गलती सिस्टम की, खामियाज़ा गरीब का: तिहारू के नाम स्वीकृत आवास की किश्त दूसरे के खाते में

गलती सिस्टम की, खामियाज़ा गरीब का: तिहारू के नाम स्वीकृत आवास की किश्त दूसरे के खाते में

रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा 

खैरागढ़. जिले के छुईखदान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अतरिया में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के क्रियान्वयन में एक बार फिर भारी लापरवाही उजागर हुई है। तिहारू यादव पिता ननकू यादव के नाम स्वीकृत आवास की पहली किश्त 40 हजार रुपये कथित तौर पर हिरऊ यादव के खाते में पहुंच जाने का मामला सामने आने के बाद पंचायत और जनपद स्तर की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिकॉर्ड और ज़मीनी हकीकत में अंतर

आवास सॉफ्टवेयर में लाभार्थी का नाम “ hyiharu (हिरऊ) पिता ननकू” दर्ज है, जबकि गांव में वास्तविक हितग्राही तिहारू यादव पिता ननकू (उम्र 36 वर्ष) हैं। सॉफ्टवेयर में फोटो तिहारू यादव का बताया जा रहा है, लेकिन नाम की अंग्रेजी एंट्री में हुई त्रुटि ने पूरे भुगतान तंत्र को भ्रमित कर दिया।

स्वीकृति और भुगतान का विवरण

प्रशासनिक स्वीकृति क्रमांक सीएच04006/4/4762 के तहत 12 नवंबर 2025 को पीएमएवाई-जी में 1.20 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई। 22 दिसम्बर 2025 को प्रथम किश्त 40 हजार रुपये आधार आधारित डीबीटी के माध्यम से जारी हुई। बैंक विवरण में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक का सत्यापित खाता दर्शाया गया है, लेकिन तिहारू यादव का कहना है कि उनके खाते में राशि नहीं पहुंची।

कच्चे मकान में रह रहा हितग्राही, टूट रहा सपना

तिहारू यादव आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं। उन्हें उम्मीद थी कि आवास स्वीकृत होने के बाद बारिश से पहले पक्का मकान बन जाएगा और सीलन व टपकती छत से राहत मिलेगी। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते उनका पक्का घर का सपना अधर में लटक गया है।

हिरऊ के खाते में पैसा, निर्माण शुरू

हिराऊ यादव के नाती सुंदर यादव ने बातचीत में स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम किश्त उनके दादा के खाते में आई है, जिसके बाद परिवार ने घर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। सुंदर यादव ने बताया कि रोजगार सहायक और आवास मित्र द्वारा दस्तावेज, आधार कार्ड, फोटो और बैंक खाते की जानकारी ली गई थी, उसी के बाद राशि खाते में डाली गई। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि आवास किसी अन्य हितग्राही के नाम से स्वीकृत है। सुंदर के अनुसार, जब पैसा खाते में आया और निर्माण शुरू करने को कहा गया तो उन्होंने पुराना घर तोड़कर काम चालू कर दिया। अब यदि यह राशि किसी अन्य हितग्राही की बताई जा रही है तो बीच में पैसा वापस करने की स्थिति कैसे बनेगी, यह समझ से परे है। कुछ हुआ, वह पंचायत स्तर से मिले निर्देशों के आधार पर किया गया।

आधार आधारित भुगतान पर सवाल

यदि आधार तिहारू यादव का था, तो भुगतान हिरऊ यादव के खाते में कैसे हुआ? क्या गलत खाते की सीडिंग की गई या फिर सॉफ्टवेयर में बैंक विवरण ही गलत दर्ज किया गया? यह मामला आधार आधारित भुगतान प्रणाली की निगरानी पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।

पहले भी हो चुकी है गलती, जिम्मेदार कौन?

