खैरागढ़: कलेक्ट्रेट में गूंजी छात्रों की सिसकियां; पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में बदहाली का आलम, साहब महीने में एक बार आते हैं

खैरागढ़: कलेक्ट्रेट में गूंजी छात्रों की सिसकियां; पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में बदहाली का आलम, साहब महीने में एक बार आते हैं

संवाददाता - मंदीप सिंह

खैरागढ़ | खैरागढ़ के पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के छात्रों का धैर्य मंगलवार को जवाब दे गया और वे अपनी बदहाली की दास्तां सुनाने कलेक्ट्रेट पहुंच गए। छात्रों ने प्रशासन के सामने आरोप लगाया कि वे लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं और उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि जब भी वे अपनी समस्याओं को लेकर छात्रावास अधीक्षक के पास जाते हैं, तो उन्हें समाधान के बजाय केवल कोरे आश्वासन ही मिलते हैं। जमीनी हकीकत यह है कि हाल ही में छात्रावास का बोर खराब हो जाने के कारण छात्रों को पूरे दिन पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा, लेकिन व्यवस्था दुरुस्त करने वाला कोई नहीं था।

हैरानी की बात यह है कि भविष्य बनाने आए ये छात्र अब पढ़ाई छोड़कर खुद ही प्लंबर और मैकेनिक बनने को मजबूर हैं। पाइपलाइन टूटने जैसी तकनीकी समस्याओं और अन्य मेंटेनेंस कार्यों को छात्र अपने स्तर पर ही सुधार रहे हैं क्योंकि प्रशासन की ओर से कोई सुध नहीं ली जा रही। छात्रों ने अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधीक्षक महीने में केवल एक या दो बार ही छात्रावास का रुख करते हैं और वह भी महज 10 से 20 मिनट के लिए। इस अल्प समय में वे केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी करते हैं और कलेक्ट्रेट में व्यस्त रहने का बहाना बनाकर वापस चले जाते हैं। अधीक्षक न तो छात्रों का हाल-चाल पूछते हैं और न ही उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं।

वर्तमान में छात्रावास की स्थिति यह है कि इसका पूरा संचालन रसोइए और नाइट ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति ने छात्रावास की व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्रों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि छात्रावास की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार किया जाए। उन्होंने नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति तय करने की मांग की है ताकि उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष न करना पड़े।