परियोजना में लाखों की खरीदी और वितरण, सभापतियों को नहीं दी गई जानकारी
रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा
कार्यकर्ताओं ने खुद उठाया ढुलाई खर्च
खैरागढ़. महिला एवं बाल विकास विभाग एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। खैरागढ़ और छुईखदान परियोजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए स्वच्छता सामग्री एवं अन्य सामानों की लाखों रुपये की खरीदी और वितरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी खरीदी और वितरण प्रक्रिया की जानकारी विभाग से जुड़े जनपद स्तर के सभापतियों तक को नहीं दी गई। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी विभाग द्वारा नहीं बल्कि मीडिया और अन्य माध्यमों से मिली।
स्वच्छता सामग्री से लेकर प्रेशर कुकर तक, कई सामानों की हुई खरीदी

जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए निरमा, साबुन, झाड़ू, टॉयलेट क्लीनर, फर्श क्लीनर, नेलकटर, तेल, प्लास्टिक कुर्सी, गतिविधि पुस्तक, पालक कार्ड, पालक कैलेंडर, प्रेशर कुकर, ग्रीन राइटिंग बोर्ड, गिलास, स्टील कंटेनर, मेस ट्रे, थाली और अनाज कोठी सहित अन्य सामग्री खरीदी गई है। हालांकि इस खरीदी की कुल लागत कितनी है, किस फर्म या एजेंसी के माध्यम से सामग्री खरीदी गई और किस आधार पर खरीदी प्रक्रिया पूरी की गई, इसे लेकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
वितरण के दौरान सामने आया मामला, जेम पोर्टल से खरीदी की जानकारी
बताया जा रहा है कि सामग्री वितरण की जानकारी उस समय सामने आई जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परियोजना कार्यालय सामग्री लेने पहुंचे। इसके बाद विभागीय सदस्यों और जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि सामग्री की खरीदी जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई है तथा वितरण भी शुरू कर दिया गया है। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि यदि लाखों रुपये की खरीदी की गई तो संबंधित जनप्रतिनिधियों और विभागीय सभापतियों को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जेब से लगाया पैसा, खुद कराई ढुलाई

मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की परेशानी को लेकर सामने आया है। जानकारी के अनुसार परियोजना कार्यालय से सामग्री को विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाने के लिए विभाग की ओर से कोई परिवहन व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते कार्यकर्ताओं को स्वयं पैसे जुटाकर वाहन की व्यवस्था करनी पड़ी। एक कार्यकर्ता ने बताया कि उनके सेक्टर में लगभग 25 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जहां सभी ने मिलकर करीब 100-100 रुपये एकत्र किए और वाहन किराए पर लेकर सामग्री केंद्रों तक पहुंचाई। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जब खरीदी और वितरण विभागीय स्तर पर किया जा रहा था तो परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं पर क्यों छोड़ी गई।

जनपद सभापतियों ने कहा — खरीदी की नहीं दी गई कोई जानकारी
मामले को लेकर छुईखदान महिला एवं बाल विकास विभाग की जनपद सभापति ज्योति जंघेल ने कहा कि उन्हें खरीदी के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने परियोजना अधिकारी से चर्चा की, जहां उन्हें बताया गया कि खरीदी उच्च स्तर से की गई है और सामग्री वितरित की जा रही है। वहीं जनपद पंचायत खैरागढ़ की महिला एवं बाल विकास सभापति दीक्षा पुर्नचंद गुप्ता ने भी कहा कि उन्हें खरीदी की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा आज तक किसी खरीदी प्रक्रिया की जानकारी साझा नहीं की गई और केवल भर्ती संबंधी अनुमोदन की जानकारी ही दी जाती रही है।
मामला पहुंचा जनप्रतिनिधियों तक, जिला स्तर पर उठेगा मुद्दा
मामला केवल सामग्री खरीदी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है। जनप्रतिनिधियों द्वारा जनपद से जिला पंचायत स्तर पर इस मामले को उठाने और पत्राचार के माध्यम से कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।



