2 साल से बंद पड़ी योजना की राशि को सरपंच ने कर दिया खर्च जिला पंचायत में हुई शिकायत

2 साल से बंद पड़ी योजना की राशि को सरपंच ने कर दिया खर्च जिला पंचायत में हुई शिकायत

खैरागढ़. जनपद पंचायत छुईखदान अतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पद्मावतीपुर में गौठान योजना की राशि के आहरण को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले में शिकायतकर्ता अखिलेश जंघेल ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में गौठान खाते से लगभग एक लाख रुपये के आहरण को नियमों के विपरीत बताया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि गौठान योजना तत्कालीन कांग्रेस सरकार की योजना थी, जिसे सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने बंद कर दिया है। इसके बावजूद बंद हो चुकी योजना के खाते से 100000 रुपए खर्च कर दिया गया है, जबकि यह राशि केवल गोबर खरीदी के लिए आरक्षित थी। अखिलेश जंघेल के अनुसार न तो इस संबंध में विधिवत पंचायत प्रस्ताव पारित हुआ और न ही अधिकांश पंचों व उपसरपंच को इसकी पूर्व जानकारी दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में सरपंच-सचिव द्वारा बिना जानकारी दिए प्रस्ताव तैयार कर हस्ताक्षर कॉलम में सर्व लिखकर उन्हें पारित कर दिया जाता है।

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि आहरित राशि को वापस पंचायत खाते में जमा कराया जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित सरपंच के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की जाए। मामले को लेकर ग्रामीण स्तर पर भी चर्चा तेज है और लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, सरपंच भारत राम साहू ने आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि गौठान खाते से 87 से 98 हजार रुपये तक का भुगतान हुआ है, लेकिन इसे फर्जी या निजी उपयोग नहीं कहा जा सकता। सरपंच के अनुसार पंचायत गठन के बाद गांव में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया था, जिसके त्वरित समाधान के लिए पानी की मोटर, पंप, मरम्मत और प्लंबरिंग जैसे कार्य कराए गए। उन्होंने बताया कि गौठान योजना के तहत पुराने गोबर खरीदी और महिला समूहों के कुछ लंबित भुगतान भी इसी राशि से किए गए हैं।

सरपंच का दावा है कि राशि उपयोग की जानकारी पंचायत बैठक में दी गई थी, प्रस्ताव और बिल पंचायत में उपलब्ध हैं तथा यदि भविष्य में किसी प्रकार की आपत्ति या रिकवरी आती है तो उसका समायोजन 15वें वित्त आयोग की राशि से कर दिया जाएगा। फिलहाल मामला जिला पंचायत स्तर पर विचाराधीन है और जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी