बहुप्रतीक्षित टिकरापुल को मिली प्रशासनिक स्वीकृति 6.86 करोड़ की लागत से बनेगा उच्चस्तरीय पुल,

27 मांग पत्रों के बाद मिली सफलता
खैरागढ़. नवगठित जिला खैरागढ़–छुईखदान–गंडई के लिए वर्षों से प्रतीक्षित टिकरापुल (मोती नाला पर उच्चस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग) के निर्माण को आखिरकार प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग द्वारा 12 दिसंबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए ₹686.56 लाख (6 करोड़ 86 लाख 56 हजार रुपये) की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पुल खैरागढ़ कलेक्ट्रेट के समीप ग्राम अकरजन मार्ग पर बनेगा, जिससे शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
27 मांग पत्रों के बाद मिला परिणाम
इस स्वीकृति के पीछे पूर्व पार्षद प्रीति चंद्रशेखर यादव का सतत प्रयास अहम माना जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस शासन काल से लेकर वर्तमान सरकार तक अलग-अलग मंत्रियों एवं शासन-प्रशासन को कुल 27 मांग पत्र और निवेदन पत्र सौंपे। स्वीकृति की सूचना मिलते ही उन्होंने शासन के प्रति आभार व्यक्त किया और क्षेत्रवासियों के साथ खुशी जाहिर की। इस पूरे प्रयास में उनके पति चंद्रशेखर यादव और साहू समाज के जिला अध्यक्ष टीलेश्वर साहू की सक्रिय भूमिका भी उल्लेखनीय रही।
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय सहयोग से मिली मजबूती
पुल निर्माण की इस मांग को पूरा कराने में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग निर्णायक रहा। इस क्रम में संतोष पांडे, यशोदा वर्मा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्कांत सिंह सहित अनेक स्थानीय नागरिकों ने शासन स्तर पर लगातार समन्वय कर विषय को आगे बढ़ाया। परिणामस्वरूप वर्ष 2025-26 के बजट में इस कार्य को शामिल करते हुए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।
बजट, योजना और तकनीकी शर्तें
यह कार्य जवाहर सेतु योजना (नाबार्ड पोषित) के अंतर्गत स्वीकृत हुआ है। शासन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निविदा आमंत्रण से पहले सक्षम अधिकारी से तकनीकी स्वीकृति, ड्राइंग-डिजाइन की मंजूरी और न्यूनतम 90 प्रतिशत बाधा-रहित भूमि की उपलब्धता अनिवार्य होगी। यदि भू-अर्जन आवश्यक हुआ तो वह स्वीकृत राशि की सीमा में और विधिवत प्रक्रिया से ही किया जाएगा। निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गुणवत्ता, समयसीमा और वित्तीय अनुशासन पर जोर
शासन ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता, मितव्ययिता और समयसीमा के कड़े निर्देश जारी किए हैं। निर्धारित सीमा से अधिक व्यय, कार्य मात्रा में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि या अतिरिक्त दायित्व की स्थिति में पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। सामग्री और कार्य की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर उत्तरदायित्व तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अनुबंध अनुसार समय पर कार्य पूर्ण न होने की स्थिति में अर्थदंड सहित समयवृद्धि के प्रावधान लागू होंगे।
क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई गति
स्थानीय लोगों के अनुसार मोती नाला पर उच्चस्तरीय पुल के निर्माण से बारिश के मौसम में होने वाली आवागमन की परेशानी समाप्त होगी, कलेक्ट्रेट और शहर के बीच संपर्क सुगम होगा तथा व्यापार, शिक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिली यह स्वीकृति खैरागढ़ क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।



