निर्माणाधीन मार्ग बना लोगों के लिए सजा, धूल नियंत्रण में विभाग पूरी तरह फेल
खैरागढ़ .खैरागढ़- राजनांदगांव मुख्य मार्ग पर जारी सड़क निर्माण कार्य आम जनता के लिए भारी मुसीबत बन गया है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस सड़क पर उड़ती धूल ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है। हालात यह हैं कि इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर, सड़क किनारे रहने वाले ग्रामीण और दुकानदार सभी गंभीर परेशानी झेलने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार लोक निर्माण विभाग हालात को सामान्य बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता नजर आ रहा है।
अस्थायी बाईपास और गिट्टी ने बढ़ाई परेशानी
निर्माण के लिए कई स्थानों पर सड़क की खुदाई की गई है। खुदाई के किनारे मुरूम और जीरा गिट्टी डालकर अस्थायी बाईपास तैयार किया गया है। वहीं मुख्य सड़क पर भी जीएसबी (GSB) जीरा गिट्टी डाली गई है। इन सामग्रियों के कारण पूरे मार्ग पर धूल का गुबार बना रहता है, जिससे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों का चलना दूभर हो गया है।
पानी छिड़काव सिर्फ कागजों में, जमीनी हकीकत कुछ और
विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव कराया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। ग्रामीणों के अनुसार 5 किलोमीटर लंबे हिस्से में दिनभर में सिर्फ एक टैंकर पानी डाला जाता है, वह भी औपचारिकता निभाने के लिए। नतीजा यह है कि पानी सूखते ही धूल फिर उड़ने लगती है और दिनभर हालात बद से बदतर बने रहते हैं।
राहगीरों की मजबूरी: रोज बदलने पड़ते हैं कपड़े
ठेलकाडीह निवासी पियूष ने बताया कि वे रोज सुबह करीब 9 बजे घर से निकलते हैं और लगभग 14 किलोमीटर का सफर तय कर कार्यस्थल पहुंचते हैं। लेकिन सड़क पर उड़ती धूल के कारण पहुंचते-पहुंचते उनकी शर्ट पूरी तरह लाल हो जाती है और उन्हें मजबूरी में कपड़े बदलने पड़ते हैं। उनका कहना है कि यह समस्या रोज की हो गई है।
सड़क किनारे बसे घरों में घुस रही धूल, स्वास्थ्य पर खतरा
सहसपुर दल्ली निवासी देवदास, जिनका घर सड़क किनारे स्थित है, बताते हैं कि पानी नहीं डाले जाने के कारण धूल सीधे घर के अंदर घुस रही है। घर में रहना मुश्किल हो गया है। सांस लेने में तकलीफ, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
दुकानदारों का कारोबार प्रभावित
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि धूल के कारण दुकानों में रखा सामान खराब हो रहा है। पूरे दिन धूल उड़ती रहती है, जिससे ग्राहक भी दुकान में रुकने से कतराने लगे हैं। इससे रोज़गार पर भी असर पड़ रहा है।
पुल निर्माण पर भी सवाल, लेकिन विभाग का बचाव

निर्माणाधीन पुल में 8 मिमी और 10 मिमी रॉड के उपयोग को लेकर लोगों में आशंका है। भारी वाहनों की आवाजाही वाले इस मार्ग पर इतने पतले रॉड से बने पुल की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारी का कहना है कि पुल का निर्माण स्वीकृत एस्टीमेट और डिजाइन के अनुसार किया जा रहा है और स्लैब व रेनफोर्समेंट के कारण भार वहन करने में कोई समस्या नहीं होगी।
नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जा रहा है - तिवारी
लोक निर्माण विभाग की इंजीनियर स्मारिका तिवारी ने बताया कि सड़क व पुल का कार्य स्वीकृत एस्टीमेट और डिजाइन के अनुसार किया जा रहा है। पुल में उपयोग हो रहे 8 व 10 मिमी रॉड तकनीकी मानकों के अनुरूप हैं और संरचना भारी वाहनों का भार सहन करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि जीएसबी व एमओ लेयर के कारण फिलहाल धूल अधिक है, जिस पर नियमित पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। पेड़ों की कटाई की अनुमति लंबित होने से कुछ हिस्सों में कार्य प्रभावित है, अनुमति मिलते ही काम तेज होगा। यह परियोजना 18 माह में पूरी की जानी है।



