ग्राम पंचायत पत्थर्रा में घास भूमि पर घमासान: “स्वच्छता की पटाई या कब्जे की तैयारी?”
शासकीय धरसा भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, सरपंच के खिलाफ धारा 40 के तहत कार्रवाई की मांग
छिराहीडीह की शासकीय भूमि पर मिट्टी पटाई और कब्जे का मामला पहुंचा कलेक्टर तक
खैरागढ़. छुईखदान ब्लॉक के ग्राम पंचायत पत्थर्रा अंतर्गत ग्राम छिराहीडीह में शासकीय धरसा (घास) भूमि पर कथित अवैध कब्जे और वित्तीय अनियमितता का मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। ग्रामीणों एवं पंचगणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सरपंच चंद्रशेखर राजपूत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि खसरा नंबर 56 की शासकीय भूमि पर बिना पंचायत प्रस्ताव और बिना वैधानिक प्रक्रिया के मिट्टी पटाई का कार्य कराया जा रहा है, जिससे सार्वजनिक भूमि के स्वरूप में बदलाव होने की आशंका जताई गई है।
रात में ट्रकों से मिट्टी पटाई, वित्तीय लाभ लेकर संरक्षण देने का आरोप
ग्रामीणों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि ग्राम की शासकीय भूमि पर कुछ विशेष व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से रात के समय ट्रकों के माध्यम से मिट्टी पटाई कराई जा रही है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि संबंधित भूमि को संरक्षित करने के बजाय कुछ लोगों को कथित रूप से आर्थिक लाभ लेकर वहां मकान निर्माण और कब्जे की मौखिक अनुमति दी गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सार्वजनिक उपयोग की भूमि स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।
ग्राम सभा में आवेदन लेने से इनकार और दुर्व्यवहार का आरोप
दिनांक 16 मई 2026 को आयोजित ग्राम सभा भी विवादों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम सभा में करीब 22 सदस्य खसरा नंबर 56 से जुड़े मामले के संबंध में लिखित आवेदन लेकर पहुंचे थे, लेकिन सरपंच द्वारा आवेदन लेने से इनकार किए जाने और आपत्ति उठाने वाले ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जनभागीदारी प्रभावित हो रही है, जिससे पंचों और ग्रामीणों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
शिकायत के साथ दस्तावेजी साक्ष्य भी सौंपे, उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने पंचायत के 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है और निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितता की आशंका है। ग्रामीणों ने मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से राजस्व विभाग के माध्यम से खसरा नंबर 56 एवं 191/1 का सीमांकन कराने, भूमि पर चल रहे कार्यों पर तत्काल रोक लगाने तथा वित्तीय लेन-देन और पंचायत निधियों के उपयोग की जांच कराने की मांग की है। शिकायत के साथ पंचों और ग्राम सभा में उपस्थित 22 सदस्यों की सूची व हस्ताक्षर, संबंधित भूमि के खसरा, बी-1 दस्तावेज, नक्शा, छायाचित्र और ग्राम की अन्य शासकीय भूमि से संबंधित अभिलेख भी संलग्न किए गए हैं। ज्ञापन की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी गंडई, तहसीलदार गंडई और मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी भेजी गई है। ग्रामीणों ने दोष सिद्ध होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंच के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का कार्य नहीं किया जा रहा - सरपंच
सरपंच चंद्रशेखर राजपूत ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि खसरा नंबर 56 की घास भूमि पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा या किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का कार्य नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि संबंधित स्थान पर नलकूप, सोलर पंप एवं पेयजल व्यवस्था के आसपास बड़ा गड्ढा और दलदली स्थिति बन गई थी, जिससे स्वच्छता और लोगों के उपयोग में परेशानी हो रही थी। पंचायत के पास पर्याप्त बजट नहीं होने के कारण उन्होंने निजी सहयोग से उस स्थान की मिट्टी पटाई कराकर सफाई और सुरक्षा का कार्य कराया। सरपंच ने कहा कि किसी को भूमि आवंटित नहीं की गई है और न ही उनके पास घास भूमि पर आवास या पट्टा देने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी प्रकार का निर्णय लिया जाएगा तो वह पंचायत प्रस्ताव और सर्वसम्मति के आधार पर ही होगा। साथ ही ग्राम सभा में दुर्व्यवहार, वित्तीय अनियमितता और दबाव बनाने जैसे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनके द्वारा आज तक ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया है।



