आमदनी में आवक से ज्यादा नुकसान! खरीदी में 11वां स्थान, सूखत में नंबर-1
56 लाख के धान का हिसाब चर्चा में, नए प्रबंधक जिम्मेदार या पहले से चल रहा था खेल?
खैरागढ़. आमदनी सेवा सहकारी समिति में 2390.39 क्विंटल धान सूखत का मामला अब ग्रामीणों और किसानों के बीच गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। लगभग 56 लाख रुपये मूल्य के धान की सूखत दर्ज होने के बाद सवाल केवल सूखत के आंकड़ों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अब समिति के प्रबंधन और पिछले वर्षों की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार आमदनी समिति में खरीफ विपणन वर्ष के दौरान कुल 1,00,966.80 क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। खरीदी के आंकड़ों के आधार पर आमदनी समिति जिले की सबसे बड़ी समिति नहीं है। अमलीपारा, गंडई, बढ़ईटोला, जालबांधा, विचारपुर, कामठा, गाड़ाडीह, अतरिया सहित कई समितियों में आमदनी से अधिक धान की खरीदी हुई है। इसके बावजूद सूखत के मामले में आमदनी समिति जिले में सबसे ऊपर पहुंच गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब अधिक खरीदी करने वाली समितियों में सूखत का आंकड़ा अपेक्षाकृत कम है, तो आमदनी समिति में 2390 क्विंटल से अधिक सूखत दर्ज होना स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा भी चल रही है कि आखिर यह केवल प्राकृतिक सूखत का परिणाम है या इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं।
नया प्रबंधक या पुरानी व्यवस्था?
समिति के वर्तमान प्रभारी प्रबंधक विनय सिन्हा स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि यह उनका पहला खरीदी सत्र था और उन्होंने हाल के वर्षों में ही पदभार संभाला है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि सूखत का इतना बड़ा आंकड़ा सामने आया है तो इसकी जिम्मेदारी केवल वर्तमान प्रबंधन तक सीमित है या फिर यह स्थिति पूर्व वर्षों की कार्यप्रणाली और भंडारण व्यवस्था से भी जुड़ी हुई है।
अध्यक्ष के आश्चर्य पर भी चर्चा
समिति अध्यक्ष निमेश सिंह ने सूखत के आंकड़े पर आश्चर्य व्यक्त किया है और विस्तृत जानकारी कर्मचारियों एवं प्रभारी से प्राप्त होने की बात कही है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि समिति के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी प्रबंधन के साथ-साथ समिति नेतृत्व की भी होती है। इसलिए पूरे मामले में सभी संबंधित पक्षों की भूमिका को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं जारी हैं।
ग्रामीणों में नाराजगी, ज्ञापन की तैयारी
सूखत के नाम पर समिति को हुए लगभग 56 लाख रुपये के नुकसान की चर्चा अब गांवों तक पहुंच गई है। क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने बताया कि वे मामले से जुड़े दस्तावेजों और आंकड़ों के आधार पर कलेक्टर, संभागायुक्त, मुख्यमंत्री तथा खाद्य मंत्री को ज्ञापन भेजने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सूखत का आंकड़ा सामान्य सीमा से अधिक है तो इसकी वास्तविक वजह सामने आनी चाहिए।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता मनराखन देवांगन ने कहा कि धान खरीदी किसानों और सरकारी धन से जुड़ा संवेदनशील विषय है। यदि किसी समिति में सूखत का आंकड़ा असामान्य रूप से अधिक सामने आया है तो संबंधित विभागों को पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों और आम जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर भी उठाया जाएगा।
जिलेभर में बनी चर्चा
जिले में पहले ही 36 हजार क्विंटल से अधिक धान के अंतर को लेकर चर्चा चल रही है। ऐसे में आमदनी समिति का 2390.39 क्विंटल सूखत आंकड़ा अलग से सुर्खियां बटोर रहा है। धान खरीदी व्यवस्था, भंडारण क्षमता, उठाव की प्रक्रिया और अंतिम मिलान को लेकर विभाग ने जानकारी मांगी हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि खरीदी में जिले की 11वीं बड़ी समिति सूखत के मामले में पहले स्थान पर कैसे पहुंच गई।



