4 साल से राजनांदगांव में अटका भुगतान, बार-बार पत्राचार के बाद भी नहीं जारी हुई राशि; केसीजी की पंचायतें बेहाल
00 काम पूरा, भुगतान अधूरा: तीन साल से फाइलों में कैद 4.57 लाख रुपये
00 डीएमएफ फंड का मामला कार्य पूर्ण लेकिन अब तक जारी नहीं हुई राशि
खैरागढ़. चार साल पहले स्वीकृत हुआ काम, समय पर पूरा भी हो गया, मूल्यांकन और सत्यापन भी हो गया, लेकिन भुगतान आज तक नहीं हुआ। प्रशासनिक उदासीनता का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक ग्राम पंचायत की आर्थिक कमर तोड़ दी है। राजनांदगांव जिले के समय स्वीकृत हुए कार्य का भुगतान आज तक नहीं मिलने से ग्राम पंचायत मंडला की सरपंच, सप्लायर और मजदूर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। सरपंच ने 15 दिवस के भीतर अगर भुगतान नहीं होता तो कार्यालय का घेराव पंचायत पदाधिकारियों के साथ किया जाएगा।
आधी राशि मिली, बाकी भुगतान तीन साल से लंबित
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत मंडला में वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से वृक्षारोपण एवं सुरक्षा कार्य के लिए 10 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी। उस समय खैरागढ़, राजनांदगांव जिले का हिस्सा था। कार्य स्वीकृत होने के बाद केवल 5 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि मूल्यांकन सत्यापन के आधार पर शेष 4 लाख 57 हजार 885 रुपये का मांग पत्र वर्षों पहले भेज दिया गया था। इसके बावजूद आज तक राशि जारी नहीं की गई।
एक नहीं, तीन पंचायतों का भुगतान राजनांदगांव में अटका
मामला केवल मंडला तक सीमित नहीं है। जनपद पंचायत खैरागढ़ ने 3 फरवरी 2026 और 9 फरवरी 2026 को कलेक्टर (जिला खनिज न्यास) राजनांदगांव को अलग-अलग पत्र भेजकर अन्य लंबित कार्यों की राशि जारी करने का भी आग्रह किया है। इनमें ग्राम पंचायत जुरलाकला में डीएमएफ मद से निर्मित आंगनबाड़ी भवन का शेष 2 लाख 59 हजार 900 रुपये तथा ग्राम पंचायत केसला के आश्रित ग्राम खपरीकलार में सामुदायिक बाड़ी एवं चारागाह की चैन फेंसिंग कार्य का कुल 2 लाख 59 हजार 900 रुपये का भुगतान आज तक लंबित है। इन सभी कार्यों के उपयोगिता प्रमाण पत्र, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र, एमबी की प्रतियां, गुणवत्ता प्रमाण पत्र और फोटोग्राफ भी राजनांदगांव भेजे जा चुके हैं।

चार बार पत्राचार, फिर भी नहीं पसीजा प्रशासन
इस मामले में जनपद पंचायत खैरागढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कलेक्टर राजनांदगांव को फिर पत्र लिखकर शेष राशि जारी करने का अनुरोध किया है। इससे पहले वर्ष 2023, 2024 और 2025 में भी कई बार पत्राचार किया जा चुका है। बावजूद इसके भुगतान की फाइल आगे नहीं बढ़ी और पंचायत को आज तक उसका हक नहीं मिल सका।
राजनांदगांव और केसीजी के बीच फंसी भुगतान की जिम्मेदारी
जिला विभाजन के बाद अब दोनों जिलों के बीच जिम्मेदारी टलती नजर आ रही है। केसीजी जिले के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित फंड अभी भी राजनांदगांव जिले के पास है। जब तक वहां से राशि हस्तांतरित नहीं होगी, भुगतान संभव नहीं है। वहीं राजनांदगांव से राशि जारी नहीं होने के कारण वर्षों से पूरा मामला अधर में लटका हुआ है।
सप्लायर का तकादा, सरपंच कर्ज में डूबा
भुगतान नहीं मिलने से सप्लायर लगातार सरपंच से पैसे मांग रहे हैं। सरपंच का कहना है कि कार्य पूरा कराने के लिए उन्होंने निजी स्तर पर उधार लेकर खर्च किया था। अब रोज सप्लायरों के फोन आ रहे हैं, लेकिन भुगतान करने का कोई साधन नहीं है। कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
सवाल: आखिर चार साल से भुगतान रोकने का जिम्मेदार कौन?
जब शासन ने कार्य स्वीकृत किया, कार्य पूरा हुआ, मूल्यांकन भी हो गया और जनपद पंचायत कई बार भुगतान की मांग कर चुकी है, तो आखिर चार साल से राशि क्यों अटकी हुई है? क्या जिला विभाजन का खामियाजा पंचायत और सप्लायर भुगतेंगे? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन इस मामले में कब जिम्मेदारी तय करेगा और वर्षों से लंबित भुगतान कब जारी होगा।
दोबारा पत्राचार भेज जाएगा- पटेल
जिला पंचायत केसीजी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल ने कहा कि मंडला सहित अन्य लंबित डीएमएफ कार्यों की जानकारी उनके संज्ञान में है। संबंधित सरपंच भी इस संबंध में उनसे मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि इन कार्यों के भुगतान के लिए दोबारा पत्राचार राजनांदगांव भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कार्य तत्कालीन राजनांदगांव जिले की कार्ययोजना के तहत स्वीकृत हुए थे, इसलिए भुगतान की प्रक्रिया वहीं से पूरी होनी है। यदि किसी कारणवश राशि अब तक जारी नहीं हुई है, तो उसके लिए फिर से आवश्यक पत्राचार कर मामले का निराकरण कराया जाएगा, ताकि पंचायतों को उनका लंबित भुगतान मिल सके।
जांच कर नियमानुसार राशि जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी - प्रभारी खनिज शाखा राजनांदगांव
राजनांदगांव जिले के प्रभारी खनिज शाखा संयुक्त कलेक्टर प्रकाश टंडन ने बताया कि उन्हें पुराने लंबित मामलों की पूरी जानकारी नहीं है, क्योंकि पिछले लगभग एक वर्ष से वे प्रभारी अधिकारी के रूप में कार्य देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जनपद पंचायत खैरागढ़ लंबित कार्यों, स्वीकृत राशि और बकाया भुगतान का पूरा विवरण नोडल अधिकारी के माध्यम से उपलब्ध कराती है, तो मामले की जांच कर नियमानुसार लंबित राशि जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में मोहला-मानपुर जिले के लंबित प्रकरणों में भी राशि जारी की जा चुकी है।
हमारे द्वारा पत्र लिखा गया है आगे कार्रवाई कर रहे है।
हिमांशु गुप्ता, सीईओ जनपद पंचायत खैरागढ़



