लिखित समर्थन की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों के घर पहुंचे किसान अधिकार संघर्ष समिति के सदस्य
खैरागढ़. जिले के दनिया–अतरिया–हनईबन–उदयपुर परिक्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खदान और सीमेंट फैक्ट्री के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस परिक्षेत्र के 55 गांवों के किसान और ग्रामीण परिवारजन लंबे समय से इस परियोजना को लेकर आशंकित हैं और इसे क्षेत्र के लिए विनाशकारी बता रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों से लिखित समर्थन की मांग
ग्रामीणों और किसानों ने जिले के सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष–उपाध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्यों और पूर्व विधायकों को पत्र लिखकर परियोजना के विरोध में लिखित समर्थन देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने-अपने सदन और बैठकों में इस परियोजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर किसानों के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाएं।
परियोजना को हमेशा के लिए रद्द करने की अपील
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दनिया–अतरिया–हनईबन–उदयपुर परिक्षेत्र में प्रस्तावित खदान और सीमेंट फैक्ट्री को सदैव के लिए निरस्त, रद्द या बंद किया जाए। ग्रामीणों का तर्क है कि यह परियोजना खेती, जल स्रोत, पर्यावरण और ग्रामीण जीवनशैली पर गहरा नकारात्मक असर डालेगी।
किसानों का कहना: महीनों से जारी है विरोध
किसान अधिकार संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में ग्रामीणों का कहना है कि वे कई महीनों से अलग–अलग स्तर पर अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। इसी कारण अब जनप्रतिनिधियों से सीधे लिखित समर्थन और प्रस्ताव की प्रति मांगी जा रही है।
संगठनात्मक ढांचे के साथ मजबूत आंदोलन
इस विरोध आंदोलन को पूर्व जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का संरक्षण और मार्गदर्शन मिल रहा है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यह संघर्ष केवल एक गांव या कुछ लोगों का नहीं, बल्कि पूरे परिक्षेत्र के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
ग्रामीण चेतावनी: पीछे हटने का सवाल नहीं
ग्रामीणों और किसानों ने साफ संकेत दिया है कि जब तक परियोजना को पूरी तरह रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई जमीन, पानी, खेती और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा की है, जिस पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।



