2 घंटे बिजली गुल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज हुए बेहाल

2 घंटे बिजली गुल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज हुए बेहाल

गर्मी में तड़पे मरीज, बिजली व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

छुईखदान। भीषण गर्मी के बीच शुक्रवार को छुईखदान में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। सुबह करीब 8 बजे से बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित नगर के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार करीब 2 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही, जिससे अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ गईं। गर्मी और उमस के कारण मरीज घंटों परेशान होते रहे, वहीं अस्पताल की व्यवस्थाएं भी प्रभावित होती रहीं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण आए दिन ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हो रहा है और विभाग समस्याओं के समाधान के बजाय आम जनता की परेशानियां बढ़ा रहा है। गर्मी के इस मौसम में बार-बार बिजली बंद होने से बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि हाल ही में सुशासन तिहार के दौरान गोपालपुर में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत सभापति ललित चोपड़ा ने भी मंच से बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने विभाग के एक अधिकारी पर लापरवाही, दुर्व्यवहार और पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बावजूद बिजली व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और नागरिकों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर बिजली आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।

वही स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने इस घटना के बाद सामुदायिक उप स्वास्थ्य केंद्र छुईखदान की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जीवनदीप समिति के माध्यम से संचालित स्वास्थ्य केंद्र में आज तक बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए कोई स्थायी बैकअप व्यवस्था विकसित नहीं की गई है। भीषण गर्मी के दौरान घंटों बिजली गुल रहने से मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आपातकालीन उपचार के लिए पहुंचे लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि जीवनदीप समिति के पास उपलब्ध संसाधनों का उपयोग जनहित के आवश्यक कार्यों में अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रहा है, जिसके कारण अस्पताल में जनरेटर अथवा अन्य वैकल्पिक बिजली व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। लोगों का कहना है कि यदि भविष्य में किसी गंभीर मरीज के उपचार के दौरान लंबा बिजली संकट उत्पन्न हुआ तो स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल प्रभाव से सुदृढ़ बैकअप व्यवस्था स्थापित किए जाने की मांग उठने लगी है।