मकर संक्रांति पर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में ध्यान संध्या, योग साधनाओं से साधकों को मिला आत्मिक अनुभव
खैरागढ़।मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में दिनांक 15 जनवरी को ध्यान संध्या का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के योग केंद्र के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा मुख्य अतिथि रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में योग प्रभारी एवं अधिष्ठाता प्रो.(डॉ.) राजन यादव तथा कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अजय कुमार पाण्डेय ने उपस्थितजनों को विभिन्न ध्यान साधनाओं का अभ्यास कराया।
ध्यान सत्र में “रसो वै सः ध्यान”, “रुद्र ध्यान” तथा त्राटक जैसी महत्वपूर्ण योग साधनाएं कराई गईं। संयोजक ने इन साधनाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रसो वै सः ध्यान से आनंद, प्रेम और आत्मबोध की अनुभूति होती है, रुद्र ध्यान से शक्ति और शुद्धि का संचार होता है, जबकि त्राटक साधना से एकाग्रता और मानसिक स्थिरता विकसित होती है। तीनों साधनाएं मिलकर साधक के सर्वांगीण विकास में सहायक हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसके माध्यम से शारीरिक और मानसिक समस्याओं से मुक्ति संभव है। उन्होंने वर्तमान जीवनशैली में योग को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं प्रो.(डॉ.) राजन यादव ने कहा कि योग से वास्तविक विश्राम और आत्मिक शांति की अनुभूति होती है तथा जीवन में सफलता के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।



