नन्हे हाथों ने कैनवास पर उकेरा ‘विकसित भारत’ का सपना

नन्हे हाथों ने कैनवास पर उकेरा ‘विकसित भारत’ का सपना

खैरागढ़. नागरिक एकता मंच के तत्वावधान में ‘विकसित भारत–2047’ और ‘नई शिक्षा नीति’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर की चित्रकला प्रतियोगिता में लगभग 370 बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता से भविष्य के भारत की झलक पेश की। बच्चों ने रंगों के माध्यम से आत्मनिर्भर, आधुनिक और शिक्षित भारत का चित्र उकेरा, जिसमें कहीं बुलेट ट्रेन, सौर ऊर्जा से चलने वाले शहर तो कहीं डिजिटल शिक्षा से जुड़े सपनों को दर्शाया गया। खास तौर पर नई शिक्षा नीति पर आधारित चित्रों में ‘बस्ते के बोझ से मुक्ति’ और ‘कौशल आधारित शिक्षा’ की अवधारणा प्रमुख रूप से उभरी, जहां रोबोटिक्स, कोडिंग और तकनीक से जुड़ी पढ़ाई को भविष्य की दिशा बताया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भागवत शरण सिंह, समाजसेवी एवं सांसद प्रतिनिधि ने बच्चों की कलात्मक अभिव्यक्ति की सराहना करते हुए कहा कि “इन चित्रों में दिखाई देने वाला भारत ही आने वाले समय की सच्चाई है, और नई शिक्षा नीति इन्हीं नन्हे वैज्ञानिकों और कलाकारों को सही दिशा देगी।” वहीं नगर पालिका परिषद खैरागढ़ की अध्यक्ष श्रीमती गिरजा चंद्राकर ने कहा कि बच्चों को ऐसा मंच मिलना, जहां वे राष्ट्र और शिक्षा के सपनों को चित्रों में ढाल सकें, बेहद प्रेरक अनुभव है। कार्यक्रम के संयोजक किशोर शर्मा ने बताया कि नागरिक एकता मंच द्वारा यह बारहवां निःशुल्क आयोजन है, जिसका उद्देश्य बच्चों को कला के माध्यम से सृजन और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है।

प्रतियोगिता में बच्चों की तुलिकाओं ने केवल रंग नहीं भरे, बल्कि देश की प्रगति का रोडमैप रचा—कहीं स्मार्ट क्लासरूम, कहीं ग्रीन एनर्जी, कहीं डिजिटल इंडिया और कहीं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा आधुनिक भारत उभरकर सामने आया। चार आयु वर्गों में आयोजित इस प्रतियोगिता में रचनात्मकता, विषय की स्पष्टता और रंग संयोजन के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया और सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया। इस अवसर पर शिक्षक, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे, जिन्होंने बच्चों की कल्पनाओं में बसते विकसित भारत को साकार होते देखा।