मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस का बड़ा हमला — “गांधी के नाम से भाजपा को एलर्जी, गरीबों के अधिकारों पर सीधा प्रहार
खैरागढ़. नगर के दादा बाड़ी में शनिवार को आयोजित मनरेगा बचाओ संग्राम की प्रेस वार्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं अभियान प्रभारी विजय जांगिड़ तथा जिला समन्वयक, पूर्व महापौर रायपुर प्रमोद दुबे ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने मनरेगा को कानून से हटाकर स्कीम बनाने को मजदूरों के अधिकारों पर हमला बताया और कहा कि इससे ग्रामीण गरीबों की रोजी–रोटी असुरक्षित हो गई है। प्रेस वार्ता में विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कोमल साहू, प्रशासनिक महामंत्री पं. मिहिर झा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष भीखम छाजेड़, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष आकाश दीप सिंह (खैरागढ़), रामकुमार पटेल (छुईखदान) तथा भिज्ञेश यादव (गंडई), गुलाब चोपड़ा, आरती मोहबिया भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
विजय जांगिड़ ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि देश के मजदूरों के लिए रोजगार की कानूनी गारंटी थी। इसे महात्मा गांधी के नाम से जोड़कर कांग्रेस ने सम्मान और सुरक्षा दोनों दी थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे स्कीम बनाकर मजदूरों का कानूनी अधिकार छीन लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब न तो 100 दिन के काम की गारंटी रही और न ही समय पर मजदूरी भुगतान की बाध्यता। “काम मिलेगा या नहीं, यह अब सरकार की मर्जी पर निर्भर हो गया है,।
प्रमोद दुबे ने अपने संबोधन में भाजपा पर वैचारिक हमला करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के नाम से सरकार को एलर्जी है, इसलिए मनरेगा का नाम बदला गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और रोजगार की गारंटी देकर गरीब को सम्मान के साथ जीने का हक दिया, जबकि भाजपा केवल नाम बदलने और भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है। 125 दिन का दावा खोखला है, जब 100 दिन का काम भी जमीनी स्तर पर नहीं मिल रहा।
प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि नई व्यवस्था में राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ बढ़ा दिया गया है और काम चुनिंदा जिलों व पंचायतों तक सीमित किया जा रहा है। इससे मजदूरों की मोल–भाव की ताकत कमजोर होगी और बड़े ठेकेदारों को लाभ मिलेगा। जांगिड़ ने कहा कि पहले मनरेगा की वजह से मजदूरी बढ़ी थी, गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई थी, लेकिन अब मजदूर फिर से साहूकारों और बड़े जमींदारों पर निर्भर होने को मजबूर होगा।
दुबे ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में हजारों मजदूर महीनों से मजदूरी भुगतान के लिए भटक रहे हैं। 57 से 60 हजार लोग रोज तूता में धरना दे रहे हैं, सरकार के पास मजदूरों को देने के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब सरकार बनने के कुछ महीनों के भीतर ही इतने बड़े पैमाने पर लोग सड़क पर हैं। इसे उन्होंने भाजपा सरकार की विफलता बताया।
प्रमोद दुबे ने स्पष्ट किया कि मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत फरवरी तक चरणबद्ध आंदोलन, धरना और प्रदर्शन जारी रहेंगे। विजय जांगिड़ के नेतृत्व में कांग्रेस गांव–गांव जाकर मजदूरों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी और भाजपा सरकार को गारंटी आधारित मनरेगा व्यवस्था बहाल करने के लिए मजबूर करेगी। प्रेस वार्ता के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे गरीबों और ग्रामीण भारत की लड़ाई बताते हुए जनता से समर्थन की अपील की।
मनरेगा पर सरकार के दावों पर विजय जांगिड़ के करारे जवाब
सवाल 1: सरकार कह रही है कि अब मजदूरों को 125 दिन का काम मिलेगा, इसकी गारंटी दी जा रही है।
जवाब (विजय जांगिड़): जब 100 दिन का काम ही कभी ठीक से नहीं दिया गया, तो 125 दिन का दावा सिर्फ भ्रम फैलाने के लिए है। असल मुद्दा यह है कि पहले मनरेगा कानून था, जिसमें काम की गारंटी थी। काम नहीं मिलने पर भत्ता देने का प्रावधान था। भाजपा सरकार ने इसे कानून से हटाकर ‘स्कीम’ बना दिया, यानी अब सरकार पर काम देने की बाध्यता ही नहीं रही। 125 दिन का शोर सिर्फ एक जुमला है, हकीकत में मजदूर को काम की कोई कानूनी गारंटी नहीं बची है।
सवाल 2: सरकार ने 60 दिन का ब्रेक लगाने का प्रावधान किया है। उनका कहना है कि सिंचाई और खेती के सीजन में मजदूरों की कमी हो जाती है, इसलिए विकसित भारत जी राम जी को रोका जाएगा ताकि किसानों को मजदूर उपलब्ध हो सके।
जवाब (विजय जांगिड़): यह पूरी तरह मजदूर विरोधी सोच है। पहले भी खेती के समय मजदूर मिलते थे, लेकिन तब मजदूरी मजदूर तय करता था। अब बड़े जमींदार और साहूकार अपनी मर्जी से मजदूरी तय करेंगे। सरकार चाहती तो नरेगा के मजदूरों से खेती से जुड़े काम करवा सकती थी – मेड़ बनवाना, सिंचाई नालियां बनवाना जैसे काम। कई राज्यों में हमने यह करके दिखाया भी है। लेकिन भाजपा सरकार ने जानबूझकर नरेगा पर ब्रेक लगाया, ताकि मजदूर मजबूरी में कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर हो जाए। इसका सीधा नुकसान गरीब और असंगठित मजदूर को होगा।



