विकसित भारत–जी राम जी : 100 दिन का रिकॉर्ड फेल, 125 दिन का नया दावा

विकसित भारत–जी राम जी : 100 दिन का रिकॉर्ड फेल, 125 दिन का नया दावा
रिकॉर्ड में स्पष्ट दिख रहा कि 100 दिवस काम देने में फेल रहा सरकार

रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा 

खैरागढ़ प्रेसवार्ता में ‘विकसित भारत–जी राम जी’ पर सवालों की बौछार

खैरागढ़. भाजपा कार्यालय में गुरुवार आयोजित प्रेसवार्ता में जिले के प्रभारी मंत्री एवं राज्य के आबकारी व श्रम विभाग मंत्री लखन लाल देवांगन ने ‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक–2025’ के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार देने का बड़ा दावा किया। मंत्री ने इसे मनरेगा से आगे की योजना बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, पलायन रुकेगा और मजदूरों को आय की सुरक्षा मिलेगी। हालांकि प्रेसवार्ता में उठे सवालों और सरकारी आंकड़ों ने इस दावे की जमीन पर हकीकत कुछ और ही दिखाई।

100 दिन के अधूरे वादे पर सीधा सवाल, मंत्री जवाब में दिखे असहज

पत्रकारों ने सीधा सवाल किया कि जब सरकार अब तक मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार भी अधिकांश परिवारों को नहीं दे पाई, तो 125 दिन का काम कैसे सुनिश्चित होगा। इस पर मंत्री कुछ असहज नजर आए और उन्होंने कहा कि “इस विधेयक के तहत 125 दिन का काम दिया ही जाएगा।” मंत्री ने यह भी जोड़ा कि खेती-किसानी के व्यस्त समय में 60 दिन का नो-वर्क पीरियड रहेगा और पंचायत स्तर पर यह तय किया जाएगा कि कौन-सा काम कराया जाएगा, साथ ही कानून में फर्जीवाड़ा रोकने के प्रावधान भी किए गए हैं।

सरकारी रिकॉर्ड बनाम सरकारी बयान: आंकड़े बता रहे अलग कहानी

लेकिन केसीजी जिले के सरकारी रिकॉर्ड मंत्री के दावों के बिल्कुल उलट तस्वीर पेश करते हैं। खैरागढ़ और छुईखदान—इन दो ही ब्लॉकों वाले जिले में वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान 76,091 कार्डधारी परिवारों में से सिर्फ 704 परिवार ही 100 दिन का काम पूरा कर पाए। इससे पहले 2024–25 में 76,409 कार्डधारी परिवारों में से केवल 4,404 और 2023–24 में 76,090 कार्डधारियों में से महज 7,136 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिल सका।

तीन साल में 15% से भी कम परिवारों को 100 दिन का काम

आंकड़े साफ बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में 15 प्रतिशत से भी कम परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिला। ऐसे में मंत्री द्वारा घोषित 60 दिन के ‘नो-वर्क पीरियड’ ने नई बहस खड़ी कर दी है। सवाल उठ रहा है कि जब बिना किसी अतिरिक्त ब्रेक के 100 दिन का काम नहीं दिया जा सका, तो खेती-किसानी के सीजन में 60 दिन का औपचारिक ब्रेक जोड़कर 125 दिन का रोजगार कैसे संभव होगा।

मंत्री का बचाव: खेती के सीजन में ब्रेक, बदले में 125 दिन का भरोसा

इस पर मंत्री का तर्क है कि पहले मनरेगा में खेती के दिनों में भी काम चलता था, जिससे किसान और मजदूर दोनों प्रभावित होते थे। अब नए कानून में खेती के प्रमुख सीजन में ब्रेक देकर मजदूरों को खेतों में काम का अवसर मिलेगा और इसके बदले कुल रोजगार दिवस बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी निर्माण कार्य बंद नहीं होंगे, केवल वही काम रोके जाएंगे जिनमें खेती के कारण मजदूरों की अनुपस्थिति रहती थी।

दावा बनाम हकीकत: नई योजना पर पुरानी नाकामी का साया

कुल मिलाकर खैरागढ़ की प्रेसवार्ता में सरकार ने 125 दिन रोजगार का भरोसा तो दिलाया, लेकिन मनरेगा के पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों ने इस भरोसे को कमजोर कर दिया। ग्रामीण मजदूरों और जानकारों के बीच यह सवाल गहराता जा रहा है कि जब पुरानी योजना में 100 दिन का वादा कागजों तक सीमित रहा, तो नई योजना का 125 दिन का दावा जमीन पर कितना उतर पाएगा।