ट्रांसफर आदेश के 100 दिन बाद भी रिलीव नहीं: खैरागढ़ नगर पालिका में शासन निर्देशों की अनदेखी
रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा
खैरागढ़. शासन के स्पष्ट और कड़े निर्देशों के बावजूद नगर पालिका खैरागढ़ में स्थानांतरण आदेशों का पालन खुलेआम सवालों के घेरे में है। सितंबर 2025 में जारी आदेश के तहत नगर पालिका खैरागढ़ में पदस्थ दो उप अभियंताओं—शाहबाज अहमद और दीपाली तम्बोली—का स्थानांतरण क्रमशः नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा और नगर पालिका परिषद डोंगरगढ़ किया गया था। आदेश में 15 दिवस के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश थे, लेकिन 100 दिन बीत जाने के बाद भी एक अभियंता को रिलीव नहीं किया जाना प्रशासनिक मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
एक को रिलीफ, दूसरे को संरक्षण देने का आरोप
जहां दीपाली तम्बोली को 16 जनवरी की शाम रिलीव कर दिया गया और उन्होंने डोंगरगढ़ में ज्वाइनिंग भी कर ली, वहीं शाहबाज अहमद आज तक नगर पालिका खैरागढ़ से कार्यमुक्त नहीं किए गए। जबकि दोनों के स्थानांतरण आदेश एक ही समय पर जारी हुए थे। इस असमान और चयनात्मक कार्रवाई ने नगर पालिका प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शासन का सख्त आदेश: समय पर ज्वाइनिंग अनिवार्य
मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि 07 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने सख्त आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि स्थानांतरण के बाद अधिकारी-कर्मचारी अनिवार्य रूप से नवीन पदस्थापना स्थल पर ज्वाइन करें। आदेश में चेतावनी दी गई थी कि तय समय-सीमा में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर पुराने पदस्थापना स्थल से वेतन आहरित नहीं होगा और जिम्मेदार नियंत्रण अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ज्वाइनिंग नहीं करने पर निलंबन तक का प्रावधान
शासनादेश के अनुसार यदि स्थानांतरित अधिकारी 7 दिवस के भीतर ज्वाइन नहीं करता, तो उसके विरुद्ध निलंबन, ब्रेक-इन-सर्विस और अनधिकृत अनुपस्थिति जैसी कठोर कार्रवाई की जा सकती है। सात दिनों से अधिक अवकाश लेने पर मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य है, अन्यथा अवधि को ‘डाईज-नॉन’ घोषित किया जा सकता है। इसके बावजूद नगर पालिका स्तर पर नियमों की अनदेखी चौंकाने वाली है।
वेतन भुगतान पर भी सख्ती, जिम्मेदारी तय
वेतन भुगतान को लेकर भी शासन का रुख स्पष्ट और सख्त है। स्थानांतरित अधिकारी यदि निर्धारित अवधि में ज्वाइन नहीं करता, तो उसका वेतन पुराने पदस्थापना स्थल से नहीं दिया जा सकता। यदि इसके बावजूद भुगतान किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के साथ-साथ वेतन आहरण करने वाले आहरण-संवितरण अधिकारी पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बाद भी 100 दिनों तक स्थिति जस की तस बनी रहना कई सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक संरक्षण का आरोप, ‘ऊपर तक पहुंच’ की चर्चा
सूत्रों का दावा है कि पूरे मामले के पीछे राजनीतिक संरक्षण भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। नगर पालिका से जुड़े जानकारों के अनुसार रिलीव को जानबूझकर लटकाए रखने के पीछे “ऊपर तक पहुंच” और दबाव की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। यही वजह बताई जा रही है कि शासन के स्पष्ट और लिखित निर्देशों के बावजूद एक अभियंता को 100 दिन बाद भी रिलीव नहीं किया गया।
ऊपर से निर्देश मिलने के बाद किया जाएगा रिलीव
केसीजी नवदर्पण पत्रकार से बातचीत में नगर पालिका के प्रभारी अधिकारी ने स्वीकार किया कि दोनों इंजीनियरों का स्थानांतरण पहले ही हो चुका था, लेकिन जिस इंजीनियर को खैरागढ़ आना था, उसने समय पर ज्वाइन नहीं किया, इसलिए दूसरे इंजीनियर को रिलीव नहीं किया गया। अधिकारी ने यह भी कहा कि अब संबंधित इंजीनियर ने ज्वाइन कर लिया है और ऊपर से निर्देश मिलने के बाद दूसरे को रिलीव कर दिया जाएगा।



