पंडरिया में सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा
00 15 पंचों और सरपंच की मौजूदगी में हुई वोटिंग, अंतिम समय में बदले समीकरण
खैरागढ़. जनपद पंचायत छुईखदान अंतर्गत ग्राम पंचायत पंडरिया में सरपंच जानकी जंघेल के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव आखिरकार गिर गया। शुक्रवार 5 जून को आयोजित विशेष बैठक में मतदान के बाद सरपंच अपने पद पर बरकरार रहीं। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पिछले एक माह से पंचायत की राजनीति गरमाई हुई थी और पूरे क्षेत्र की निगाहें मतदान के परिणाम पर टिकी थीं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत के कई पंचों ने सरपंच के खिलाफ बैठक नहीं बुलाने, पंचों को विश्वास में नहीं लेने तथा शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही जैसे आरोप लगाते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव की सूचना प्रस्तुत की थी। प्रारंभिक आवेदन में तकनीकी त्रुटियां पाए जाने के बाद उसे निरस्त कर नया आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद हस्ताक्षर सत्यापन और वैधानिक परीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर मतदान की तिथि निर्धारित की गई।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार ग्राम में श्री सीमेंट परियोजना के लिए भूमि विक्रय को लेकर कुछ ग्रामीणों में असंतोष था। बताया जाता है कि इसी नाराजगी के चलते कई पंच अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में आए थे। हालांकि मतदान के पहले पंचायत की राजनीति में अचानक समीकरण बदल गए। सूत्रों का दावा है कि जिन पंचों ने प्रारंभ में सरपंच के खिलाफ आरोप लगाए थे, उनमें से कुछ बाद में अपने रुख से पीछे हट गए और मतदान के दौरान सरपंच के पक्ष में खड़े हो गए।
बताया जाता है कि बैठक में कुल 15 पंचों और सरपंच सहित 16 सदस्यों की उपस्थिति रही। मतदान में सरपंच पक्ष को 7 वोट मिले, जबकि विपक्ष को 9 वोट प्राप्त हुए। इसके बावजूद अविश्वास प्रस्ताव आवश्यक वैधानिक बहुमत प्राप्त नहीं कर सका, जिसके कारण प्रस्ताव स्वतः निरस्त हो गया और सरपंच जानकी जंघेल अपने पद पर बनी रहीं।
अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के बाद सरपंच समर्थकों ने इसे विकास और विश्वास की जीत बताया है, जबकि विरोधी पक्ष परिणाम की समीक्षा करने की बात कह रहा है। पंचायत में हुए इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मतदान से पहले जो तस्वीर दिखाई दे रही थी, अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए।
जीतने के बाद सरपंच जानकी ने कहा कि अविश्वास हार गया, विश्वास जीत गया। ईश्वर के अटूट कृपा समर्थन और विश्वास के लिए हृदय से धन्यवाद। यह विजय सत्य, सेवा और विकास की विजय है।बिना किसी ठोस कारण के लगाए गए अविश्वास प्रस्ताव को नकार दिया और पुनः विश्वास जताते हुए सरपंच पद पर विजय प्राप्त हुई



