पशु चिकित्सा विभाग में ‘संलग्नीकरण’ का खेल: अस्पतालों में ताले, पशुपालक निजी डॉक्टरों के भरोसे
संवाददाता - मंदीप सिंह
केसीजी जिले में पशु औषधालयों की व्यवस्था चरमराई, सालों से अटैचमेंट पर जमे अफसर ले रहे मजे
खैरागढ़ | जिले के पशु चिकित्सा केंद्रों की हालत इन दिनों बद से बदतर हो चली है। जहां एक ओर सरकार दावों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पशु चिकित्सा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी 'संलग्नीकरण' के मोह में दबे हुए हैं। जिले के 21 पशु औषधालयों में से अधिकांश में ताले लटक रहे हैं, क्योंकि वहां तैनात रहने वाले सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (AVFO) फील्ड की ड्यूटी छोड़कर सालों से बड़े कार्यालयों में अटैच होकर एसी की हवा खा रहे हैं।
5 साल से एक ही जगह जमे, सरकारी आदेश भी बेअसर
सबसे चौंकाने वाला मामला देवरी पशु औषधालय का है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां की AVFO कंचन कौर राजपूत पिछले 5-6 सालों से उपसंचालक कार्यालय राजनांदगांव में संलग्न हैं। जुलाई 2025 में सरकार ने सभी संलग्नीकरण समाप्त करने के सख्त आदेश दिए थे, लेकिन राजनीतिक रसूख और विभागीय सांठगांठ के चलते ये आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए। सूत्रों की मानें तो रसूखदार कर्मचारी छुट्टी लेकर वापस लौटते ही फिर से मनचाही जगह पर अटैच हो जाते हैं।
गंडई तहसील में 'शून्य' कर्मचारी, औषधालय बने 'सफेद हाथी'
व्यवस्था की पोल इसी बात से खुलती है कि गंडई जैसी बड़ी तहसील के पशु चिकित्सालय में वर्तमान में एक भी अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं है। मुढ़ीपार और उरईडबरी को छोड़कर खैरागढ़ ब्लॉक के अन्य 12 औषधालयों में भी AVFO की तैनाती नहीं है। गंडई, साल्हेवारा और जालबांधा जैसे बड़े अस्पतालों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद भी खाली पड़े हैं।
ग्रामीणों की मांग: तत्काल हो नियुक्तियां
ग्रामीणों और पशुपालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही संलग्नीकरण समाप्त कर फील्ड पर स्टाफ की तैनाती नहीं की गई और बंद पड़े औषधालयों को सुचारू रूप से नहीं खोला गया, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। वर्तमान में पशुपालकों को अपने बीमार मवेशियों के इलाज के लिए भारी रकम खर्च कर निजी डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
अधिकारी का पक्ष:
"AVFO के संलग्नीकरण का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यदि इस संबंध में लिखित शिकायत प्राप्त होती है, तो निश्चित रूप से जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।"
— के.के. ध्रुव, अपर संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं



