बजट बिना अनुमोदन भेजा गया, फिर भी “प्रक्रियात्मक त्रुटि” बताकर मामला दबाने का आरोप — सभापति सुधीर गोलछा भड़के
खैरागढ़. जनपद पंचायत छुईखदान के वर्ष 2025-26 के बजट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सभापति सुधीर गोलछा ने आरोप लगाया है कि बिना सामान्य सभा और सामान्य प्रशासन समिति के अनुमोदन के ही बजट तैयार कर उच्च कार्यालय भेज दिया गया, जो पूरी तरह फर्जी और बोगस है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों की जानकारी और स्वीकृति के बिना करोड़ों के आय-व्यय का प्रस्ताव भेजना पंचायत व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है।
गोलछा ने दावा किया कि वे सभी स्थायी समितियों और सामान्य सभा की बैठकों में लगातार उपस्थित रहे, लेकिन किसी भी बैठक में बजट पर विधिवत चर्चा या अनुमोदन नहीं हुआ। इसके बावजूद अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से बजट अनुमोदन हेतु भेज दिया गया। उन्होंने इसे “सुनियोजित वित्तीय अनियमितता” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच दल गठित करने की मांग की थी।

जिला स्तर पर हुई जांच में यह स्वीकार किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बजट बिना अनुमोदन के उच्च कार्यालय भेजे गए थे, जो नियमों के विपरीत है। हालांकि जांच प्रतिवेदन में इसे “प्रक्रियात्मक त्रुटि” बताया गया और पिछली कार्यवाही को कार्योत्तर अनुमोदन से नियमित करने की बात कही गई। इस निष्कर्ष से गोलछा असंतुष्ट हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एकतरफा की गई तथा शिकायतकर्ता का बयान तक दर्ज नहीं किया गया।
सभापति ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे न्यायालय की शरण लेंगे और संबंधित अधिकारियों, जांच अधिकारी तथा उपसंचालक को पक्षकार बनाएंगे। उनका कहना है कि बिना अनुमोदन हुए खर्च, संभावित गबन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की स्पष्ट जांच होना आवश्यक है, अन्यथा जनधन के दुरुपयोग पर पर्दा पड़ जाएगा।
प्रश्न (सुधीर गोलछा के आरोप) —उत्तर (जांच प्रतिवेदन के अनुसार)
प्रश्न 1: क्या बिना सामान्य सभा के अनुमोदन के बजट बनाकर भेजा गया?
उत्तर: जांच में पाया गया कि बजट अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया गया था, लेकिन अनुमोदन नहीं होने पर भी उच्च कार्यालय को भेज दिया गया — इसे नियमों के विपरीत माना गया।
प्रश्न 2: क्या यह फर्जी और बोगस बजट है?
उत्तर: जांच रिपोर्ट ने इसे फर्जी नहीं कहा, बल्कि “प्रक्रियात्मक त्रुटि” बताया और जिम्मेदारी तत्कालीन अधिकारियों पर डाली।
प्रश्न 3: क्या बिना अनुमोदन खर्च भी किया गया?
उत्तर: रिपोर्ट में माना गया कि बिना अनुमोदन व्यय अनियमित है।
प्रश्न 4: क्या समिति ने बजट को गलत पाकर अस्वीकार किया?
उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार समिति ने अनुमोदन से इंकार किया या मार्गदर्शन मिलने तक स्थगित किया, जिसे नियमों के विपरीत माना गया।
प्रश्न 5: क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही गई?
उत्तर: रिपोर्ट में कहा गया कि नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है, पर किसी अधिकारी की स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं की गई।



