तेजस्वी वर्मा की हरित मुहिम: 2014 से गांव–गांव तक जल और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल
ठेलकाडीह. जब अधिकतर लोग सुविधा और स्वार्थ की राह चुनते हैं, तब राजनांदगांव ब्लॉक के बासुला निवासी स्वयंसेवक तेजस्वी वर्मा बीते एक दशक से समाज और प्रकृति के लिए निस्वार्थ सेवा का रास्ता चुनकर एक मिसाल बन चुके हैं। वर्ष 2014 से वे लगातार क्षेत्र के अलग–अलग गांवों में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अनोखा अभियान चला रहे हैं, जिसने युवाओं, महिलाओं और किसानों को प्रकृति से जोड़ने का काम किया है।
निशुल्क पौध वितरण और जनभागीदारी से बदली गांवों की तस्वीर
तेजस्वी वर्मा हर वर्ष विभिन्न गांवों में निशुल्क छायादार और फलदार पौधों का वितरण करते हैं। इस अभियान में गांव के युवक, किसान, महिलाएं और यूट्यूब जैसे माध्यमों से जुड़े युवा भी बढ़–चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सार्वजनिक स्थलों, स्कूल परिसरों, पंचायत भवनों और खाली पड़ी जमीनों पर वृक्षारोपण कर वे कम समय में अधिक से अधिक पेड़ लगाने की रणनीति के साथ काम कर रहे हैं। सीड बॉल जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बंजर इलाकों को भी हराभरा बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

जल संरक्षण को लेकर घर–घर तक जागरूकता अभियान
जल संरक्षण को लेकर भी तेजस्वी वर्मा का अभियान उतना ही प्रभावी है। वे गांव–गांव जाकर बुकलेट, पंपलेट और प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से लोगों को पानी बचाने के तरीके समझाते हैं। वर्षा जल संचयन, तालाबों की सफाई, कुओं और हैंडपंपों के संरक्षण जैसे विषयों पर लगातार जन जागरूकता फैलाकर वे लोगों को यह समझा रहे हैं कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

बिना स्वार्थ जनता तक पहुंचाई जा रही सरकारी योजनाएं
बिना किसी लाभ, लालच या प्रचार की चाह के तेजस्वी वर्मा शासन और प्रशासन की विभिन्न योजनाओं को भी आम जनता तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। चाहे वह जल जीवन मिशन हो, वृक्षारोपण अभियान हो या पर्यावरण से जुड़ी योजनाएं—वे हर योजना की जानकारी लोगों तक पहुंचाकर उन्हें उसका लाभ दिलाने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि जागरूक नागरिक ही मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं।

युवा, महिला और किसान— राष्ट्र निर्माण की धुरी
तेजस्वी वर्मा का यह अभियान केवल पेड़ लगाने या पानी बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं, महिलाओं और किसानों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। उनका संदेश साफ है—यदि हर नागरिक अपने आसपास के पर्यावरण और जल स्रोतों की रक्षा करे, तो देश स्वतः ही श्रेष्ठ राष्ट्र बन जाएगा। उनकी निस्वार्थ सेवा आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।



