4 मई से समाधान शिविर, खर्च किस मद से होगा तय नहीं; सचिव संघ ने मांगा मार्गदर्शन

4 मई से समाधान शिविर, खर्च किस मद से होगा तय नहीं; सचिव संघ ने मांगा मार्गदर्शन

खर्च को लेकर सचिवों में असमंजस

खैरागढ़. सुशासन तिहार-2026 छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार सुशासन को जमीन पर उतारने के लिए 1 मई से 10 जून 2026 तक 'सुशासन तिहार' के तहत जन समस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला के कलेक्टर ने इसके लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी कर अधिकारियों की ड्यूटी भी लगा दी है। हालांकि, जमीनी स्तर पर इन शिविरों के आयोजन में आने वाले खर्च को लेकर सचिवों और सरपंचों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है, क्योंकि शासन की ओर से अब तक स्पष्ट वित्तीय गाइडलाइंस जारी नहीं की गई हैं।

केसीजी जिले में छुईखदान ब्लॉक के अंतर्गत 4 मई को गेरूखदान, 8 मई को आमगांव घाट, 13 मई को मानपुर पहाड़ी, 18 मई को साल्हेकला, 22 मई को खैरा नवापारा, 28 मई को बागुर और 3 जून को गोपालपुर में शिविर आयोजित होंगे। वहीं खैरागढ़ ब्लॉक में 6 मई को झिकादाह, 11 मई को भंडारपुर, 15 मई को बढ़ईटोला, 25 मई को जालबांधा, 1 जून को कुकरमुड़ा और 5 जून को अमलीडीहकला में शिविर लगाए जाएंगे। इसके अलावा खैरागढ़ नगर पालिका, गंडई नगर पंचायत और छुईखदान नगर पंचायत में भी समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे।

सेक्टर स्तर पर शिविरों का आयोजन और स्टॉल का आर्थिक बोझ

जिले में सुशासन तिहार के तहत सेक्टर वार शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें सभी सरकारी विभागों के स्टॉल लगाए जाने हैं। समस्या यह है कि जिस ग्राम पंचायत में शिविर का आयोजन हो रहा है, टेंट, बैठक व्यवस्था और स्टॉल का पूरा खर्च उसी पंचायत पर पड़ने की संभावना है। स्पष्ट निर्देशों के अभाव में यह तय नहीं हो पा रहा है कि इस खर्च का वहन कौन सी पंचायत करेगी, जिससे मेजबान पंचायतों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ना तय माना जा रहा है।

5000 रुपये के 'कलेक्शन' पर सचिवों की आपत्ति

खबर है कि विभागीय स्तर पर कुछ उच्च अधिकारियों ने प्रत्येक पंचायत से 5000 रुपये जमा कराने का मौखिक निर्णय लिया है। इस पर पंचायत सचिवों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सचिवों का कहना है कि बिना किसी लिखित और स्पष्ट आदेश के पंचायत फंड से राशि देना संभव नहीं है। उनका तर्क है कि जब तक यह स्पष्ट न हो कि किस मद से भुगतान करना है, तब तक वे अपनी जेब या पंचायत निधि से जोखिम नहीं उठा सकते।

सरपंच-सचिव विवाद और आर्थिक नुकसान का डर

सचिवों की मुख्य चिंता सरपंचों के साथ होने वाला विवाद है। जब सरपंचों से बिल पास करने को कहा जाता है, तो वे यह सवाल उठाते हैं कि "यदि कार्यक्रम दूसरी पंचायत में हुआ है, तो हमारी पंचायत से बिल क्यों लगाया जा रहा है?" इस खींचतान के कारण कई बार सचिवों को मजबूरी में अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। इससे सचिवों को न केवल मानसिक परेशानी बल्कि बड़ा आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।

पिछले शिविरों का भुगतान अब तक लंबित, बढ़ी नाराजगी

सचिवों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी है कि पूर्व में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान हुए खर्च का भुगतान अब तक कई पंचायतों को नहीं मिला है। पंचायत सचिवों का कहना है कि पिछली बार शिविर आयोजन में विभिन्न व्यवस्थाओं पर राशि खर्च की गई थी, लेकिन उसका भुगतान लंबित रहने से पंचायतों में आर्थिक दबाव बना हुआ है। ऐसे में पुराने भुगतान का निपटारा किए बिना नए शिविरों के लिए खर्च का बोझ डालना सचिवों और पंचायत प्रतिनिधियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

स्पष्ट गाइडलाइन नहीं, सचिव संघ ने शासन से मांगा मार्गदर्शन

इस पूरे मामले पर खैरागढ़ ब्लॉक सचिव संघ के ब्लॉक अध्यक्ष जोगेश्वर धनकर ने कहा कि सुशासन तिहार के आयोजन को लेकर पंचायत स्तर पर भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आयोजन खर्च किस मद से किया जाएगा, इसकी कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं होने से सचिवों, सरपंचों और आमजन के बीच भ्रम की स्थिति है। उन्होंने बताया कि पंचायत सचिव संघ ने इस संबंध में उप संचालक पंचायत, जिला केसीजी को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट वित्तीय दिशा-निर्देश और राशि आवंटन की मांग की है, जिसकी प्रतिलिपि जिला पंचायत सीईओ को भी भेजी गई है। धनकर ने कहा कि जब तक शासन या विभाग की ओर से अधिकृत मार्गदर्शन प्राप्त नहीं होता, तब तक किसी भी पंचायत से अग्रिम राशि लेने या भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

इसी मुद्दे पर जिला सचिव संघ केसीजी के जिला सचिव धर्मेंद्र कुमार ध्रुव ने बताया कि जिला सचिव संघ द्वारा भी उपसंचालक को ज्ञापन देकर खर्च करने का स्पष्ट मार्गदर्शन या अलग से राशि की मांग की है।

ब्लॉक सचिव संघ और जिला सचिव संघ द्वारा खर्च संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग को लेकर ज्ञापन प्राप्त हुआ है, लेकिन पंचायतों से मौखिक रूप से राशि संग्रह किए जाने जैसी किसी जानकारी की उन्हें आधिकारिक सूचना नहीं है।

गीत कुमार सिन्हा, केसीजी उपसंचालक पंचायत विभाग