तय है। करोड़ों की लागत वाली इस सड़क में घटिया मटेरियल का यह खुला खेल न केवल भ्रष्टाचार है, बल्कि भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को सीधा न्योता भी है।


RTI के खुलासे से हड़कंप: कागजों में सात पुल, जमीन पर मिले सिर्फ तीन
इस पूरे मामले का खुलासा आरटीआई से मिले दस्तावेजों के बाद हुआ है। दस्तावेजों के मुताबिक, इस 3.05 किमी की सड़क पर कुल 7 सादा पुलों (Culverts) का निर्माण दर्शाया गया है, लेकिन जब मौके पर जांच की गई तो केवल 3 ही पुल मिले। बाकी के 4 पुलों की राशि का गबन कर लिया गया है। शिकायतकर्ता आदित्य सिंह परिहार ने आरटीआई के दस्तावेजों के साथ जिलाधीश को शिकायत सौंपकर बताया है कि 286.48 लाख रुपए के इस प्रोजेक्ट में गुणवत्ता और मात्रा, दोनों के साथ खिलवाड़ किया गया है।

अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल: क्या कलेक्ट्रेट घेराव के बाद जागेगा प्रशासन?
हैरानी की बात यह है कि जिला मुख्यालय के इतने करीब होने के बावजूद आज तक किसी जिम्मेदार अधिकारी या इंजीनियर ने निर्माण की गुणवत्ता जांचने की जहमत नहीं उठाई। विभाग की इस रहस्यमयी चुप्पी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही घटिया निर्माण को रोककर मानक स्तर पर सड़क को पूरा नहीं किया गया, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव कर उग्र प्रदर्शन करेंगे।