दो साल से अधूरा कोहलाटोला–गड़बंजा मार्ग, गिट्टी से भरी सड़क पर चलना मुश्किल; ग्रामीण परेशान
रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा
खैरागढ़. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत कोहलाटोला से गड़बंजा तक बनने वाली 3 किमी की सड़क दो साल से अधूरी पड़ी है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों और विद्यार्थियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में स्वीकृत इस सड़क का काम ठेकेदार ने टेंडर मिलने के बाद शुरू तो कर दिया था, लेकिन जीएसबी लेयर तक काम होने के बाद ही निर्माण रुक गया। इसके बाद से सड़क अधूरी हालत में पड़ी है।
गिट्टी से भरा रास्ता, चलना हुआ मुश्किल
सड़क निर्माण के दौरान रास्ते में गिट्टी डाल दी गई थी, लेकिन आगे का काम बंद हो जाने से अब यही गिट्टी ग्रामीणों के लिए परेशानी बन गई है। इस रास्ते से गुजरने वाली गाड़ियों और साइकिल चालकों को चलने में काफी दिक्कत होती है। कई बार लोग फिसलने और गिरने का भी खतरा महसूस करते हैं।
विद्यार्थियों को रोज झेलनी पड़ रही परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग से गड़बंजा और आसपास के गांवों के बच्चे पढ़ाई करने कोहलाटोला आते हैं। लेकिन सड़क की खराब स्थिति के कारण उन्हें रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गिट्टी और धूल से भरे रास्ते में गुजरते समय बच्चों और राहगीरों को धूल का सामना करना पड़ता है, जिससे लोग परेशान हो चुके हैं।
कई बार शिकायत, फिर भी नहीं हुई सुनवाई
ग्राम पंचायत के सरपंच दीप सिंह नेताम ने बताया कि इस सड़क को लेकर कई बार विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण पूरा नहीं करना था तो काम शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था।
ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधूरा रास्ता बनाकर लोगों को मुश्किल में डाल दिया गया है। अब सड़क कब बनेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर विधायक से लेकर सांसद तक शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के समय ही नजर आते हैं, उसके बाद क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता।
अधिकारी का बयान: फंड की कमी से निरस्त हुई सड़क
इस मामले पर कार्यपालन अभियंता पी एस मिश्रा ने बताया कि कोहलाटोला–गड़बंजा सड़क वर्ष 2022-23 में स्वीकृत हुई थी, लेकिन उस समय आवश्यक फंड जारी नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि उस दौरान प्रदेश में करीब 99 से 100 सड़कों को फंड की कमी के कारण निरस्त करना पड़ा, जिनमें यह सड़क भी शामिल थी।
अधिकारी के अनुसार अब इस सड़क को फिर से प्राथमिकता सूची में रखा गया है। उन्होंने बताया कि कुल चार सड़कों को दोबारा प्राथमिकता में शामिल किया गया है और वर्तमान वित्तीय वर्ष में इन पर कार्य शुरू कराने की योजना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क पर गिट्टी डालने के बावजूद ठेकेदार को अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया है। फंड जारी नहीं होने के कारण भुगतान की प्रक्रिया नहीं हो पाई। आगे जब भी इस सड़क के लिए प्रक्रिया शुरू होगी तो नियमित निविदा प्रक्रिया के तहत नया टेंडर जारी किया जाएगा।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को आवागमन में हो रही परेशानी से राहत मिल सके



