आमदनी समिति में ऐसी पड़ी धूप कि 56 लाख रुपये का धान सूख गया!
आमदनी सोसायटी में 2390 क्विंटल सूखत बना चर्चा का विषय, आंकड़ों ने बढ़ाई हलचल
खैरागढ़. जिले में धान खरीदी सीजन समाप्त होने के बाद आमदनी सेवा सहकारी समिति में सामने आया सूखत का आंकड़ा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। अंतिम उठाव के बाद समिति में 2390.39 क्विंटल धान सूखत दर्ज किया गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आधार पर इसकी कीमत 56 लाख रुपये से अधिक बैठती है।
जानकारी के अनुसार आमदनी उपार्जन केंद्र में खरीफ विपणन वर्ष के दौरान कुल 1,00,966.80 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। शासन के निर्देशानुसार किसानों से 40 किलो प्रति बारदाना के हिसाब से धान लिया जाता है। इस आधार पर समिति में लगभग 2 लाख 52 हजार 417 बारदानों का उपयोग हुआ।

समिति प्रबंधन का कहना है कि अंतिम उठाव 7 मई को पूरा हुआ। वहीं विभागीय सूत्रों के अनुसार खरीदी अवधि के दौरान ही लगभग 30 प्रतिशत धान का उठाव हो चुका था। इसके बाद मार्च में लगभग 30 प्रतिशत तथा अप्रैल में 38 प्रतिशत से अधिक धान का उठाव कर लिया गया था। अन्य वर्षों की तुलना में इस बार उठाव की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज रही, लेकिन इसके बावजूद सूखत का आंकड़ा अधिक दर्ज होना चर्चा का कारण बन गया है।
बारदाना वार गणना ने बढ़ाई चर्चा
रिकॉर्ड के अनुसार 2390.39 क्विंटल सूखत को यादि उपयोग किए गए 252417 बारदानों के अनुपात में देखा जाए तो प्रति बारदाना लगभग 950 ग्राम की कमी सामने आती है। गणितीय रूप से यह आंकड़ा एक क्विंटल धान पर लगभग 2.375 किलो सूखत के बराबर बैठता है।
धान खरीदी और भंडारण से जुड़े जानकारों के बीच इसी गणना को लेकर चर्चा हो रही है। कई लोग इसे सामान्य सूखत की तुलना में अधिक मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि लंबे समय तक भंडारण और मौसम का प्रभाव भी वजन में कमी का कारण बन सकता है।

ट्रकवार आंकड़ों ने भी खींचा ध्यान
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार आमदनी समिति से धान का परिवहन मिलरों और संग्रहण केंद्रों तक लगभग 350 ट्रकों के माध्यम से किया गया। यदि कुल दर्ज सूखत 2390.39 क्विंटल को ट्रकों की संख्या से विभाजित किया जाए तो औसतन प्रति ट्रक लगभग 6.83 क्विंटल धान की कमी दर्ज होती है।
इसी गणना के आधार पर स्थानीय स्तर पर विभिन्न तरह की चर्चाएं चल रही हैं। धान के परिवहन, भंडारण अवधि और अंतिम मिलान के आंकड़ों को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी हुई है।
अन्य समितियों के आंकड़े भी चर्चा में
जिले की कुछ अन्य समितियों के आंकड़े भी तुलना का विषय बने हुए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार धोधा, बरबसपुर, सिलपट्टी, ठेलेकाडीह, मानिकचौरी तथा भोरमपुर कला जैसे उपार्जन केंद्रों में शून्य सूखत दर्ज किया गया है। वहीं विचारपुर, भुलाटोला जैसे बड़े समितियों में प्रति बारदाना औसतन लगभग 195 ग्राम तक ही सूखत दर्ज हुई है।
इसी वजह से आमदनी समिति का आंकड़ा अन्य समितियों की तुलना में अधिक चर्चा में बना हुआ है। जिले में धान खरीदी के अंतिम मिलान के बाद सामने आए ये आंकड़े सहकारी समितियों में सूखत की प्रकृति, भंडारण व्यवस्था और उठाव प्रक्रिया को लेकर बहस का विषय बने हुए हैं।
जिले में पहले से चर्चा में है शॉर्टेज का मामला
गौरतलब है कि जिले के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों में अंतिम उठाव के बाद 36000 क्विंटल से अधिक धान का अंतर सामने आया है। इनमें आमदनी समिति का सूखत आंकड़ा सबसे अधिक होने के कारण यह मामला विशेष रूप से सुर्खियों में बना हुआ है। धान खरीदी से जुड़े कर्मचारी, किसान और स्थानीय लोग अब सूखत के इन आंकड़ों की अपने-अपने स्तर पर व्याख्या कर रहे हैं।
उठाव विलंब होने के कारण आया सुखत - प्रबंधक विनय सिन्हा
आमदनी समिति के प्रभारी प्रबंधक विनय सिन्हा ने बताया कि समिति में कुल 1,00,966.80 क्विंटल धान की खरीदी हुई थी, जबकि समिति की भंडारण क्षमता मात्र 35 हजार क्विंटल है। उन्होंने कहा कि धान का उठाव काफी विलंब से हुआ और समिति का डीओ 21 मार्च को जारी हुआ, जिसके बाद उठाव की प्रक्रिया शुरू हो सकी। अंतिम उठाव 7 मई को पूरा हुआ। उनके अनुसार मार्च माह तक करीब 60 हजार क्विंटल धान केंद्र में रखा हुआ था। समिति परिसर में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण किसानों की निजी जमीन किराये पर लेकर भी धान का भंडारण करना पड़ा। प्रबंधक का कहना है कि समिति में लगभग 26 हजार क्विंटल पतला धान खरीदा गया था, जिसमें सामान्य तौर पर सूखत अधिक आती है। उन्होंने कहा कि धान का वजन संग्रहण केंद्रों और मिलरों के यहां धर्मकांटे में हुआ है तथा दर्ज सूखत उठाव में देरी, लंबे समय तक भंडारण और धान की प्रकृति का परिणाम है। उनके अनुसार सूखत से होने वाली हानि का भार शासन नहीं उठाता, बल्कि इसकी भरपाई समिति को अपने कमीशन से करनी पड़ती है।
मै स्वयं आश्चर्य में हूं - अध्यक्ष
समिति अध्यक्ष निमेश सिंह ने कहा कि सूखत का जो आंकड़ा सामने आया है, उसे लेकर वे स्वयं भी आश्चर्य में हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने भी संबंधित कर्मचारियों और प्रभारी से इस संबंध में जानकारी मांगी है। अध्यक्ष के अनुसार सूखत की वास्तविक स्थिति और इसके कारणों की विस्तृत जानकारी समिति के प्रभारी और संचालन से जुड़े कर्मचारी ही बेहतर ढंग से बता सकते हैं।