अतरिया पंचायत में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कांति पति धनेश के खाते में आवास की राशि डाल दी गई थी, जबकि वास्तविक हितग्राही कांति पति रामलखन थीं। उस समय भी सॉफ्टवेयर में नाम की गलती और पंचायत स्तर पर सही सत्यापन न होने के कारण भुगतान गलत खाते में चला गया था। बाद में पंचायत प्रस्ताव, सचिव की संस्तुति और जनपद हस्तक्षेप के बाद राशि वापस लेकर सही हितग्राही के खाते में डाली गई। उस प्रकरण के बाद रोजगार सहायक और आवास मित्र को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नाम, पिता/पति का नाम और बैंक विवरण का भौतिक सत्यापन किए बिना आगे कोई भुगतान न हो, लेकिन इसके बावजूद वही लापरवाही दोबारा सामने आई है।

ऑनलाइन एंट्री में भारी गलतियां- आवास मित्र 

आवास मित्र चेतना जंघेल ने बातचीत में बताया कि अतरिया पंचायत के आवास सॉफ्टवेयर में नामों की गड़बड़ी पूर्व में की गई ऑनलाइन एंट्री का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आठ वर्ष पहले जब किसी दूसरे आवास मित्र के द्वारा ऑनलाइन कार्य किया गया था, उस समय टाइपिंग सही न होने के कारण अंग्रेजी नामों में भारी त्रुटियां रह गईं, जो अब सामने आ रही हैं। चेतना के अनुसार सॉफ्टवेयर में दर्ज नाम के आधार पर ही उन्होंने और रोजगार सहायक ने संबंधित व्यक्ति से संपर्क किया और दस्तावेज मंगवाए, क्योंकि रिकॉर्ड में हितग्राही के रूप में हिरऊ का नाम दर्ज दिख रहा था। उन्होंने कहा कि रोजगार सहायक गांव की होने के कारण उससे जानकारी लेकर प्रक्रिया पूरी की गई और उसी आधार पर कार्रवाई हुई। चेतना ने यह भी कहा कि न तो जानबूझकर किसी के साथ अन्याय किया गया और न ही किसी प्रकार की हेराफेरी की मंशा थी, बल्कि यह पूरी स्थिति नाम अनमैच और पुरानी ऑनलाइन एंट्री की त्रुटि के कारण उत्पन्न हुई।

हिराऊ यादव को आवास निर्माण करने करने निर्देश नहीं दिया - रोजगार सहायक 

रोजगार सहायक महेश्वरी यादव ने बातचीत में कहा कि तिहारू पिता ननकू के आवास प्रकरण में मूल समस्या नाम की गड़बड़ी (नेम कंफ्यूजन) से जुड़ी है। उनके अनुसार सॉफ्टवेयर में “हिरऊ पिता ननकू” नाम दर्ज होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी, जिससे रजिस्ट्रेशन गलत नाम से हो गया। उन्होंने बताया कि सुंदर के दादा हिरऊ यादव को आवास निर्माण शुरू करने के निर्देश नहीं दिए हैं। कांति वाले पुराने मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस प्रकरण में गलती सुधार कर वास्तविक हितग्राही के खाते में राशि स्थानांतरित कर दी गई थी। महेश्वरी यादव के अनुसार आवास योजना में भुगतान आधार और बैंक खाते दोनों के माध्यम से होता है, और वर्तमान मामले में सभी तथ्यों की जांच जनपद स्तर पर की जा रही है, जिसके बाद वास्तविक हितग्राही को उसका अधिकार दिलाया जाएगा।

ग्रामीणों में आक्रोश

ग्रामीणों का कहना है कि आवास सॉफ्टवेयर में इतनी त्रुटियां हैं कि पढ़कर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आवास किसे मिला है। बार-बार एक ही तरह की गलती होना यह संकेत देता है कि जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा न तो सीख ली जा रही है और न ही सुधार किया जा रहा है।

प्रशासन का आश्वासन

जिला समन्वयक राजेश साहू ने कहा कि आवास की राशि आधार पेमेंट सिस्टम से जारी होती है। यदि तकनीकी त्रुटि के कारण भुगतान किसी अन्य खाते में गया है, तो सुधार कर राशि वास्तविक हितग्राही तिहारू यादव को दिलाई जाएगी।